राम मंदिर के सातों शिखरों पर PM लहराएंगे भगवा ध्वज:25 नवंबर को होगा ध्वजारोहण समारोह, RSS प्रमुख भी रहेंगे मौजूद

रामनगरी अयोध्या एक बार फिर इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में अपना नाम दर्ज करने जा रही है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भव्य निर्माण की पूर्णता की औपचारिक घोषणा 25 नवंबर को ध्वजारोहण समारोह के माध्यम से होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 161 फीट ऊंचे मुख्य शिखर सहित कुल सात मंदिरों के शिखरों पर भगवा धर्म ध्वज फहराएंगे। इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित हजारों गणमान्य जन और श्रद्धालु मौजूद रहेंगे। यह समारोह श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण महायज्ञ की पूर्णाहुति का प्रतीक होगा और योगी सरकार की दूरदर्शी नीतियों का प्रमाण भी बनेगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के छह साल बाद रामभक्तों का स्वर्णिम क्षण 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था। ठीक छह वर्ष बाद, नवंबर 2025 रामभक्तों के लिए स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी महाराज के अनुसार, ध्वजारोहण के लिए तैयार किया गया भगवा ध्वज 22 फीट लंबा और 11 फीट चौड़ा है। इस पर वाल्मीकि रामायण में वर्णित रघुवंश के प्रतीक, सूर्य, ॐ और कोविदार वृक्ष अंकित होंगे। यह ध्वज 42 फीट ऊंचे ध्वजदंड पर स्थापित किया जाएगा, जो 360 डिग्री घूमने वाली चैंबर पर रहेगा और 60 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा की गति तक सहन कर सकेगा। देशभर के 108 आचार्य कराएंगे धार्मिक अनुष्ठान 21 से 25 नवंबर तक पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान होगा, जिसमें रामचरितमानस पाठ, श्रीराम रक्षा स्तोत्र पारायण और वैदिक हवन शामिल रहेंगे। काशी के विद्वान गणेश्वर शास्त्री के नेतृत्व में अयोध्या, काशी और दक्षिण भारत के 108 आचार्य यह अनुष्ठान संपन्न कराएंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री चंपत राय ने बताया कि मंदिर का निर्माण पारंपरिक नागर शैली में किया गया है। मंदिर की लंबाई 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट और प्रत्येक मंजिल की ऊंचाई 20 फीट है। तीन मंजिला इस मंदिर में कुल 392 खंभे और 44 द्वार हैं। बाल रूप में विराजमान श्रीरामलला, प्रथम तल पर श्रीराम दरबार गर्भगृह में प्रभु श्रीरामलला बाल रूप में विराजमान हैं, जबकि प्रथम तल पर श्रीरामदरबार के दर्शन होंगे। परिसर में पंचायतन के सभी मंदिरों का निर्माण पूरा हो चुका है। परकोटे में भगवान सूर्य, मां भगवती, गणपति, भगवान शिव, मां अन्नपूर्णा और हनुमान जी के मंदिर हैं। मंदिर परिसर में निषादराज, माता शबरी, देवी अहिल्या, संत तुलसीदास, महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र और महर्षि अगस्त्य की स्मृति में भी निर्माण किया गया है। कुबेर टिला स्थित प्राचीन शिव मंदिर का जीर्णोद्धार और जटायु की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। रामसेतु निर्माण में सहयोग देने वाली गिलहरी की प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र होगी। प्रधानमंत्री मोदी ‘क्रॉसिंग 11’ से करेंगे प्रवेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्रॉसिंग 11 आद्यगुरु शंकराचार्य द्वार से मंदिर परिसर में प्रवेश करेंगे। वे हनुमानगढ़ी के दर्शन करने के बाद सप्त मंडप और रामायण की 3डी म्यूरल्स का अवलोकन करेंगे। इस आयोजन की सफलता में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने न केवल मंदिर निर्माण को गति दी, बल्कि अयोध्या के समग्र विकास का भी खाका खींचा। शहर को धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया गया। होटल, गेस्ट हाउस, सड़कों, एयरपोर्ट और सुरक्षा ढांचे को सशक्त बनाकर अयोध्या को वैश्विक पहचान दिलाई गई। प्राण प्रतिष्ठा के बाद से करोड़ों श्रद्धालु अयोध्या आ चुके हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला और हजारों लोगों को रोजगार मिला। चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने लिया तैयारियों का जायजा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने रविवार को मंदिर परिसर का सूक्ष्म निरीक्षण किया और ध्वजारोहण की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने निर्माण एजेंसियों के साथ बैठक कर कार्य को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। सीएम योगी ने पीएम को दिया था निमंत्रण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रण सौंपा था। उन्होंने आयोजन की रूपरेखा और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर चर्चा की। दीपोत्सव से लेकर मंदिर सुरक्षा तक हर आयोजन में योगी सरकार की भूमिका प्रशंसनीय रही है।