प्रयागराज में महिला की लाश को घसीटा, VIDEO:पुलिसकर्मी खड़ा होकर देखता रहा, ट्रैक पर मिली थी डेडबॉडी

प्रयागराज में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना हुई। यहां स्वरूप रानी अस्पताल की मॉर्च्युरी में महिला की डेडबॉडी को एक व्यक्ति घसीटकर ले गया। जबकि वहीं एक पुलिसकर्मी खड़ा होकर यह सब देखता रहा। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। रविवार दोपहर सराय इनायत इलाके के वाराणसी-प्रयागराज रेलवे ट्रैक पर 40 साल की एक महिला की लाश मिली। कॉन्स्टेबल पोस्टमॉर्टम के लिए ऑटो से डेडबॉडी लेकर पहुंचा। लाश के करीब मिले दस्तावेज से पुलिस ने उसकी पहचान शन्नो पत्नी जहाजी के रूप में की। पुलिस के मुताबिक, शव के बारे में परिवार को सूचना दी गई। लेकिन वह समय से घटनास्थल पर नहीं पहुच सके। पुलिस ने स्थानीय लोगो की मौजूदगी में लाश का पंचायतनामा भर कर उसे मॉर्च्युरी हाउस भेज दिया। सिपाही शिवाकांत ने बताया- मैं मॉर्च्युरी पर ऑटो से डेडबॉडी लेकर पहुंचा। यहां पहुंचने के बाद ऑटो खड़ी करके ड्राइवर कहीं चला गया। मैंने डेड बॉडी को वहां के कर्मचारियों के सुपुर्द कर दिया। मैं पैसे देकर वहां से चला आया था। इसके बाद क्या हुआ मुझे पता नहीं। सराय इनायत एसओ संजय गुप्ता ने बताया- महिला ने ट्रेन से कटकर सुसाइड किया था, उसके डेडबॉडी को पोस्टमार्टम के लिए मॉर्च्युरी भिजवा दिया गया था। वीडियो की जानकारी मुझे नहीं है। CMO डॉ. एके तिवारी ने कहा- हमारे पास शव को घसीटने की कोई शिकायत नहीं आई है। अगर परिजन शिकायत करते हैं तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट ने एसआरएन अस्पताल को लगा चुका है फटकार हाईकोर्ट ने कहा- इसे अस्पताल नहीं शवगृह कहना उचित
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 6 महीने पहले स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल की दुर्दशा को लेकर तल्ख टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि इसे अस्पताल नहीं शवगृह कहना ज्यादा उचित होगा। कोर्ट ने कहा था कि प्रयागराज मेडिकल माफियाओं के चंगुल में फंसा है। माफिया के दलाल आम आदमी को प्राइवेट अस्पतालों तक पहुंचाते हैं। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने सुनवाई के दौरान सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस, खराब स्वास्थ्य सेवाओं और भ्रष्टाचार के मामलों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। न्याय मित्र ने दी SRN की भयावह स्थिति की रिपोर्ट
हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त न्याय मित्र की रिपोर्ट में अस्पताल की भयावह स्थिति उजागर हुई। इस पर कोर्ट ने अस्पताल के अफसरों के साथ ही जिला प्रशासन और नगर निगम के भी अफसरों को भी तलब किया। कोर्ट ने कहा कि महाकुंभ 2025 के दौरान 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन के बावजूद चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से विफल रही। सौभाग्यवश कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई, वर्ना हालात बेहद भयावह हो सकते थे। हाईकोर्ट ने प्रशासन को दिए थे ये निर्देश —————————- ये खबर भी पढ़ें
यूपी में ईवी टैक्स फ्री और सब्सिडी भी:10 लाख की कार खरीदते ही 90 हजार का फायदा, हर साल 30 हजार की बचत यूपी में अब इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) खरीदना और भी सस्ता हो गया है। EV खरीदारों को अब रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस जमा नहीं करनी होगी। परिवहन विभाग ने अपने पोर्टल में संशोधन कर इस छूट को तत्काल लागू कर दिया है। यह राहत 13 अक्टूबर, 2027 तक जारी रहेगी। पढ़िए पूरी खबर