देश के नामित मुख्य न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा है कि कमजोर और गरीब वर्ग के लिए न्याय तक पहुंचने का पहला पड़ाव बार होता है। उन्होंने अवध बार एसोसिएशन के 125वें स्थापना दिवस समारोह में बार और बेंच के समान महत्व पर जोर दिया। यह कार्यक्रम रविवार को गोमती नगर स्थित हाईकोर्ट के ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया था। मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि जब कोई व्यक्ति न्याय के लिए कोर्ट आता है, तो वह सबसे पहले वकील के पास ही जाता है। इसलिए बार में एक गरीब की पीड़ा समझने की शक्ति होनी चाहिए। उन्होंने बार और बेंच से भविष्य की चुनौतियों के लिए आत्मनिरीक्षण करने का आह्वान किया। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के युग में और देश की आर्थिक प्रगति के साथ व्यावसायिक मुकदमों की संख्या बढ़ेगी, जिसके लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने भारत के न्याय तंत्र को दुनिया के बेहतरीन न्याय तंत्रों में से एक बताया। नामित सीजेआई ने यह भी बताया कि वह अधिवक्ता के रूप में कई बार लखनऊ हाईकोर्ट में मुकदमों की बहस के लिए आ चुके हैं। इस दौरान उन्हें बार के वरिष्ठ सदस्यों का मार्गदर्शन भी मिला। उन्होंने एक नज़्म के माध्यम से बार और बेंच के अटूट रिश्ते को रेखांकित किया। कार्यक्रम को इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार उपाध्याय ने भी संबोधित किया। न्यायमूर्ति भंसाली ने कहा कि सफेद शर्ट, ब्लैक कोट और गाउन केवल एक यूनिफॉर्म नहीं, बल्कि एक विश्वास है। उन्होंने वकीलों से वादकारियों को कानूनी प्रक्रिया आसान भाषा में समझाने का आग्रह किया। दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार उपाध्याय ने अवध बार के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस बार ने प्रदेश को श्रीपत मिश्रा और सीपी गुप्ता जैसे दो मुख्यमंत्री दिए हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अवध बार का एक सदस्य बंटवारे के बाद पाकिस्तान का पहला अटॉर्नी जनरल बना, और उनके बेटे पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति बने। इस अवसर पर लखनऊ बेंच के वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजन रॉय ने कहा कि बार के सदस्यों को कमजोर वर्ग की आवाज सुननी चाहिए, वकालत में धन पहली प्राथमिकता नहीं है बल्कि न्याय प्रदान करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि मजबूर बार मजबूत न्यायपालिका की पहचान होती है। कार्यक्रम को अवध बार के अध्यक्ष पंडित एस. चंद्रा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन महासचिव ललित किशोर तिवारी ने किया। इस अवसर पर तमाम न्यायमूर्तिगण, सुप्रीम कोर्ट व इलाहाबाद बार के पदाधिकारियों के साथ-साथ तमाम जिलों के बार के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।