आईआईटी कानपुर नाम सुनते ही हाई-टेक लैब, रिसर्च और इनोवेशन की तस्वीर उभरती है, लेकिन इस बार चर्चा किसी रोबोट या सैटेलाइट की नहीं, बल्कि देसी समोसे की है। आईआईटी कानपुर में अब समोसा सिर्फ खाने की चीज नहीं रहा, बल्कि पेपर वेट बनकर सबका ध्यान खींच रहा है। आईआईटी कानपुर के रंजीत सिंह रोजी शिक्षा केन्द्र के असिस्टेंट प्रोजेक्ट मैनेजर अंकित सिंह बताते हैं कि कैंपस में चाय-समोसे का जबरदस्त क्रेज है। स्टूडेंट्स हों या स्टाफ, चाय और समोसे के बिना दिन अधूरा लगता है। इसी देसी दीवानगी से समोसा शेप का पेपर वेट बनाने का आइडिया सामने आया। देखने में असली, काम में उपयोगी
यह समोसा पेपर वेट देखने में बिल्कुल असली समोसे जैसा लगता है। फूडी लोगों के लिए यह किसी ट्रीट से कम नहीं है। टेबल पर रखा यह समोसा न सिर्फ कागजों को संभालता है, बल्कि देखने वाले को मुस्कुराने पर भी मजबूर कर देता है। इस पेपर वेट को खास बनाने के लिए इसके साथ मूंज से बनी एक खास कटोरी भी तैयार की गई है। ग्राहक को समोसा पेपर वेट इसी कटोरी में रखकर दिया जाता है। यही इसकी देसी और मज़ेदार पहचान बन गई है, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रही हैं। कांच नहीं, मिट्टी से बना समोसा
आमतौर पर पेपर वेट कांच के होते हैं, लेकिन यह समोसा मिट्टी से बनाया गया है। हाथ में लेते ही इसकी ठंडक, वजन और देसी टच अलग एहसास देता है। यही वजह है कि यह इनोवेशन लोगों को खासा पसंद आ रहा है। यह प्रयोग सिर्फ मजेदार नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी अहम है। इस प्रोजेक्ट से कुम्हारों को काम और पहचान मिल रही है। अपने हाथों से ऐसा अनोखा प्रोडक्ट बनाकर वे गर्व महसूस कर रहे हैं। ट्रायल के बाद बना परफेक्ट समोसा
अंकित सिंह बताते हैं कि जब पहली बार समोसा पेपर वेट मोल्ड से निकला तो वह फट गया। इसके बाद डिजाइन में बदलाव किए गए। आखिरकार हल्का सा पेन से छेद करने का तरीका अपनाया गया, ताकि हवा निकल सके। कई ट्रायल और रिसर्च के बाद यह परफेक्ट समोसा पेपर वेट तैयार हो सका। 30 रुपए लागत, 150 तक कीमत
इस समोसा पेपर वेट को बनाने में 30 से 35 रुपए की लागत आती है, जबकि बाजार में इसकी कीमत 100 से 150 रुपये तक है। यह इनोवेशन आत्मनिर्भर भारत की सोच को भी मजबूत करता है। आईआईटी कानपुर का यह समोसा पेपर वेट साबित करता है कि इनोवेशन सिर्फ मशीनों और टेक्नोलॉजी से नहीं, बल्कि देसी सोच और मिट्टी की खुशबू से भी हो सकता है। चाय-समोसे का स्वाद अब सिर्फ ज़ुबान तक सीमित नहीं, बल्कि टेबल पर रखे कागज़ों को भी संभाल रहा है।