इलाहाबाद हाईकोर्ट आरोपी से बोला-भारी मन से रिहा कर रहे:पुलिस नाकाम रही; 29 साल बाद गाजियाबाद बस विस्फोट का आरोपी बरी

गाजियाबाद में 1996 में बस में हुए बम विस्फोट मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने मोहम्मद इलियास की बरी कर दिया। साथ ही कहा- हम इस मामले में ‘भारी मन’ से बरी होने का फैसला दर्ज कर रहे हैं। यह मामला इतना संगीन है कि समाज की अंतरात्मा को झकझोर दिया। आतंकवादी साजिश में 18 निर्दोष लोगों की जान चली गई। मोहम्मद इलियास अपील के लंबित रहने के दौरान हिरासत में रहा था। कोर्ट ने 51 पन्नों के आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में बुरी तरह नाकाम रहा। पुलिस के सामने दिया गया इलियास का इकबालिया बयान सबूत के तौर पर नहीं माना जा सकता। यह फैसला न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने मंगलवार को सुनाया। अब जानिए क्या था मामला रुड़की डिपो की एक बस 27 अप्रैल, 1996 को दोपहर 15:55 बजे दिल्ली से 53 यात्रियों को लेकर रवाना हुई थी। मोहन नगर में उसमें 14 और यात्री सवार हो गए। शाम करीब 5 बजे मोदीनगर पुलिस स्टेशन (गाजियाबाद) पार करते ही बस के अगले हिस्से में एक तेज धमाका हुआ। इसमें 10 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। करीब 48 यात्री घायल हो गए थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शवों में धातु के टुकड़े पाए गए थे। डॉक्टरों ने कहा था कि मौतें बम विस्फोट से काफी खून बहने और सदमे से हुई हैं। फोरेंसिक जांच में सामने आया था कि कॉर्बन के साथ मिश्रित RDX को बस के अगले हिस्से में बाईं ओर ड्राइवर सीट के नीचे रखा गया था। विस्फोट रिमोट स्विच से किया गया था। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि हमले को अब्दुल मतीन उर्फ ​​इकबाल, एक पाकिस्तानी नागरिक, हरकत-उल-अंसार के कथित जिला कमांडर ने मोहम्मद इलियास और तस्लीम के साथ साजिश में अंजाम दिया था। यह भी आरोप लगाया कि इलियास (अपीलकर्ता) मूलरूप से मुजफ्फरनगर का रहने वाला है। लेकिन, वह लुधियाना में रहता है। उसको जम्मू-कश्मीर के कुछ लोगों ने बहकाया था। उसने ही बम रखने की साजिश रची थी। 2013 में ट्रायल कोर्ट ने तस्लीम को किया था बरी
2013 में ट्रायल कोर्ट ने सह-आरोपी तस्लीम को बरी कर दिया, लेकिन इलियास और अब्दुल मतीन को दोषी ठहराया था। दोनों को उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई गई। तस्लीम को बरी करने के खिलाफ राज्य सरकार ने कोई अपील दायर नहीं की। इस बारे में भी कोई जानकारी नहीं है कि अब्दुल मतीन ने अपील दायर की थी या नहीं। इसलिए हाईकोर्ट ने केवल इलियास की अपील पर ही सुनवाई की। जून, 1997 में लुधियाना में गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दावा किया था कि इलियास ने अपने पिता और भाई की मौजूदगी में बम लगाने की बात कबूल की थी। यह बयान सीबी-सीआईडी ​​के एक सेक्टर अधिकारी, आईओ ने एक ऑडियो कैसेट में रिकॉर्ड किया था। लेकिन, इसकी वैधता की जांच करने से पहले खंडपीठ ने कहा कि 34 अभियोजन पक्ष के गवाहों की जांच की गई थी। इनमें घायल यात्री, प्रत्यक्षदर्शी, जांच गवाह, चिकित्सा गवाह और कई जांच अधिकारी शामिल थे। यह पहचान नहीं हो सकी कि विस्फोटक किसने रखा था
कोर्ट ने कहा- यात्रियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने घटना को साबित कर दिया था। लेकिन, कोई भी यह नहीं पहचान सका कि विस्फोटक किसने रखा था। क्योंकि बम बस के आईएसबीटी (दिल्ली) से रवाना होने से पहले ही रखा गया था। कोर्ट ने कहा- एसपी के नीचे के अफसर के सामने दिया बयान स्वीकार्य नहीं
खंडपीठ कहा- जिन गवाहों को सुनने के लिए कहा गया था, वे अपने बयान से मुकर गए। उन्होंने इलियास को पहचानने से इनकार किया या विरोधाभासी बयान दिए। इलियास के कथित तौर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (पीडब्लू-11) के सामने दिया गया ऑडियो-रिकॉर्डेड इकबालिया बयान अस्वीकार्य है। कोर्ट ने अभियोजन के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि टाडा अधिनियम की धारा-15 के तहत पुलिस अधीक्षक (SP) के पद से नीचे के पुलिस अफसर के सामने दिया गया बयान स्वीकार्य है। हाईकोर्ट ने कहा कि टाडा का प्रभाव समाप्त हो चुका था। इस मामले में यह लागू नहीं होता। आरोप साबित करने में बुरी तरह विफल रहा अभियोजन पक्ष
हाईकोर्ट ने कहा- अभियोजन पक्ष यह साबित करने में बुरी तरह विफल रहा कि अपीलकर्ता ने बस में बम विस्फोट करने के लिए बम लगाने की साजिश रची थी। निचली अदालत की दी गई सजा को खारिज किया जाना चाहिए। कोर्ट ने 2013 के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि इलियास को तत्काल रिहा किया जाए। ———————- ये खबर भी पढ़ें…. रवि किशन बोले- राहुल मछली पकड़ने गए थे:ये बिहार की मछली है…ऐसे हाथ नहीं आएगी, चुनाव उनके लिए पिकनिक था गोरखपुर सांसद रवि किशन ने बिहार चुनाव परिणामों के बहाने राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। कहा- राहुल के लिए बिहार चुनाव एक पिकनिक था। वह वहां मछली पकड़ने गए थे। नाव से कूद गए। लेकिन वह बिहार की मछली है, ऐसे हाथ में नहीं आएगी। उनकी राजनीति को तो महादेव ही जानें। उन्होंने बिहार की जीत पर सभी बिहारवासियों को बधाई दी। पढ़ें पूरी खबर…