कुशीनगर जनपद की एक विशेष अदालत ने महिला सुरक्षा और न्याय की दिशा में एक बड़ा उदाहरण पेश करते हुए नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म के दो दोषियों को सजा सुनाई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम कुशीनगर में सुनवाई चला इस दौरान अपर सत्र न्यायाधीश सत्यपाल सिंह प्रेमी ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा- बलात्कार एक ऐसा अपराध है, जिसमें व्यक्ति शारीरिक रूप से तो जीवित रहता है, परन्तु मानसिक वेदना के कारण उसकी पूरी जिन्दगी मृत समान हो जाती है। ऐसे जघन्य अपराध कारित करने वालों को समाज में कड़ा संदेश देने के लिए कठोर दंड देना अनिवार्य है। न्यायालय ने विरेन्द्र मुसहर और मुकेश मुसहर को दोषी करार देते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया, जिसे अदा न करने पर उन्हें एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा, जान से मारने की धमकी देने के जुर्म में धारा 506 के तहत भी उन्हें एक-एक वर्ष के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया गया। कोर्ट ने आदेश दिया कि वसूले गए अर्थदंड की 80 प्रतिशत धनराशि पीड़िता को बतौर क्षतिपूर्ति दी जाए। मामला थाना खड्डा क्षेत्र से जुड़ा है, जहां 18अप्रैल 2022 की शाम को महराजगंज जिले की रहने वाली एक 15 वर्षीय किशोरी अपनी बड़ी बहन के घर रिश्तेदारी में आई हुई थी। शाम करीब साढ़े सात बजे जब वह घर से कुछ दूरी पर शौच के लिए गई थी। गांव के ही दो युवकों, विरेन्द्र मुसहर और मुकेश मुसहर ने उसे घेर लिया। दोनों आरोपियों ने पीड़िता का मुंह गमछे से दबाकर उसे जबरन केले के खेत में खींच लिया और वहां उसके साथ बारी-बारी से सामूहिक बलात्कार किया। इस दौरान पीड़िता के साथ गई एक छोटी बच्ची ने भागकर शोर मचाया, जिसे सुनकर जब परिजन मौके पर पहुंचे तो देखा कि किशोरी नग्न और बेहोश पड़ी थी। घटना के बाद जब परिजनों ने आरोपियों के घर जाकर इस घिनौनी करतूत के बारे में पूछताछ की, तो न्याय देने के बजाय दोषियों के परिवार वालों ने लाठी, डंडा और फरसा लेकर उन पर हमला कर दिया और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए मुकदमा दर्ज किया था। फैसले के तत्काल बाद दोनों दोषियों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार देवरिया भेज दिया गया।