कानपुर में 2 लाख श्रद्धालुओं ने छका गुरु का लंगर:दशमेश पिता के प्रकाशपर्व पर सेवा भाव, जूते-चप्पल साफ किया; लंगर भी बरताया

दशमेश पिता गुरु गोबिंद सिंह के 359वें प्रकाशपर्व के मौके पर शनिवार को मोतीझील में हुजूम उमड़ा। सवा लाख से एक लड़ावा का जज्बा देने वाले सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाशपर्व में शामिल होने के लिए सभी समाज के लोग उत्सुक थे। क्या सिख और क्या अन्य धर्म, सभी लोग दशमेश पिता के प्रति समर्पित नजर आए। लाखों की संख्या में लोग मोतीझील लॉन पहुंचे और यहां पर दशमेश पिता के त्याग और बलिदान की कहानी सुनी। किस तरह से सिखों के अंतिम गुरु ने अपने चार बेटों की हंसते-हंसते कुर्बानी दे दी। जुल्म के आगे वह झुके नहीं और उन्होंने अपना भी बलिदान दे दिया। गुरु के त्याग की कहानी सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गई और लोग उनकी महानता को याद करते रहे। लाखों लोगों ने चखा गुरु का लंगर प्रकाशपर्व के मौके पर गुरु का अटूट लंगर भी बरताया गया। गुरु के दरबार में मत्था टेकने के बाद श्रद्धालुओं ने मोतीझील में चलने वाले लंगर का प्रसाद भी ग्रहण किया। यहां लोगों के लिए काबुली चने के छोले, गर्मा गरम रोटियां साथ में देशी घी का हलवा बरताया जा रहा था। मुंह में डालते ही स्वाद कुछ ऐसा मानो कि फाइव स्टार होटल की स्पेशल डिश हो। हर कोई प्रेम से एक साथ बैठकर साथ में भोजन करता नजर आया। गुरुओं ने हमेशा सभी को समानता का संदेश दिया। गुरु के लिए न कोई ऊंचा था और न ही नीचा। गुरु का यह लंगर वही समानता का संदेश देता है, जिसमें लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं और परमात्मा का गुणगान करते हैं। दशमेश पिता गुरुगोबिंद सिंह का सिख धर्म में अलग स्थान रहा है। अंतिम पातशाही गुरु गोबिंद सिंह ने ही गुरु ग्रंथ साहिब की स्थापना की थी और सभी सिखों को हुक्म दिया था कि ग्रंथ को ही अपना गुरु माने और इसके दिखाए सत्मार्ग पर चलें। पहले यह 5 तस्वीरें देखिए… तीन दिवसीय कार्यक्रम का हुआ समापन अंतिम पातशाही श्रीगुरु गोबिंद सिंह के प्रकाशपर्व के उपलक्ष्य में मोतीझील लॉन में तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें दरबार साहिब में जत्थेदारों ने अमृतवाणी सुनाकर सभी को निहाल किया और तीन दिन तक विभिन्न धार्मिक आयोजन किए गए। 25 दिसम्बर से शुरु हुए कार्यक्रम 27 दिसंबर तक चला और तीन दिवसीय उत्सव का समापन हुआ। 2 लाख लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया विशाल लंगर के आयोजन में करीब 2 लाख लोगों ने प्रसाद को ग्रहण किया। जिसमें करीब एक बार में 2 हजार से 4 हजार के लोग एक बार में खाना ग्रहण कर रहे हैं। यहां रोटी, आचार, दाल, सब्जी और हलवा बनाया गया। इस दौरान गुरु गोविंद सिंह जी को याद किया गया। जोड़ा घर में करीब 50 लोग रहे उपस्थित यंग मैन सिख एसोसिएशन की ओर से जोड़ा घर की साल 1933 से शुरुआत की गई थी। इसके संस्थापक सरदार कुलदीप सिंह बग्गा थे। इस ट्रस्ट में वर्तमान प्रधान सरदार जसवीर सिंह सचदेवा आए हुए श्रद्धालुओं के जूते उतार करके रखते हुए सेवा देते दिखे। उनके साथ समाज के लोग भी इस काम में हाथ बंटाते दिखे। सेवादार बोले- सरदार सरबजीत सिंह सागी ने बताया हम सभी लोगों की ओर से एक लंगर का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें करीब 2 लाख लोगों के द्वारा प्रसाद ग्रहण किया गया है। सरदार भजन सिंह ज्ञानी ने बताया ये कार्यक्रम 25 से 27 दिसंबर तक चल रहा है। इसमें आलू, दाल, रोटी, आचार, हलुआ बनाया गया था। इसमें प्रति दिन करीब 2 लाख लोग भोजन ग्रहण कर रहे हैं।