देवरिया से रवाना हुई जागृति यात्रा:युवा गांवों की सीख से बना रहे नए मॉडल; बोले- देवरिया ने दी ज्यादा सीख

देवरिया से ‘जागृति यात्रा 2025’ मंगलवार को दिल्ली के लिए रवाना हो गई। यह यात्रा आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के उद्देश्य से निकाली गई है। देवरिया में दो दिन तक गांवों में संवाद, सीख और नवाचार गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसने यात्रियों को छोटे कस्बों की क्षमता से परिचित कराया। सुबह से ही यात्रियों को विभिन्न समूहों में बांटकर बरपार, इजरही, बेलवा माफी, कुरमी टोला, चतुर्भुजपुर, सकरापर खुर्द, भरवलिया, बरपार दक्षिण टोला और बरारी जैसे गांवों का भ्रमण कराया गया। युवाओं ने पंचायत व्यवस्था, महिला समूह आधारित आजीविका मॉडल, पारंपरिक कृषि पद्धतियों, जल-स्वच्छता समाधानों और स्थानीय उद्यमिता को करीब से देखा। ग्रामीणों के साथ खुले संवाद के दौरान कई यात्रियों ने स्वीकार किया कि देवरिया की धरती ने उन्हें किताबों और इंटरनेट से कहीं अधिक सिखाया है। कुछ विदेशी प्रतिभागी यह देखकर हैरान थे कि सीमित संसाधनों के बावजूद गांवों में नवाचार और समस्या-समाधान की इतनी क्षमता मौजूद है। यात्रियों ने मंगलवार को दिनभर गांवों का भ्रमण कर स्थानीय जीवन, चुनौतियों और संभावनाओं को समझा। शाम सात बजे से जागृति उद्यम केंद्र बरपार में ‘बिज ज्ञान ट्री’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें यात्री शामिल हुए। उन्हें 50 टीमों में बांटा गया था। सभी टीमों ने अपने अनुभवों को व्यावसायिक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया। प्रत्येक टीम को नौ सामाजिक-आर्थिक वर्टिकल्स में से एक विषय मिला था, जिनमें कृषि, कला-संस्कृति-खेल, वित्त, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, विनिर्माण, जल-स्वच्छता और तकनीक शामिल थे। विभिन्न विषयों पर आधारित ये मॉडल रातभर चले संवाद, तकनीकी समाधान और सामाजिक संवेदना का मिश्रण थे। यह प्रतियोगिता रात दो बजे तक चली। जागृति यात्रा के सीओओ चिन्मय ने बताया कि दिल्ली पहुंचने के बाद प्रत्येक वर्टिकल से एक विजेता टीम का नाम घोषित किया जाएगा और उन्हें प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। ‘बिज ज्ञान ट्री’ का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समस्याओं को उद्यम-आधारित समाधानों में बदलना है, ताकि गांवों और कस्बों में सामाजिक नवाचार को बढ़ावा मिल सके।