रामकथा के सातवें दिन शबरी की नवधा भक्ति की कथा:आचार्य मिथलेश मिश्र ने ‘श्रवणं कीर्तनम्…’ श्लोक से सुनाया प्रसंग

लखनऊ ऐशबाग में चलरहे रामकथा के सातवें दिन आचार्य मिथलेश मिश्र ने शबरी की नवधा भक्ति का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने ‘श्रवणं कीर्तनम् विष्णोः स्मरणं पादसेवनम्, अर्चनं वन्दनं दास्यं…’ श्लोक के संख्यात्मक एवं संगीतमय संदर्भ में प्रभु श्रीराम के दर्शनों की वर्षों से प्रतीक्षा कर रही शबरी के प्रसंग को प्रस्तुत किया। इस अवसर पर आचार्य मिश्र ने शबरी प्रसंग के अतिरिक्त राम-सुग्रीव मित्रता, वानरराज बालि वध, माता सीता की खोज, हनुमानजी का लंका में प्रवेश, लंका दहन, राम सेतु निर्माण और राम-रावण युद्ध जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का भी वर्णन किया। श्रीराम की अयोध्या वापसी तक की घटनाओं की कथा सुनाई उन्होंने लक्ष्मण मूर्छा, हनुमानजी द्वारा संजीवनी लाने, कुंभकर्ण, मेघनाथ और रावण वध के साथ ही प्रभु श्रीराम की अयोध्या वापसी तक की घटनाओं का विस्तृत वर्णन किया। दिल्ली पीठाधीश्वर आचार्य मिथलेश मिश्र ने कथा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।इस रामकथा में सैकड़ों रामभक्तों ने भाग लिया। उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने एकाग्रता से कथा का श्रवण किया। ये लोग शामिल हुए कार्यक्रम में रामकथा आयोजक मंडल के मुख्य आयोजक और एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेन्द्र मिश्र, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सोनिका मिश्र, डॉ. विनोद अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, सत्यपाल सिंह सत्या, प्रदेश उपाध्यक्ष एल. एन. गौतम, जिला अध्यक्ष संजय सक्सेना, प्रवक्ता जितेश श्रीवास्तव, प्रदेश कोषाध्यक्ष व सचिव जितेन्द्र शर्मा, रवि दत्त तिवारी, दीपक मिश्र, रजनु मिश्र, अरुण कुमार सिंह, निर्मला सिंह, राघवेन्द्र पाठक तथा अवधेश मिश्र सहित कई भक्तगण उपस्थित थे।