महाकुंभ में साध्वी बनी लड़की 10 महीने बाद घर लौटी:बोली- अब पढ़-लिखकर कुछ बनूंगी; मां ने कहा- बाबा के बहकावे में आ गई थी

आगरा की रहने वाली 13 साल की किशोरी महाकुंभ में संन्यास लेकर साध्वी गौरी बन गई थी। जूना अखाडे़ के महंत कौशल गिरि को परिजनों ने बेटी दान कर दिया था। इसके बाद महंत को भी अखाडे़ से निकाल दिया गया। साध्वी को नारी निकेतन आगरा में रखा गया था, जहां से अब करीब 10 महीने बाद उसे घरवालों को सौंपा गया है। लेकिन साध्वी हरियाणा में अपने गुरु के पास चली गई। पुलिस 3 दिन पहले 13 नवंबर को साध्वी को उसके गुरु के वहां से लाई, काउंसिलिंग करके रविवार को उसे परिवार को सौंप दिया। अब साध्वी का कहना है- मैं मां-पिता के साथ रहना चाहती हूं। पढ़-लिखकर जीवन में कुछ अच्छा करने का इरादा है। उधर, साध्वी की मां बच्ची को पाकर खुश हैं। मां का कहना है कि बेटी महाकुंभ में बाबा के बहकावे में आ गई थी। पहले बताते हैं महाकुंभ की कहानी 5 दिसंबर को आगरा की डौकी में रहने वाली 13 साल की किशोरी अपने परिवार के साथ महाकुंभ गई थी। वहीं पर चिंतन के बाद उसने फैसला किया कि वह संन्यास लेकर आराधना करेगी। परिवार के साथ घर जाने से मना कर दिया। फिर परिवार ने जूना अखाड़े के महंत कौशल गिरि को बेटी दान कर दी। गुरु की मौजूदगी में लड़की को पहले गंगा स्नान कराया गया। संन्यास दिलाया गया। गुरु की तरफ से उन्हें साध्वी गौरी कहा गया। इस तरह उन्हें नया नाम भी मिला था। अखाड़ा संरक्षक ने संन्यास वापस कराया था
पहला अमृत स्नान होने के बाद लड़की का पिंडदान होना था। 19 जनवरी 2025 की तारीख तय हो गई। महामंडलेश्वर महंत कौशल गिरि ने लड़की के पिंडदान की तैयारी कर ली। मगर, इससे पहले श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के संरक्षक हरि गिरि महाराज ने साध्वी का संन्यास वापस करा दिया। उनका कहना था कि यह अखाड़े की परंपरा नहीं रही है कि किसी नाबालिग को संन्यासी बना दें। इस मुद्दे पर बैठक हुई। जहां सबने सर्वसम्मति से फैसला लिया। यहां संतों के बीच चर्चा के बाद एक और फैसला लिया गया। दीक्षा दिलाने वाले महंत कौशल गिरि को जूना अखाड़े से 7 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था। गुरु के साथ रहने पर अड़ी थी साध्वी
महंत को अखाडे़ से निष्कासित करने के बाद साध्वी उन्हें वापस लाने और उनके साथ रहने पर अड़ गई थी। उस समय साध्वी ने कहा था कि वो अपने गुरु के लिए कोई भी परीक्षा देने को तैयार हैं। इसके बाद साध्वी को प्रशासन ने आगरा के नारी निकेतन में भेज दिया था। जनवरी से अब करीब 10 महीने का वक्त हो चुका। साध्वी गौरी नारी निकेतन ही रह रही थी। साध्वी के परिजन भी उसे वापस लाने का प्रयास कर रहे थे। 5 नवंबर को नारी निकेतन से साध्वी को परिजनों को सौंप दिया था। मगर, इसके बाद साध्वी फिर से अपने गुरु कौशल गिरी के पास हरियाणा चली गई। इसके बाद किशोरी की मां ने थाना डौकी में बच्ची को वापस लाने के लिए शिकायत दी। पुलिस ने 3 दिन पहले 13 नवंबर को साध्वी को रेस्क्यू किया। अब उसकी काउंसिलिंग की गई। मां बोली- बाबा के बहकावे में बेटी आ गई थी
पुलिस ने काउंसिलिंग के बाद आज रविवार को साध्वी को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। बच्ची को वापस पाकर मां-बाप खुश हैं। मां ने कहा कि महाकुंभ में बाबा ने बेटी को साध्वी बनाने के लिए प्रभावित कर दिया था। बेटी बाबा के बहकावे में आ गई थी। अब मैं चाहती हूं कि बच्ची हमारे पास ही रहे। पढ़े और साधारण जिंदगी गुजारे। साध्वी बोली- अब जीवन में कुछ करना चाहती हूं
हरियाणा के विलासपुर कौशल किशोर आश्रम से वापस आने के बाद साध्वी बनी किशोरी की काउंसिलिंग की गई। इसके बाद किशोरी का कहना है कि अब मैं अपने माता-पिता के साथ ही रहना चाहती हूं। मैं पढ़-लिखकर जीवन में आगे कुछ करना चाहती हूं। जनवरी में महाकुंभ के साथ दैनिक भास्कर ने साध्वी से फोन पर बात की थी। उस समय दैनिक भास्कर के सवाल और साध्वी के जवाब पढ़िए… सवाल : आपने संन्यासी बनने का फैसला क्यों लिया?
जवाब : महामंडलेश्वर महंत कौशल गिरि 3 साल पहले हमारे गांव कथा सुनाने आए थे। मैंने पहली बार तब ही उन्हें सुना। तभी से मेरी रुचि सनातन में बढ़ गई। महाकुंभ आने पर मैंने संन्यास लेने का निश्चय किया। सवाल : अखाड़ा की तरफ से हमारा संन्यास लेना स्वीकार नहीं हुआ। क्या मानती हैं?
जवाब : मुझे नाबालिग कहकर अखाड़े से निकाला गया। मेरे गुरु को भी निष्कासित कर दिया गया। इससे मैं बहुत आहत हूं। मैं स्पष्ट करना चाहती हूं कि संन्यास लेने का निर्णय मेरा था। मेरा परिवार भी खुश था। सवाल : आपके परिवार के लिए कहा जा रहा है कि उन्होंने आपको अखाड़े को दान में दिया?
जवाब : नहीं…ऐसा नहीं है। मैं खुद ही संन्यासी जीवन जीना चाहती हूं। सवाल : अखाड़ा की तरफ से आपकी उम्र को संन्यास के लिए अभी सही नहीं माना गया है?
जवाब : मैं बता दूं कि कहीं मीडिया रिपोर्ट पढ़ रही थी कि मेरे गुरु ने मेरे ऊपर जादू-टोना कराया है। मुझे साध्वी बनने के लिए कहा। ये सब गलत है। सनातन में जाना, कब से पाप हो गया? उम्र का बंधन कब से हो गया? ये कहां लिखा है कि कोई बच्चा संन्यास नहीं ले सकता है। सवाल : तो सब लोग दबाव की चर्चा क्यों कर रहे हैं?
जवाब : मैं अपना मेडिकल कराने को भी तैयार हूं। बस मेरे गुरु पर गलत आरोप न लगाए जाएं। ये ठीक है कि मैं नाबालिग हूं। मगर मैं अपने निर्णय ले सकती हूं। कुंभ में कई नाबालिग संन्यासी हैं। सवाल : अब आपकी क्या मांग है?
जवाब : मैं सिर्फ इतना चाहती हूं कि मेरे गुरु का सम्मान वापस दिलाया जाए। उन्हें अखाड़े में वापस लिया जाए। ऐसा नहीं होता है कि मैं परिवार के साथ गलत कदम उठाने पर मजबूर हो जाऊंगी। ——————— ये खबर भी पढ़िए- धीरेंद्र शास्त्री बोले- शादी तो जरूर करेंगे: जब मुस्लिम डॉक्टर आतंकी निकल रहे, तो देश खतरे में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की पदयात्रा वृंदावन पहुंच चुकी है। 10 दिन में 170 किमी की पदयात्रा में 3 बार धीरेंद्र शास्त्री की तबीयत बिगड़ी। वो कहते हैं- राम काज कीन्हें बिनु मोहि कहां विश्राम…। मुझ पर 20 घंटे काम करने का साइड इफेक्ट दिखता है। दिल्ली ब्लॉस्ट पर वो कहते हैं- इस्लामिक भाइयों से कहना चाहता हूं कि उन्हें शिक्षा नीति में बदलाव करने की जरूरत है, ताकि कोई डॉक्टर आतंकवादी न निकले। पढ़ें पूरी खबर…