ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने डिप्टी सीएम केशव मौर्य को समझदार नेता बताया। उन्होंने कहा- डिप्टी सीएम समझदार हैं, वो समझते हैं कि हमारे अफसरों से गलती हुई है। वह समझते हैं कि मामले को इस तरह से बढ़ाया नहीं जाना चाहिए। इससे हमको नुकसान हो रहा है। ऐसे समझदार व्यक्ति को मुख्यमंत्री होना चाहिए। जो अकड़ में और जिद में बैठा हो, उसे मुख्यमंत्री नहीं होना चाहिए। दरअसल, यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने गुरुवार को कहा था- पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम करता हूं और उनसे प्रार्थना करता हूं कि स्नान करें। किसी भी पूज्य संत या शंकराचार्य जी का अपमान हुआ है तो इसकी जांच कराकर कार्यवाही करेंगे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 5 दिन से प्रयागराज माघ मेले में अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे हैं। शुक्रवार सुबह उनकी बिगड़ गई। उन्हें तेज बुखार है। सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक वैनिटी वैन में दवा खाकर आराम करते रहे। भीड़ जुटने पर वे बाहर आकर अपनी पालकी पर बैठे। माघ मेला प्रशासन से टकराव के बीच शंकराचार्य ने बसंत पंचमी पर संगम स्नान भी नहीं किया। अविमुक्तेश्वरानंद ने कल भास्कर से कहा था- जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगता, तब तक मैं स्नान नहीं करूंगा। प्रशासन नोटिस-नोटिस खेल रहा है। अभी मेरा मौनी अमावस्या का स्नान नहीं हुआ है, तो मैं वसंत का स्नान कैसे कर लूं? हालांकि, दो नोटिस भेजने के बाद से प्रशासनिक अफसर इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हैं। पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने बसंत पंचमी पर त्रिवेणी स्नान किया। वे व्हीलचेयर से संगम तट तक पहुंचे थे। सवा लाख शिवलिंग लाए थे अविमुक्तेश्वरानंद
अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में सवा लाख मिट्टी के शिवलिंग स्थापित करने के लिए लेकर आए थे। हालांकि, मौनी अमावस्या को हुए विवाद के बाद वह स्थापित नहीं कर पाए हैं। इससे पहले, गुरुवार को सीएम योगी ने अविमुक्तेश्वरानंद का नाम लिए बिना कहा था कि किसी को परंपरा बाधित करने का हक नहीं। ऐसे तमाम कालनेमि हैं, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। वहीं, डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने आजमगढ़ में कहा था कि मैं ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के चरणों में प्रणाम करता हूं। प्रार्थना है कि वे स्नान कर इस विषय का समापन करें। मौनी अमावस्या पर क्या हुआ था, जानिए
18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा। विरोध करने पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। इससे नाराज अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए थे। प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को 48 घंटे में दो नोटिस जारी किए। पहले नोटिस में उनके शंकराचार्य की पदवी लिखने पर सवाल पूछे थे, जबकि दूसरे नोटिस में मौनी अमावस्या को लेकर हुए बवाल पर सवाल पूछे गए। प्रशासन ने चेतावनी दी थी कि क्यों न आपको हमेशा के लिए माघ मेले से बैन कर दिया जाए? अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिस के जवाब भेज दिए थे। शंकराचार्य विवाद और माघ मेले से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…