यूपी में अडाणी को झटका, बिजली नहीं खरीदेगी सरकार:लोगों से प्रति यूनिट 75 पैसे तक ज्यादा वसूले; GST की दर भी कम नहीं की

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने अडाणी पावर से 1500 मेगावाट बिजली खरीद के प्रस्ताव पर तत्काल रोक लगा दी है। आयोग ने फिक्स और वेरिएबल चार्ज में भारी अनियमितता पकड़ी है। अडाणी पावर के साथ खरीद समझौते में FGD (फ्लू गैस डीसल्फराइजेशन) प्लांट की लागत जोड़कर 55 से 75 पैसे प्रति यूनिट तक ज्यादा दर से वसूली की जा रही थी। इसी तरह जीएसटी की घटी दरों के आधार पर भी कटौती नहीं की गई थी। आयोग ने अडाणी पावर को भी इस केस की पार्टी बनाया। पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से कहा- 18 दिसंबर तक FGD संयंत्र न लगने पर बिजली खरीद की घटी कीमत का प्रस्ताव दाखिल करें। भारत सरकार ने देश के सभी ताप बिजलीघरों में FGD प्लांट लगाने के पुराने आदेश को वापस ले लिया है। इसके बावजूद अडाणी पावर के साथ हुए बिजली खरीद समझौते में FGD (फ्लू गैस डीसल्फराइजेशन) प्लांट की लागत जोड़कर 55 से 75 पैसे प्रति यूनिट तक ज्यादा दर वसूली जा रही थी। क्या होता है FGD (फ्लू गैस डीसल्फराइजेशन) FGD (फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन) एक ऐसी औद्योगिक प्रक्रिया है, जो सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) को हटाने के लिए उपयोग की जाती है। यह कोयले और अन्य जीवाश्म ईंधनों को जलाने से निकलने वाली फ्लू गैसों में एक प्रमुख प्रदूषक है। यह प्रक्रिया अम्लीय वर्षा को रोकने और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें चूना या चूना पत्थर जैसे अवशोषक का उपयोग शामिल है। आयोग ने पावर कार्पोरेशन को ये दिए निर्देश खपत घटने का हिसाब क्यों नहीं दिया?
पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने बिना कोई गणना किए 5.38 रुपए प्रति यूनिट की ऊंची दर पर अडाणी से करार कर लिया। जबकि FGD हटने और GST कम होने से दर अपने आप 55-75 पैसे प्रति यूनिट तक कम हो जानी चाहिए थी। ‘बिजली निगमों का निजीकरण निरस्त किया जाए’
उत्तर प्रदेश बिजली संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने इस मामले में बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा- अडाणी पावर का कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्नटन वही कंपनी है, जिसने पूर्वांचल-दक्षिणांचल के निजीकरण के लिए फर्जी RFP बनाए थे। अब अडाणी से बिजली खरीद में भी इसी कंपनी की साठगांठ से उपभोक्ताओं को लूटने की साजिश रची गई। हम मांग करते हैं कि ग्रांट थॉर्नटन द्वारा तैयार सभी निजीकरण दस्तावेज तत्काल रद्द किए जाएं। बिजली निगमों का निजीकरण पूरी तरह निरस्त किया जाए। अब पढ़िए नियामक आयोग का आदेश… 1912 पर 11 हजार से अधिक शिकायतें लंबित
विद्युत नियामक आयोग की स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस रेगुलेशन-2019 के तहत उपभोक्ताओं को मुआवजा न मिलने पर उपभोक्ता परिषद ने आपत्ति लगाई है। 1912 पर तय सीमा के अंदर समाधान न होने पर मुआवजा का प्रावधान है। 1912 पर की गई शिकायतों में 11,494 लंबित हैं। इसमें भी 3504 सिर्फ स्मार्ट मीटर के हैं। राजधानी लखनऊ में जहां, वर्टिकल सिस्टम लागू हो चुका है। वहां पर भी समय सीमा के अंदर शिकायतों का समाधान नहीं हो पा रहा है। लगभग 1075 शिकायतें लंबित हैं। इसमें भी सबसे ज्यादा स्मार्ट मीटर संबंधी शिकायतें है। ​​​​’तत्काल मुआवजा दिया जाए’
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि निर्धारित समय सीमा में शिकायतों का समाधान न होने पर मुआवजा देने का आदेश नियामक आयोग को देना चाहिए। यह उपभोक्ताओं का कानूनी अधिकार है। आखिर 1912 को आज तक ओटीपी सत्यापन से क्यों नहीं जोड़ा गया। कई मामलों में फर्जी क्लोजर की शिकायतें मिलती रहती हैं। विद्युत नियामक आयोग ने 1912 पर OTP आधारित शिकायत सत्यापन व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए थे। पर आज तक इसे लागू नहीं किया गया। ——————————- ये भी पढ़ें: मायावती के सामने विधायक ने घुटने टेके:जूते उतारकर फर्श पर बैठे; नजरें झुकाकर हाथ जोड़े, मुस्कुराती रहीं सुप्रीमो बसपा सुप्रीमो मायावती से बिहार के इकलौते पार्टी विधायक सतीश कुमार सिंह (पिंटू यादव) ने दिल्ली में मुलाकात की। इस मुलाकात की तस्वीरें सामने आई हैं, जो चर्चा में हैं। एक तस्वीर में विधायक सतीश सिंह घुटनों के बल मायावती के सामने बैठे हैं। उनकी नजरें झुकी हैं और दोनों हाथ जोड़ रखे हैं। पैरों में सिर्फ मोजे हैं। मतलब मायावती के पास पहुंचने से पहले विधायक सतीश सिंह ने अपने जूते उतार दिए थे। (पढ़ें पूरी खबर)