कुशीनगर टोल प्लाजा पर 68 स्ट्रीट लाइटें बंद:महीनों से अंधेरा, यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल; केंद्रीय मंत्री को शिकायत

उत्तर प्रदेश-बिहार सीमा पर स्थित सलेमगढ़ टोल प्लाजा पर पिछले कई महीनों से 68 स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। इसके कारण रात होते ही टोल के दोनों ओर का पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और टोल उपयोगकर्ताओं का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद रोशनी बहाल नहीं की जा रही है। टोल कंपनी प्रतिदिन लाखों रुपये का टोल वसूल रही है, लेकिन सुविधाएं नहीं दे रही। भारी वाहनों की आवाजाही वाले इस मार्ग पर कई बार दुर्घटनाएं होते-होते बची हैं, जिससे लोगों में आक्रोश है। इस स्थिति से परेशान होकर नागरिकों ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को एक शिकायती पत्र भेजा है। पत्र में तत्काल स्ट्रीट लाइटें चालू कराने, टोल कंपनी की लापरवाही की जांच करने और एनएचएआई के नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं में अवधेश राय, जितेंद्र श्रीवास्तव, विनोद राय, बहारन, मोहन, राजकुमार, भीम और गुड्डू शामिल हैं। एनएचएआई के नियमों के अनुसार, टोल प्लाजा से एक किलोमीटर तक लगी सभी स्ट्रीट लाइटें 24 घंटे कार्यशील रहनी अनिवार्य हैं। लाइटें बंद रहने पर पेनल्टी और जुर्माने का प्रावधान है, और लगातार लापरवाही पर कॉन्ट्रैक्ट समाप्त किया जा सकता है। टोल उपयोगकर्ताओं और नागरिकों ने जिला प्रशासन से भी हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि जिलाधिकारी को एक रात हाईवे पर उतरकर बंद लाइटों, टूटे पोल और फैले अंधेरे का निरीक्षण करना चाहिए ताकि वास्तविकता सामने आ सके। लोगों का आरोप है कि टोल कंपनी मरम्मत करने के बजाय लापरवाही बरत रही है। इस संबंध में गोरखपुर एनएचएआई परियोजना निदेशक ललित प्रताप पाल ने स्पष्ट किया है कि जांच में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि एनएचएआई मानकों का पालन हर परिस्थिति में सुनिश्चित कराया जाएगा।