कभी खुले जंगलों में दहाड़ से खौफ पैदा करने वाले बाघ और तेंदुए आज कानपुर चिड़ियाघर में सलाखों के पीछे कैद हैं। ये वही जानवर हैं, जिनके नाम से गांवों में सन्नाटा पसर जाता था। इंसानों पर हमलों और जानलेवा घटनाओं के बाद इन्हें जंगल में दोबारा छोड़ना जब मुमकिन नहीं रहा तो कानपुर जू में कैद किया गया। इस समय 14 से अधिक ऐसे आदमखोर और हिंसक जानवर यहां कैद हैं। सुरक्षा कारणों से इन्हें बाड़े में नहीं छोड़ा गया है। पिजड़े में ही रखा गया। ये जानवर ऐसे हैं जो आज भी जू स्टाफ को देखकर गुर्रा देते हैं तो लोग डर जाते हैं। कानपुर जू के डॉ. मोहम्मद नासिर ने बताया- कुछ दिन पहले पीलीभीत से लाई गई एक बाघिन ने 7 लोगों पर हमला किया था। इनमें से दो लोग आज भी गंभीर हालत में हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के पास से पकड़ा गया मल्लू बाघ दो इंसानों की जान ले चुका है। जू में अस्पताल के पास बने बाघ बाड़े में मल्लू की दहाड़ आज भी रूह कंपा देती है। गोला रेंज से लाया गया तेंदुआ ‘जग्गू’, जिसे जू कर्मचारी प्यार और डर के मिश्रण से ‘जग्गू दादा’ कहते हैं, कई ग्रामीणों पर हमला कर चुका है। इनके आक्रामक व्यवहार को देखते हुए वन विभाग ने साफ फैसला किया अब उसे वापस जंगल में नहीं छोड़ा जाएगा। 3 तस्वीरें देखिए अस्पताल में कैद दो ‘कटखने’ बंदर, आज भी उतने ही खतरनाक
कानपुर जू के अस्पताल परिसर में दो बेहद हिंसक बंदर सालों से छोटे पिंजरों में बंद हैं। इनका अतीत भी खून से सना रहा है। इन्होंने जू में घूमने आए कई दर्शकों पर हमला किया था। सुरक्षा कारणों से इन्हें आम बाड़ों में रखने के बजाय अस्पताल के अंदर रखा गया है। जू स्टाफ अगर पास जाता है तो ये आज भी झपट्टा मारने की कोशिश करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि जू में लाल मुंह वाले बंदरों का बड़ा झुंड खुलेआम घूमता है, लेकिन ये दो बंदर सबसे ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं। आदमखोर जानवरों के हमले की घटनाएं पढ़िए 100 प्रजातियां, 1000 से ज्यादा जानवर यहां पर हैं
कानपुर जू के निदेशक कन्हैया पटेल ने बताया- जू में इस वक्त 100 से अधिक प्रजातियों के करीब 1000 वन्यजीव मौजूद हैं। इनमें शेर, तेंदुआ, वलाबी कंगारू, भेड़िया, बाघ, बंदर, मगरमच्छ, सांप, जंगली बिल्ली, भालू समेत कई अन्य पक्षी प्रजाति के वन्यजीव शामिल हैं। जू के अंदर बने सर्पेंटोरियम बाड़े में विशालकाय अजगर भी लोगों को खूब डराते हैं। उन्होंने बताया कि,जो वन्यजीव इंसानों पर हमला कर चुके होते हैं, उन्हें आमतौर पर चिड़ियाघर में ही रखा जाता है, ताकि वे दोबारा किसी की जान न लें। अगर रेस्क्यू के बाद व्यवहार सामान्य हो, तभी जंगल में छोड़ा जाता है।