तीन दिन तक नहीं सुनी तो छात्र ने आग लगाई:मुजफ्फरनगर में स्टूडेंट्स बोले- BJP नेताओं का नाम लेकर धमकाते हैं प्रिंसिपल

यूपी के मुजफ्फरनगर में DAV पीजी कॉलेज के BA थर्ड ईयर के छात्र उज्ज्वल राणा ने 8 नवंबर को आग लगाकर जान दे दी। वो 7 हजार रुपए फीस नहीं भर पाया, तो प्रिंसिपल ने सबके सामने बेइज्जत किया था। उज्ज्वल इस घटना से करीब 3 दिन पहले तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर छात्रों का दर्द बयां करता रहा, लेकिन किसी ने सीरियस नहीं लिया। थक-हारकर उसने आत्मदाह जैसा कदम उठाया। कॉलेज का प्रिंसिपल प्रदीप सिंह रसूखदार है। उसके BJP के पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, पूर्व विधायक संगीत सोम, पूर्व राज्यसभा सांसद विजयपाल तोमर सहित कई नेताओं से अच्छे ताल्लुकात हैं। पॉलिटिकल अप्रोच की वजह से उसका छात्रों और स्टाफ के प्रति अच्छा व्यवहार नहीं रहता। आत्मदाह प्रकरण के बाद एक महिला प्रोफेसर का इस्तीफा देना, इस बात का ताजा उदाहरण है। दैनिक भास्कर ग्राउंड जीरो पर पहुंचा। हमने समझना चाहा कि उज्ज्वल ने इतना खौफनाक कदम क्यों उठाया? प्राचार्य के व्यवहार को लेकर बाकी स्टूडेंट्स क्या कहते हैं? पूरी रिपोर्ट पढ़िए… अब स्टूडेंट्स की बात… छात्राएं बोली– प्रिंसिपल बदतमीज हैं
कॉलेज स्टाफ से लेकर छात्रों में प्राचार्य प्रदीप सिंह के व्यवहार को लेकर जबरदस्त नाराजगी है। हमने इस कॉलेज के कई छात्र-छात्राओं से बात की। प्राचार्य का व्यवहार कैसा है? इस सवाल पर बीए तृतीय वर्ष की छात्रा सानिया त्यागी कहती हैं- प्रिंसिपल का व्यवहार बिल्कुल खराब है। इस कॉलेज के ड्राइवर भी ऐसा व्यवहार करते हैं, जैसे वो खुद प्रिंसिपल हों। पॉलिटिकल साइंस की मैडम निलोफर ने भी इसी व्यवहार की वजह से रिजाइन दिया था। इसके बाद हम सभी स्टूडेंट्स इकट्ठा होकर प्रिंसिपल के पास गए। हमारी मांग थी कि नए टीचर की व्यवस्था की जाए। प्रिंसिपल ने कहा कि तुम क्लास तो आते नहीं, हम टीचर कहां से लाएं? प्रिंसिपल इतना बदतमीज हैं कि स्टाफ से लेकर छात्रों तक से गलत भाषा का इस्तेमाल करते हैं। यहां कोई भी ठीक नहीं है। ‘भाजपा नेताओं का नाम लेकर धमकाते हैं प्राचार्य’
क्या प्राचार्य की कोई पॉलिटिकल अप्रोच है? इस सवाल के जवाब में छात्र अमृत कुमार कहते हैं- प्राचार्य बोलते हैं कि मेरा बैकग्राउंड देखिए। मुझ पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जो मन में आएगा, वो करूंगा। कई भाजपा नेताओं का नाम लेकर वो छात्र-छात्राओं को धमकाते रहते हैं। बालियान और कई नेताओं का नाम लेते रहते हैं। प्राचार्य ये दिखाते हैं कि मुझे भाजपा नेताओं का सपोर्ट है। इसी वजह से प्राचार्य का छात्रों को लेकर व्यवहार अच्छा नहीं रहता। कोई छात्र अपनी समस्या लेकर प्राचार्य के रूम में नहीं जा सकता। वो छात्रों की नमस्ते तक नहीं लेता। ​​​​​चश्मदीद बोला- छात्र के आग लगाते ही भाग निकला कॉलेज स्टाफ
उज्जवल ने जब आग लगाई, तो उसे बुझाने में कई छात्र शामिल रहे। हमने ऐसे ही एक चश्मदीद छात्र शोभान से बात की। उन्होंने बताया- जब उज्ज्वल पेट्रोल छिड़ककर आ रहा था, तब प्राचार्य ऑफिस के सामने कई टीचर खड़े थे। उज्ज्वल सीधा उन्हीं के पास आया। किसी भी टीचर ने उज्ज्वल के हाथ से माचिस छीनने की हिम्मत तक नहीं की। उज्ज्वल ने जब आग लगाई, तो टीचर अपने ऑफिस के अंदर घुस गए। कॉलेज में आग बुझाने के कोई इंतजाम नहीं थे। हमने जैसे-तैसे आग बुझाई। इस प्रयास में मेरी यूनिफॉर्म और बैग भी जल गया। प्राचार्य और स्टाफ नजर बचते ही कॉलेज से फरार हो गए। ‘प्राचार्य झूठ बोल रहे, बाइक से नहीं आता था उज्ज्वल’
इस प्रकरण के बाद प्राचार्य प्रदीप सिंह का एक बयान भी सामने आया था। इसमें वो कह रहे हैं कि जो छात्र एक लाख रुपए की बाइक से आता है, वो 7 हजार फीस क्यों नहीं भर सकता। इसकी सच्चाई जानने के लिए हमने कई छात्र-छात्राओं से बात की। बीए थर्ड सेमेस्टर की छात्रा पलक कहती हैं- उज्ज्वलसबके लिए आवाज उठाता था, इसलिए प्राचार्य से दुश्मनी थी। लाइब्रेरी में लड़कियों को पढ़ाई करने में दिक्कत आती थी। उज्ज्वलने आवाज उठाई, तब लाइब्रेरी की प्रॉब्लम सॉल्व हो गई। प्राचार्य अब झूठ बोल रहे हैं कि उसके पास बाइक थी। उज्ज्वलबाइक से कॉलेज आता ही नहीं था। हम मिडिल क्लास फैमिली से हैं, तो फीस दे देते हैं। लेकिन, सब छात्र एक जैसे नहीं होते। प्राचार्य को बाकी छात्रों की मजबूरी समझनी चाहिए। एम्बुलेंस में छात्र का आखिरी बयान ये था मेरा बहुत अपमान हुआ, मैं अंदर ही अंदर टूट गया…
मेरठ मेडिकल कॉलेज से छात्र उज्ज्वलको जब दिल्ली के लिए रेफर किया गया, तब फैमिली ने एम्बुलेंस के अंदर ही उसका स्टेटमेंट मोबाइल से वीडियो बनाकर रिकॉर्ड किया। उज्ज्वल ने कहा- मैं डीएवी पीजी कॉलेज बुढ़ाना का छात्र हूं। फीस जमा न होने पर मुझे डराया धमकाया गया। मैंने आवाज उठाई तो प्रिंसिपल ने मेरे साथ मारपीट की। मेरे परिवार को गाली दी। उन्होंने पुलिस को बुलाया तो पुलिस ने भी मुझे गाली दी। मेरा अपमान किया, मुझे डराया। लेकिन मैं नहीं डरा, क्योंकि मैं गलत नहीं था। मुझे प्रिंसिपल ने धमकी दी कि अरविंद लाला का ये स्कूल है। यहां पर तुम्हारी नहीं चलेगी, तुम्हें जो उखाड़ना है, उखाड़कर दिखाओ हमारा। हम तो ऐसे ही करेंगे तुम्हारे साथ। मेरा बहुत अपमान हुआ। मैं अंदर ही अंदर टूट गया। क्योंकि इस पुलिस-प्रशासन से मुझे उम्मीद थी, उसी ने मेरा साथ नहीं दिया। आज मैंने कॉलेज में जाकर खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली, क्योंकि मैं बहुत आहत था। अरविंद लाला, प्रिंसिपल, पूरा स्टाफ, किसी ने मेरा साथ नहीं दिया। सबने मुझको डराया-धमकाया। इसमें पुलिस और पीटीआई भी शामिल हैं। हर किसी को सजा मिलनी चाहिए। मैंने आत्महत्या इसलिए की, क्योंकि मैं सबको अपनी आवाज सुनाना चाहता था, लेकिन किसी ने मेरी नहीं सुनी। इससे पहले मेरठ मेडिकल कॉलेज में इलाज के वक्त भी साथियों ने छात्र उज्ज्वल का वीडियो बयान रिकॉर्ड किया। इसमें उज्ज्वल ने प्रदीप सिंह प्रिंसिपल, नंदकिशोर सबइंस्पेक्टर, चार कॉन्स्टेबल, डीएवी कॉलेज के क्लर्क और मैनेजर लाला पर आरोप लगाए। प्राचार्य के BJP नेताओं से अच्छे संबंध, इसलिए FIR में 24 घंटे बाद नाम जोड़े
प्रदीप सिंह साल-2010 से डीएवी पीजी कॉलेज के प्राचार्य हैं। ये कॉलेज बुढ़ाना के अरविंद लाला का है। वो उद्योगपति हैं और उनके कई तरह के कारोबार हैं। अरविंद लाला का पहले डीएवी इंटर कॉलेज था, जो उनके ताऊ ने साल-1950 के आसपास एस्टेब्लिश किया था। फिर डिग्री कॉलेज बना लिया। प्रदीप सिंह के BJP नेताओं से अच्छे संबंध बताए जाते हैं। प्रदीप मूलरूप से मेरठ जिले में सरधना इलाके के रहने वाले हैं। BJP के फायर ब्रांड नेता संगीत सोम भी इसी इलाके से हैं। दिसंबर-2023 में लैपटॉप वितरण कार्यक्रम में प्राचार्य प्रदीप सिंह ने भाजपा के तत्कालीन मुजफ्फरनगर सांसद संजीव बालियान को बुलाया था। इस कार्यक्रम में मौजूद रहे लोग बताते हैं कि संजीव बालियान ने भरे मंच से ये बात कही थी कि मेरी प्रदीप जी (प्राचार्य) से 25 साल पुरानी दोस्ती है। भाजपा में किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद रहे विजयपाल तोमर को प्रदीप सिंह मामा कहकर बुलाते हैं। कॉलेज स्टाफ से जुड़े लोग बताते हैं कि BJP नेताओं से नजदीकी की वजह से प्राचार्य ज्यादातर वक्त अपनी हनक में रहते हैं। प्राचार्य की पत्नी मेरठ के सिवाल खास इंटर कॉलेज में टीचर हैं। सूत्र बताते हैं कि BJP नेताओं की नजदीकियों के चलते वो अब पत्नी को भी इसी कॉलेज में प्रिंसिपल बनाने की जुगत में लगे हैं। भाजपा नेताओं से नजदीकियों की वजह से ही मुजफ्फरनगर पुलिस ने शुरुआत में FIR में हल्की धाराएं जोड़ीं। जब छात्र की मौत हो गई, तब प्रिंसिपल सहित 6 लोगों के नाम FIR में जोड़े गए और धाराएं भी बढ़ाई गईं। सूत्र बताते हैं कि प्राचार्य प्रदीप सिंह ने करीब 15 महीने पहले छात्र उज्ज्वल के खिलाफ स्थानीय पुलिस में लिखित शिकायत दी थी। कहा था कि छात्र मुझे आत्महत्या की धमकी देता रहता है। टीचर आकांक्षा ने जॉब छोड़ी, बोलीं- ये प्रिंसिपल इन-टॉलरेट है
छात्र की मौत के बाद डीएवी पीजी कॉलेज की फिजिक्स टीचर आकांक्षा चौधरी का एक बयान सामने आया। इसमें उन्होंने कहा- ये सिस्टम का फेल्योर है। सबसे बड़ा फेल्योर हम टीचर्स का है। हम अपने बच्चों को सही शिक्षा नहीं दे पा रहे। उन्हें समझा नहीं पा रहे। पूरा कॉलेज प्रशासन फेल साबित हुआ। मैं पूरी तरह बच्चों के साथ हूं। ये गलत है, ऐसा नहीं होना चाहिए था। हम बच्चों को सही मार्गदर्शन नहीं कर पा रहे, तो कोई फायदा नहीं। मैं आज अभी से ये जॉब छोड़ रही हूं। अब बहुत हो गया। ये प्रिंसिपल इन-टॉलरेट है। मैं पूरी तरह बच्चों के सपोर्ट में हूं। प्रिंसिपल के बयान से नाराजगी, धाराएं बढ़ाने की मांग
इंटरनेशनल संस्था ग्लोबल ह्यूमन राइट्स एंड सोशल जस्टिस काउंसिल की तरफ से विशाखा चौधरी ने एक बयान जारी करके इस घटना पर गहरी चिंता जताई। कहा- इस घटना के बावजूद प्रिंसिपल ने असंवेदनशील रूप से कहा कि मैंने कोई धर्मशाला नहीं खोली, जिसे मरना है मर जाए, जो होगा देखा जाएगा। ऐसा कथन न केवल अनैतिकता और मानवीय संवेदना की कमी को दर्शाता है, बल्कि धारा 306 IPC (आत्महत्या के लिए उकसावा) के अंतर्गत गंभीर अपराध का संकेत देता है। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस ने केवल IPC की धारा 351 और 352 लगाई, जो इस घटना की गंभीरता के अनुरूप नहीं। यूपी कांग्रेस का X पर पोस्ट
‘यह सिर्फ एक छात्र नहीं, यह लाखों मजबूर परिवारों का चेहरा है। मुजफ्फरनगर के डिग्री कॉलेज में खुद को आग लगाने वाले छात्र उज्ज्वल राणा की दिल्ली के अस्पताल में मौत हुई। 7 हजार रुपए फीस न भरने पर प्रिंसिपल ने उसे बेइज्जत किया था। क्या शिक्षा अब सिर्फ अमीरों की जागीर बन गई है?’ ———————– ये खबर भी पढ़ें… यूपी पुलिस का धंधा- लड़के उठाओ, पैसा लेकर छोड़ो, कैमरे पर 25000 की डिमांड, स्टिंग के बाद रिपोर्टर पर हमला 1 का 5 करा दीजिए। (एक युवक को छोड़ने के 5 हजार रुपए) 25 हजार रुपए कर दो… बरी कर देंगे। इसके बाद इन पर कोई आंच नहीं आएगी। गारंटी ले रहे। बाकी ये धारा (एससी-एसटी एक्ट) उनके लिए (दूसरा पक्ष) लग जाएगी। तुम्हारे नाते 25 बोले हैं, नहीं तो 50 से नीचे बात ना होती। पढ़ें पूरी खबर