इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में “नवाचारपूर्ण शिक्षण-पद्धतिः संभावनाएं और चुनौतियां” विषय पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शनिवार को संपन्न हो गई। इसमें 13 ऑफ़लाइन और 20 ऑनलाइन सत्रों के माध्यम से 25 राज्यों से आए शिक्षकों, शोधकर्ताओं, विद्वानों, नीति-निर्माताओं और शिक्षा-प्रवर्तकों ने सक्रिय बौद्धिक आदान-प्रदान किया। इस दौरान शिक्षा विभाग में नवाचारपूर्ण शिक्षण-पद्धति का केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया। संगोष्ठी का मुख्य फोकस अनुभवात्मक अधिगम, गेमिफिकेशन, प्रोजेक्ट-आधारित सीख, ब्लेंडेड व हाइब्रिड मॉडल, तथा तकनीक-सक्षम शिक्षण रणनीतियों जैसे नवाचारपूर्ण उपायों पर रहा। ऑफ़लाइन सत्रों में मुख्य व्याख्यान, स्मृति व्याख्यान, कार्यशालाएं तथा समानांतर तकनीकी सत्र शामिल रहे, जिनमें शोध-चर्चा, प्रदर्शन तथा सहयोगात्मक संवाद को प्रोत्साहन मिला। प्रो. एसबी अदवाल स्मृति व्याख्यान में प्रो. पीसी शुक्ल ने सारगर्भित विचार व्यक्त किए। प्रो. आरएस पाण्डेय स्मृति व्याख्यान में वरिष्ठ शिक्षक प्रो. केबी पाण्डेय ने अपने विचार सभी से साझा किए। ऑनलाइन सत्रों में एआई-संपन्न शिक्षा, एआर/वीआर आधारित इमर्सिव लर्निंग, मूक कोर्स, माइक्रो-लर्निंग, अनुकूली अधिगम प्रणाली और प्रौद्योगिकी के नैतिक आयाम जैसे आधुनिक विषयों पर विचार हुआ। प्रतिभागियों ने अवसंरचनात्मक अंतर, तकनीकी असमानता, शिक्षक-तैयारी और स्क्रीन थकान जैसी चुनौतियों पर भी चर्चा की। शोधार्थियों, शिक्षकों, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और विद्यालय शिक्षकों ने सैद्धांतिक और व्यावहारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शोध-पत्र प्रस्तुत किए। समापन सत्र वैलेडिक्टरी संबोधन और सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र पुरस्कारों के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। संगोष्ठी की प्रमुख अनुशंसाओं में नवाचारपूर्ण शिक्षण-पद्धति के केंद्र की स्थापना, डिजिटल अवसंरचना सुदृढ़ीकरण, क्षमता-विकास कार्यक्रमों के विस्तार प्रमुख रहे। इस मौके पर विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय यादव, डा. पतंजलि मिश्र, डा. मनीष सिंह, डा. रूचि दुबे, डा. सरोज यादव, डा. डीपी सिंह, डा. शीलू और डा. कविता सिंह मौजूद रहे।