दिल्ली में हुए ब्लास्ट में मेरठ के मोहसिन (32) की मौत हो गई। भाई की मौत के बारे में पता चलते ही नदीम दिल्ली पहुंचा। वहां से मोहसिन का शव लेकर मेरठ आ गया। जब यह बात मोहसिन की पत्नी सुल्ताना को पता चली, तो वह भी करीब 3 घंटे बाद मेरठ पहुंच गई। इसके बाद सुल्ताना पति के शव का दिल्ली में अंतिम संस्कार करने पर अड़ गई। इसको लेकर सुल्ताना का अपनी सास संजीदा और देवर नदीम से झगड़ा हो गया। काफी देर तक चले झगड़े के बाद मोहसिन का अंतिम संस्कार दिल्ली में करने पर सहमति बनी। इसके बाद सुल्ताना पति मोहसिन के शव को दिल्ली लेकर चली गई। अब सिलसिलेवार पढ़िए पूरी खबर 32 साल का मोहसिन मूलरूप से मेरठ के न्यू इस्लामनगर की गली नंबर- 28 का रहने वाला था। करीब 2 साल पहले वह रोजी-रोटी की तलाश में परिवार के साथ दिल्ली गया था। वहां ई-रिक्शा चलाने लगा था। मोहसिन के परिवार में पत्नी सुल्ताना, 10 साल की बेटी हिफजा और 8 साल का बेटा आहद है। अभी वह दिल्ली में जामा मस्जिद स्थित पत्ता मोहल्ले में किराए के मकान में रहता था। यहीं उसकी ससुराल भी है। सोमवार शाम मोहसिन ई-रिक्शा से सवारियां लेकर लाल किला की तरफ गया था। इसी दौरान लाल किले के पास ब्लास्ट हुआ। मोहसिन भी इसकी चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई। मंगलवार सुबह मोहसिन का शव मेरठ पहुंचा, तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। मोहसिन का शव मेरठ पहुंचने के करीब 3 घंटे बाद उनकी पत्नी सुल्ताना भी वहां पहुंच गई। उसने मोहसिन के शव को मेरठ में दफनाने से इनकार कर दिया। शव दिल्ली ले जाने पर अड़ गई। इसके बाद मेरठ में शव दफनाने के लिए सास संजीदा ने बहू सुल्ताना के पैर पकड़ लिए। इस पर सुल्ताना ने भी सास के पैर पकड़कर पति का शव दिल्ली ले जाने को कहने लगी। इसे लेकर परिवार में करीब 6 घंटे तक हंगामा चलता रहा। आखिर में दिल्ली में ही मोहसिन के शव को दफनाने पर सहमति बनी। अब पढ़िए बेटे की मौत के बाद घरवालों का दर्द मां बोली- मैंने दिल्ली जाने से मना किया था
बेटे का शव देखकर मोहसिन की मां संजीदा के आंसू नहीं रुक रहे। रोते-रोते उन्होंने बताया कि 2 साल पहले मोहसिन पत्नी और बच्चों को लेकर दिल्ली चला गया था। मैंने उसे दिल्ली में काम करने से मना किया था। लेकिन, उसकी पत्नी दिल्ली की थी, इसलिए वहा नहीं माना। मोहसिन अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाना चाहता था। उनके अच्छे भविष्य की नींव रखना चाहता था। संजीदा ने बताया कि सोमवार शाम मोहसिन की पत्नी सुल्ताना ने अपने देवर नदीम को फोन किया। बताया कि बम ब्लास्ट हुआ है और मोहसिन का कहीं कुछ पता नहीं। वह देर रात तक घर नहीं लौटा। इसके बाद नदीम दिल्ली पहुंचा। उसने मोहसिन की तलाश शुरू की। जहां उसे पता चला कि मोहसिन की मौत ब्लास्ट में हो चुकी है। हम लोग मंगलवार सुबह मोहसिन का शव घर लेकर आए। संजीदा ने कहा- मेरे लाल की क्या गलती थी? किसी तरह रोज 500-600 रुपए कमाकर परिवार चलाता था। इंसानियत के दुश्मनों ने सब कुछ तबाह कर दिया। 100 बार कॉल कर ली, फोन ही नहीं उठाया
पत्नी सुल्ताना ने बताया- दोपहर 1 बजे मोहसिन रोटी खाकर निकले थे। शाम 6 बजे मैंने फोन किया तो बोले की कश्मीरी गेट पर हैं, जाम में फंसे हैं। इसके बाद से कॉल रिसीव नहीं की। शाम को मेरा भाई आया तो उसने मोहसिन के बारे में पूछा। फिर मैंने मोहसिन को कॉल किया। लगातार सौ बार कॉल किया, कॉल रिसीव नहीं हुई। मैं और मेरे बच्चे घबरा गए। सब यही कहते रहे कि मोहसिन सही है, सुबह आ जाएगा। उन्हें थोड़ी चोट लग गई है। फिर सुबह पता चला कि उनकी मौत हो गई। सुबह मेरी बिना इजाजत के ही मोहसिन के घरवाले शव लेकर मेरठ चले आए। न मुझे बुलाया, न ही मेरे बच्चों को बुलाया। मैं यहां अंतिम संस्कार नहीं करने दूंगी। मैं शव दिल्ली ले जाऊंगी। मोहसिन 9 भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर था
पिता रफीक ने कहा- मोहसिन 9 भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर था। मेरा बेटा रोजी-रोटी कमाने दिल्ली गया था। लेकिन, ब्लास्ट में उसकी जान चली गई। बेटे की मौत के बाद परिवार पर संकट आ गया है। मोहसिन अपने दोनों बच्चों को पढ़ा-लिखाकर बड़ा आदमी बनाना चाहता था। इसी सपने को पूरा करने के लिए वह मेरठ से दिल्ली जाकर ई-रिक्शा चलाने लगा। लेकिन, उसे क्या पता था कि उसकी मौत ही उसे दिल्ली तक खींच ले गई। वहीं, ब्लास्ट में मारे गए मोहसिन के घर पर लोग संवेदना व्यक्त करने पहुंच रहे हैं। उसके घर पर सैकड़ों लोगों की भीड़ लगी है। इलाके के लोगों का कहना है कि ई-रिक्शा चलाने वाले उस गरीब की क्या गलती थी? इंसानियत के दुश्मनों ने उसके पूरे परिवार को तबाह कर दिया। अब मोहसिन की मौत के बाद उसके बच्चों की देखभाल कौन करेगा। रिश्तेदार बोले- पत्नी ने पैसे के लालच में झगड़ा किया मोहसिन के रिश्तेदार मोहम्मद यूसुफ ने बताया- मोहसिन का जनाजा यहां आया, तो यहीं दफनाया जाना था। उनके माता-पिता यहीं सारे कर्मकांड करते। उसकी घरवाली सुल्ताना भी यहीं रहती। पूरा परिवार मोहसिन के आखिरी काम में शामिल हो जाता। लेकिन, मोहसिन की पत्नी सुल्ताना नहीं मानी। वो अकेले शव लेकर दिल्ली चली गई। यहां का माहौल बहुत खराब है। मोहसिन की माता-पिता और बहनों की स्थिति बहुत गंभीर है। उन लोगों को होश ही नहीं है। मोहसिन की पत्नी से पूरा परिवार नाराज है। सुल्ताना पैसों की वजह से या किसी लालच में ऐसा कर रही है।
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