दिल्ली ब्लास्ट में गिरफ्तार हुई डॉ. शाहीन शाहिद उर्फ डॉ. शाहीन सईद काफी शातिर है। उसने ही छोटे भाई डॉ. परवेज अंसारी का ब्रेन-वॉश किया। ATS सूत्रों का कहना है कि शाहीन ने अपने भाई को आतंक की राह पर आगे बढ़ाया। हाईस्कूल से एमबीबीएस तक डॉ. परवेज फर्स्ट डिविजनर रहा है। 6 नंवबर को सहारनपुर से डॉ. अदील की गिरफ्तारी के बाद परवेज को भी खुद के पकड़े जाने की भनक लग गई। इसीलिए उसने एक दिन बाद 7 नवंबर को लखनऊ की प्राइवेट यूनिवर्सिटी इंटीग्रल से इस्तीफा दे दिया। डॉ. परवेज इंटीग्रल के मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर था। ई-मेल से प्रबंधन को अपना इस्तीफा भेजा। वजह किसी अन्य मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर सिलेक्शन बताया, लेकिन कहीं जॉइन नहीं किया। 24 दिसंबर, 1984 को लखनऊ में जन्मे परवेज ने बड़ी बहन के डॉक्टर बनने के बाद खुद भी डॉक्टर बनने की राह चुनी। 2011 में एरा मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की। 2015 में आगरा की बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी से संबद्ध सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज से इंटरनल मेडिसिन में एमडी की डिग्री हासिल की। 2015-16 में उसने सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज में ही सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में काम किया। 2016-17 में सहारनपुर मेडिकल कॉलेज में बतौर सीनियर रेजिडेंट काम किया। 2018-20 में खुद की क्लिनिक चलाई। 2021 में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में जॉइन किया। ATS, इंटीग्रल मेडिकल कॉलेज और डॉ. परवेज को जानने वालों से हमने बात की। पढ़िए क्या-क्या सामने आया? डॉ. अदील की गिरफ्तारी से सहम गया था परवेज
सहारनपुर में डॉ. अदील के अरेस्ट होने के बाद डॉ. परवेज समझ गया था कि पुलिस अब फरीदाबाद में बड़ी बहन डॉ. शाहीन, डॉ. मुजम्मिल और उस तक पहुंच जाएगी। इसलिए, उसने ई-मेल से इस्तीफा भेज दिया। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर परवेज ने अचानक इस्तीफा क्यों दिया? उसे फरार होना था तो वह बिना इस्तीफा दिए भी फरार हो सकता था। ATS इसकी दो वजह बता रही है… दिल्ली ब्लास्ट के अगले दिन 11 नवंबर को एटीएस और जम्मू कश्मीर पुलिस ने डॉ. परवेज के लखनऊ में मड़ियांव स्थित घर पर छापा मारा। वहां ताला तोड़कर एटीएस अंदर पहुंची। इसके कुछ देर बाद डॉ. परवेज को उसके लालबाग स्थित पुश्तैनी घर से गिरफ्तार कर लिया था। पहले क्लीन शेव रहता था, फिर लंबी दाढ़ी रखने लगा
इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के अफसर बताते हैं कि 2021 में जब डॉ. परवेज ने बतौर सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर यहां जॉइन किया, तो वह क्लीन शेव रहता था। पहनावा भी पैंट-शर्ट ही था। स्वभाव में शालीन था। लेकिन, धीरे-धीरे वह लंबी दाढ़ी रखने लगा। कुर्ता, पजामा और टोपी लगाने लगा। बीते 3 साल से डॉ. परवेज ने कम बोलना और अलग-थलग रहना शुरू कर दिया था। वह स्टूडेंट्स और साथी डॉक्टर्स से भी कम बात करता था। जितना पूछा जाता था, उतना ही बोलता था। ग्राउंड में वॉक भी अकेले ही करता था। पोल में हिस्सा लेकर राय दें… इलाज से ज्यादा पढ़ने-पढ़ाने में दिलचस्पी थी
इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के अधिकारी बताते हैं कि डॉ. परवेज की मरीजों के इलाज से ज्यादा बच्चों को पढ़ाने में दिलचस्पी थी। वह ओपीडी में बहुत कम प्रैक्टिस करता था। यही कारण है कि वह ज्यादा लोगों की नजर में भी नहीं आया। डॉ. परवेज ने 16 जुलाई, 2021 को इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में जॉइन किया। उस समय उसका वेतन 1.20 लाख रुपए महीने था। 2022 में उसे असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में पदोन्नत किया गया था। नौकरी छोड़ते समय उनका वेतन 1.70 लाख रुपए महीने था। डॉ. परवेज ने इंटीग्रल में भी एसोसिएट प्रोफेसर पद पदोन्नत के लिए आवेदन किया था। प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन उससे पहले ही रिजाइन कर दिया। हर महीने वेतन यूनिवर्सिटी परिसर स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में स्थित परवेज के खाते में ही जमा होता था। फोटो और नंबर डिलीट किए
इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों, स्टूडेंट्स और कर्मचारियों ने डॉ. परवेज का मोबाइल नंबर और उनके साथ खींचे गए फोटो भी डिलीट कर दिए हैं। साथी डॉक्टर्स और करीबी स्टूडेंट्स में डर है कि कहीं एनआईए, एटीएस या जम्मू-कश्मीर पुलिस उन्हें भी पूछताछ के दायरे में न ले। साथी कर्मचारी बताते हैं कि जब उन्हें खबर लगी तो एकाएक विश्वास नहीं हुआ कि डॉ. परवेज ऐसी गतिविधियों में शामिल हो सकता है। लेकिन, जब एलआईयू की टीम ने इसकी पुष्टि की तो वो लोग चौंक गए। पत्नी-बच्चों की डिटेल नहीं दी
डॉ. परवेज ने इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में जॉइनिंग फॉर्म में खुद को शादीशुदा बताया। लेकिन, पत्नी-बच्चों के नाम का कॉलम खाली छोड़ दिया था। चर्चा है कि शादी के बाद उसका पत्नी से अलगाव हो गया। वह बिहार में रहती थी। परवेज अकेले ही लखनऊ में रहता था। इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद हारिस सिद्दीकी का कहना है कि डॉ. परवेज अंसारी ने 7 नवंबर को मेल पर रिजाइन किया। इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में तीसरा मामला
डॉ.परवेज अंसारी से पहले भी इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के 2 डॉक्टर और कर्मचारी आतंकी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। बटला हाउस कांड में गिरफ्तार आरोपी आतंकी हाकिम भी इसी यूनिवर्सिटी में बायोटेक का स्टूडेंट था। हालांकि, वह बाद में बरी हो गया था। लखनऊ दुबग्गा में प्रेशर कुकर बम कांड में गिरफ्तार आरोपी की पत्नी भी इसी यूनिवर्सिटी में काम करती थी। आरोपी अभी जमानत पर बाहर है। परवेज के घर से मिली थी कार इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति हैं प्रो. एस.वकार अख्तर
इंटीग्रल यूनिवर्सिटी की स्थापना 2004 में हुई थी। यह कुर्सी रोड स्थित दशौली गांव में 200 एकड़ में बनी हुई है। यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति (संस्थापक) प्रो. एस.वकार अख्तर और कुलपति प्रो.जावेद मुसर्रत है। रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद हारिस सिद्दीकी है। यूनिवर्सिटी में करीब 20 हजार से अधिक छात्र हैं। यूपी के साथ उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर सहित अन्य राज्यों के बच्चे यहां आते हैं। यूनिवर्सिटी में करीब 4000 डॉक्टर, शिक्षक और कर्मचारी हैं। इन तस्वीरों से समझिए दिल्ली में कहां हुआ था धमाका ———————— ये खबर भी पढ़ें… डॉ. परवेज के घर से मिले 3 की-पैड फोन, दिल्ली ब्लास्ट के बाद ATS ने लखनऊ में की थी छापेमारी जम्मू-कश्मीर पुलिस और यूपी एटीएस की संयुक्त जांच में लखनऊ के डॉ. परवेज अंसारी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने डॉ. परवेज के 3 की-पैड फोन, एक हार्ड डिस्क और कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट बरामद किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, डॉ. परवेज आतंकी मॉड्यूल के मुख्य आरोपी डॉ. मुजाम्मिल शकील और अपनी बड़ी बहन डॉ. शाहीन शाहिद के संपर्क में था। पढ़ें पूरी खबर