‘हिंदू जब एक होंगे तो आतंकी विस्फोट करेंगे’:दिल्ली ब्लास्ट में मारे गए परिवार का दर्द; सरकार हमें अब क्या दे देगी

‘जो हमारे पास था, वो हम खो चुके हैं। अब सरकार से क्या मांग करें? न्याय किस चीज के लिए मांगें? वो जिंदा होते तो उनके लिए न्याय मांगते। इतना जरूर करेंगे कि जैसा हमारे साथ हुआ, भगवान न करे कभी किसी के साथ हो।’ ये दर्द है दीक्षा सिंघल का, जिन्होंने दिल्ली ब्लास्ट में अपने ससुर लोकेश अग्रवाल को खो दिया। लोकेश की तरह यूपी के 5 लोग इस ब्लास्ट में मारे गए। सबके परिजन गमजदा और गुस्से में हैं। परिवारवाले साफ कहते हैं कि ये आतंकी हमला था, सोची-समझी साजिश थी। दैनिक भास्कर ने ऐसे परिवारों से मिलकर उनका दर्द महसूस करने का प्रयास किया। ये लोग दिल्ली कैसे गए? क्या कर रहे थे? आखिरी बार क्या बात हुई? फैमिली को कैसे उनकी मौत की खबर आई? इस पर विस्तार से बात की। पूरी रिपोर्ट पढ़िए… अब पीड़ित परिवारों की बात… मेट्रो स्टेशन पहुंचने के 10 मिनट बाद हो गया धमाका
हम सबसे पहले अमरोहा जिले के कस्बा हसनपुर में पहुंचे। मुख्य रास्ते पर ही लोकेश अग्रवाल का मकान है। नीचे वाले हिस्से में दो दुकानें हैं। यहां शोकाकुल महिलाएं बैठी हैं। लोकेश के शव को परिजन अंतिम संस्कार के लिए ब्रजघाट गंगा घाट ले जा चुके थे। हमें उनकी बहू दीक्षा सिंघल मिलीं। दीक्षा बताती हैं- मेरी मां शशि अग्रवाल को ब्रेन हेमरेज हुआ था। वो 30 अक्टूबर से दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल में भर्ती हैं। ससुर लोकेश उन्हीं को देखने 10 नवंबर की सुबह बस से दिल्ली गए थे। शाम साढ़े 5 बजे हमारी उनसे आखिरी बार वीडियो कॉल पर बात हुई। उस वक्त वो मेरी मां से ICU में मिलकर निकल रहे थे और हॉस्पिटल की लिफ्ट में थे। उन्होंने हम सबसे हाय-हैलो की। कहा कि मैं अपने दोस्त अशोक से मिलने के लिए जा रहा हूं। उससे मिलकर सीधा घर आऊंगा। अशोक उनके करीब 15 साल पुराने दोस्त थे। मेरी बहन और ससुर हॉस्पिटल से सीधा लाल किला मेट्रो स्टेशन पहुंचे। बहन उनको ड्रॉप करके घर निकल गई। ससुर अपने दोस्त अशोक के इंतजार में खड़े रहे। करीब 10 मिनट बाद ही धमाका हुआ। आधे चेहरे का मांस बाहर निकला, अंगूठी से हुई पहचान
दीक्षा ने आगे बताया- शाम साढ़े 6 बजे पति गौरव सिंघल ने मुझसे कहा कि पापा अभी तक दिल्ली से आए क्यों नहीं? इतने में दिल्ली पुलिस से एक इंस्पेक्टर ने हमें कॉल करके बताया कि आपके ससुर का फोन हमारे पास है। कोई अज्ञात व्यक्ति ये मोबाइल देकर गया है। तब तक हमें दिल्ली में धमाके की खबर पता चल चुकी थी। इसके बाद मैंने दिल्ली पुलिस को ससुर की सारी डिटेल्स भेजी। कुछ देर बाद दिल्ली पुलिस ने हमें मृतकों और घायलों की एक लिस्ट भेजी। उसमें पापा के दोस्त अशोक का नाम लिखा था। इतना पता चलते ही रात 10 बजे परिवार के सभी सदस्य दिल्ली पहुंच गए। रात करीब एक बजे LNJP हॉस्पिटल में हमें एंट्री दी गई। तब पता चला कि ससुर नहीं रहे। शव बुरी हालत में था। आधे चेहरे का मांस निकलकर बाहर आ चुका था। जैकेट और अंगूठी से उनकी पहचान हो पाई। बॉडी पूरी तरह जली हुई थी। हॉस्पिटल से बॉडी पैक होकर आई थी, इसलिए हम बॉडी को बहुत ज्यादा देख नहीं पाए। अशोक की पत्नी बोली- पति का चेहरा खून से सना था
अमरोहा जिले में कस्बा हसनपुर से करीब 7 किलोमीटर दूर मंगरौला गांव है। यहां के रहने वाले अशोक सिंह दिल्ली में DTC में बस कंडक्टर थे। पत्नी-बच्चों के साथ दिल्ली के जगतपुरी में किराए के मकान में रहते थे। वो अपने दोस्त लोकेश अग्रवाल को रिसीव करने मेट्रो स्टेशन गए थे और ब्लास्ट में दोस्त संग मारे गए। परिवार में अब पत्नी सोनम के अलावा 3 छोटे-छोटे बच्चे रह गए हैं। सबसे बड़ी बेटी आरोही है, जिसकी उम्र 7 साल है। अशोक की बूढ़ी मां दहाड़े मारकर रोती रहीं। पत्नी सोनम ने हमें बताया- पति रोजाना सुबह साढ़े 5 बजे ड्यूटी पर चले जाते और रात 12 बजे तक घर आते थे। कल सबसे पहले मुझे गांव से कॉल आई। पूछा कि चाचा कहां हैं? मैंने कहा कि वो अभी ड्यूटी पर गए हैं, जब आएंगे तो बात करा दूंगी। फिर भांजे हिमांशु की कॉल आई। वो भी DTC बस पर नौकरी करता है। हिमांशु ने पूछा- मामा घर आ गए? मैंने उसको भी यही बात दोहराई। फिर गोपालपुर से मेरे पास जेठ का फोन आया। उन्होंने कहा- बेटा सोनम क्या कर रही है? अशोक कितने बजे तक घर आता है? जब मैंने जोर देकर ये सब जानने की वजह पूछी तो उन्होंने कुछ नहीं बताया। रात 11 बजे मुझे पता चला कि पति इस दुनिया में नहीं रहे। हालांकि, मेरे पास दिल्ली पुलिस ने कोई फोन नहीं किया। लेकिन, सारे रिश्तेदार घटनास्थल पर रात में ही पहुंच गए थे। उन्होंने वहां पहुंचकर बॉडी की पहचान कर ली थी। शव किस हालत में था? ये पूछने पर सोनम कहती हैं- पति की पहचान तक नहीं हो पा रही थी। चेहरा खून से सना हुआ था। मेरठ : रिक्शे से सवारी छोड़ने गया था मोहसिन, ब्लास्ट में मौत
मेरठ में इस्लामनगर की गली नंबर-2 में रहने वाले निवासी 32 साल के मोहसिन की भी दिल्ली ब्लास्ट में मौत हुई। मोहसिन दिल्ली में जामा मस्जिद के पास पत्ता मोहल्ला स्थित एक मकान में किराए पर रहता था और ई-रिक्शा चलाता था। परिवार में पत्नी सुल्ताना, 10 साल की बेटी हिफजा और 8 साल का बेटा आहद हैं। ब्लास्ट के वक्त वो रिक्शे में सवारियां लेकर लाल किला की तरफ गया था। मोहसिन के छोटे भाई मोहम्मद शुएब बताते हैं- ब्लास्ट के बाद हमने अपने भाई को कॉल किया। उनका मोबाइल पुलिस स्टेशन में था। वो घर भी नहीं पहुंचे थे। कई रिश्तेदार लाल किले पर घटनास्थल पर गए। वहां से बताया गया कि घायलों को LNJP हॉस्पिटल ले जाया गया है। इसके बाद सभी परिवारवाले हॉस्पिटल पहुंचे। वहां घायल और मृतक अंदर थे। उनसे किसी को मिलने नहीं दिया जा रहा था। रात करीब 3 बजे हमें कन्फर्म हुआ कि मोहसिन की भी इसमें मौत हुई है। मोहसिन की मां संजीदा कहती हैं- बेटा दो साल पहले काम करने दिल्ली गया था। मैंने मना किया था, लेकिन वो नहीं माना। उसकी पत्नी दिल्ली की रहने वाली थी, इसलिए वो भी दिल्ली में ही रहना चाहता था। श्रावस्ती में पिता को TV से बेटे की मौत की खबर मिली
दिनेश कुमार श्रावस्ती जिले के गणेशपुर गांव के रहने वाले थे। दिल्ली में एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करते थे। उनकी शादी 10 साल पहले रीना देवी से हुई थी। उनके तीन बच्चे हैं- हिमांशु (8), बिट्टा (7) और सृष्टि (4)। पत्नी रीना देवी ने बताया, ‘वह 10-12 साल से दिल्ली में रह रहे थे। 10 दिन पहले ही घर से दिल्ली गए थे। अब बच्चों को कैसे पालूं?’ पिता भूरे ने बताया- टीवी देखकर बम विस्फोट की खबर मिली। जब दिनेश का फोन मिलाने की कोशिश की तो वह बंद मिला। बाद में पता चला कि मरने वालों में दिनेश भी शामिल हैं। सड़क पार करते वक्त शामली का नौमान भी मारा गया
नौमान शामली के झिंझाना कस्बे का रहने वाला था। यहां कॉस्मेटिक की दुकान चलाता था। सोमवार को वह अपने भाई अमन के साथ दुकान का सामान खरीदने दिल्ली गया था। पार्किंग में कार खड़ी करने के बाद दोनों भाई सड़क पार कर रहे थे, तभी धमाका हो गया। दोनों इसकी चपेट में आ गए। नौमान की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अमन गंभीर रूप से घायल हो गया। अमन को एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। अब मैप से समझिए दिल्ली में हुए धमाके की लोकेशन ———————— ये खबर भी पढ़ें… बहू पति के अंतिम संस्कार के लिए सास से भिड़ी, भाई शव मेरठ लाया तो पत्नी अकेले वापस ले गई दिल्ली में हुए ब्लास्ट में मेरठ के मोहसिन (32) की मौत हो गई। भाई की मौत के बारे में पता चलते ही नदीम दिल्ली पहुंचा। वहां से मोहसिन का शव लेकर मेरठ आ गया। जब यह बात मोहसिन की पत्नी सुल्ताना को पता चली, तो वह भी करीब 3 घंटे बाद मेरठ पहुंच गई। इसके बाद सुल्ताना पति के शव का दिल्ली में अंतिम संस्कार करने पर अड़ गई। पढ़ें पूरी खबर