कानपुर में ‘गुलाब बाड़ी’ उत्सव की महक:पद्मश्री मालिनी अवस्थी की ठुमरी और चैती पर झूमे शहरवासी

कानपुर शहर की फिजा रविवार को गुलाब की खुशबू और संगीत की मधुर तान से सराबोर हो गई। मौका था ‘संगीतांजलि’ संस्था द्वारा आयोजित पारंपरिक ‘गुलाब बाड़ी’ उत्सव का। विश्वविद्यालय के रानी लक्ष्मीबाई सभागार में आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में जब पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने अपनी सुरीली आवाज में होली और चैती के सुर छेड़े, तो श्रोता मंत्रमुग्ध होकर झूमने लगे। बनारस की प्राचीन और समृद्ध ‘गुलाब बाड़ी’ परंपरा को कानपुर की धरती पर उतारने का यह प्रयास बेहद सफल रहा। चैत्र मास में आयोजित होने वाला यह उत्सव अवध के नवाबों के दौर से चला आ रहा है। कार्यक्रम के दौरान पूरे सभागार में गुलाब के फूलों की वर्षा की गई और गुलाब जल का छिड़काव किया गया, जिससे पूरा वातावरण किसी राजसी दरबार जैसा प्रतीत होने लगा। मालिनी अवस्थी ने बाँधा समां
मुख्य कलाकार के रूप में पहुँची लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने कार्यक्रम की शुरुआत राग मिश्र काफी में होरी “रे मैं कैसे केसर रंग घोरूँ” से की। इसके बाद उन्होंने राग शहाना में “होली मैं खेलूँगी श्याम से डांट के” सुनाकर महफिल में जान फूंक दी। उन्होंने उपशास्त्रीय संगीत की बारीकियों को समेटे हुए दादरा, ठुमरी और चैती की ऐसी प्रस्तुतियाँ दीं कि हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनके साथ संगत कर रहे कलाकारों ने भी अपनी कला का लोहा मनवाया। तबले पर राजेश मिश्रा, हारमोनियम पर विनय मिश्र और सारंगी पर मुराद अली की जुगलबंदी ने गायकी में चार चाँद लगा दिए। आधी आबादी का सम्मान
महिला दिवस के खास मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया गया। इसमें चिकित्सा, समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ीं डॉ. वंदना पाठक, सीए नीतू सिंह, डॉ. मनीषा अग्रवाल और मनीषा वाजपेयी जैसी विभूतियों को स्मृति चिह्न देकर उनकी उपलब्धियों को सराहा गया। 25 वर्षों का सफर और सांस्कृतिक संकल्प
संगीतांजलि की अध्यक्ष डॉ. रोचना बिश्नोई ने बताया कि,संस्था पिछले 25 वर्षों से संगीत की इस अविरल साधना को आगे बढ़ा रही है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुनीता द्विवेदी ने किया। अंत में सचिव डॉ. रीता वर्मा ने सभी कलाकारों और शहर के गणमान्य नागरिकों का आभार जताया।