लखनऊ पंडित गोविंद बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन, बीरबल साहनी मार्ग पर चल रहे उत्तराखंड महोत्सव में रंग, संगीत और परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। महोत्सव के दूसरे दिन कतारबद्ध स्टॉल, आकर्षक सजावट और दिनभर चली प्रतियोगिताओं ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया। छोलिया दल की प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर को लोक संस्कृति की छटा से भर दिया। महोत्सव के दूसरे दिन का शुभारंभ एनटीपीसी के मुख्य महाप्रबंधक एवं क्षेत्रीय प्रमुख (मानव संसाधन) समीरन सिन्हा रे ने उत्तराखंड महापरिषद के पदाधिकारियों के साथ दीप प्रज्वलित कर किया। मुख्य अतिथि समीरन सिन्हा रे ने इस अवसर पर कहा कि ऐसे आयोजन लोक कलाकारों को मंच प्रदान करते हैं और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण हैं। 20 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया दिन में ‘काफल’ एकल गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें 20 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में अंबादत्त कांडपाल ने प्रथम, देवेश्वरी पवार ने द्वितीय और रेनू सिन्हा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सुनीता कनवाल और सीता नेगी निर्णायक मंडल में शामिल थीं। बैदेही वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से डॉ. रूबी राज सिन्हा के नेतृत्व में ‘महिषासुर मर्दिनी’ के नौ रूपों की जीवंत झांकी प्रस्तुत की गई, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया। मंच पर अन्या भट्ट का नृत्य, नम्रता मिश्रा का भजन, रंजना जोशी का गायन और सुप्रिया रावत का भोजपुरी गायन भी हुआ। लोक संगीत फाउंडेशन और लोक संस्कृति फाउंडेशन के दलों ने भी लोक नृत्यों की शानदार प्रस्तुतियां दीं। प्रतियोगिता में पांच दलों ने अपनी सुंदर प्रस्तुतियां दीं शाम के समारोह में उत्तराखंड जनकल्याण समिति, हंसा नृत्य नाट्य कला विकास सोसायटी (देहरादून) और गढ़वाल के दल ने गणेश वंदना, रासो और घसियारी नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को पारंपरिक रंगों से सराबोर कर दिया। इसके साथही, झोड़ा प्रतियोगिता में पांच दलों ने अपनी सुंदर प्रस्तुतियां दीं। ‘नाचेगा भारत’ और ‘डांस उत्तराखंड डांस – सीजन 4’ के विभिन्न दलों ने आधुनिक और पारंपरिक नृत्यों से मंच को जीवंत बनाए रखा। मीडिया प्रभारी राजेंद्र सिंह कनवाल ने बताया कि समूह गायन, छोलिया नृत्य, अवधी एवं पहाड़ी लोकगीत, सूफी कथक, फैट टू फिट ग्रुप की ऊर्जावान प्रस्तुतियाँ महोत्सव को एक शानदार सांस्कृतिक उत्सव में बदल दिया।