कानपुर के अनूप गुप्ता बने IAS:दूसरे प्रयास में हासिल की 716वीं रैंक, पिता बोले- बेटे ने सीना चौड़ा कर दिया

सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, बस मेहनत का रास्ता पकड़ लो और चलते रहो’ इस कहावत को कानपुर के बेटे अनूप कुमार गुप्ता ने सच कर दिखाया है। मूल रूप से नरवल के रहने वाले और वर्तमान में गोपाल नगर में रह रहे अनूप ने यूपीएससी (UPSC) परीक्षा में 716वीं रैंक हासिल कर पूरे जिले का मान बढ़ाया है। अनूप की सफलता की कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने अपने करियर के लिए बहुत पहले ही एक ठोस फैसला ले लिया था। स्कूल के दिनों से ही उनके मन में प्रशासनिक सेवा में जाने का जुनून सवार था। इसी लक्ष्य को पाने के लिए उन्होंने बीटेक जैसे तकनीकी कोर्स के आकर्षण को दरकिनार कर बीएससी (B.Sc) को चुना, ताकि वे अपना पूरा समय और ध्यान सिविल सेवा की तैयारी पर केंद्रित कर सकें। साल 2022 में ग्रेजुएशन पूरा करते ही उन्होंने दिल्ली का रुख किया और बिना समय गंवाए मिशन मोड में जुट गए। लाइब्रेरी बनी ‘तपस्थली’, 8 से 10 घंटे की पढ़ाई अनूप के लिए यह सफर चुनौतियों भरा रहा। पहले प्रयास में प्रीलिम्स परीक्षा में मिली असफलता ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि और अधिक मजबूत बना दिया। उन्होंने गोपाल नगर स्थित अपने घर के पास ही लाइब्रेरी को अपनी ‘तपस्थली’ बना लिया और वहां सुबह से रात तक खुद को किताबों के बीच झोंक दिया। शुरुआती दौर में वे रोजाना 8 से 10 घंटे की कड़ी पढ़ाई करते थे, लेकिन परीक्षा के नजदीक आते ही उन्होंने अपनी पढ़ाई की रफ्तार बढ़ाकर 12 घंटे तक कर दी थी। साल 2023 में दिल्ली से कोचिंग पूरी करने के बाद उन्होंने खुद के नोट्स और यूट्यूब के सही तालमेल के साथ अपनी तैयारी को धार दी। इंस्पेक्टर पिता का अनुशासन और मां का आशीर्वाद अनूप एक ऐसे परिवार से आते हैं जहाँ अनुशासन और शिक्षा रग-रग में बसी है। उनके पिता सत्येंद्र कुमार गुप्ता उत्तर प्रदेश पुलिस में इंस्पेक्टर के पद से रिटायर हुए हैं, वहीं माता अनीता गुप्ता गृहिणी हैं। अनूप अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता के साथ-साथ बड़े पापा सतीश चंद्र गुप्ता और चाचा सुदीप कुमार शिवहरे (प्रधान, नर्वल) को देते हैं। उनके घर में शुरू से ही पढ़ाई का माहौल रहा है, यही वजह है कि उनकी बड़ी बहन सौम्या टीचिंग और छोटा भाई यश नीट (NEET) की तैयारी कर रहे हैं।
नए अभ्यर्थियों के लिए अनूप का ‘सक्सेस मंत्र’ अपनी सफलता पर अनूप का कहना है, कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में निरंतरता ही सबसे बड़ी कुंजी है। वे मानते हैं,कि कोचिंग केवल आपका आधार तैयार करने में मदद करती है, लेकिन वास्तविक जीत आपकी अपनी सेल्फ-स्टडी और कड़ी मेहनत से ही संभव है। उन्होंने युवाओं को सलाह देते हुए कहा,कि 10 अलग-अलग जगहों से मार्गदर्शन लेने के बजाय किसी एक मेंटर पर भरोसा करें और अपनी खुद की बनाई रणनीति पर टिके रहें। कानपुर के इस लाल ने साबित कर दिया कि अगर इरादे फौलादी हों, तो साधारण बैकग्राउंड से निकलकर भी देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा को फतह किया जा सकता