कॉलेज में हमेशा हिजाब में रहती थी लेडी आतंकी शाहीन:स्टाफ ने कहा- कई बार बहस हुई, लेकिन मजहब और पहनावे से कोई समझौता नहीं किया

दिल्ली ब्लास्ट में गिरफ्तार की गई लखनऊ की लेडी आतंकी डॉ. शाहीन को लेकर अब कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलोजी विभाग में कार्यरत थी।शाहीन के बारे में कॉलेज के शिक्षकों और सहयोगियों ने बताया कि वह बेहद शांत स्वभाव की थी और अपने काम से काम रखने वाली थी। साथ में काम करने वालों का कहना है कि शाहीन हमेशा हिजाब पहनकर कॉलेज आती थी। उसे अपने मजहब से किसी तरह का समझौता नहीं था। वहीं, इससे पहले शाहीन के पूर्व पति डॉ. जफर हयात ने बताया था कि शाहीन अक्सर यूरोपियन कंट्री में चलने का दबाव बनाती थी और एक दिन अचानक शाहीन छोड़कर चली गई। डॉ. शाहीन और उसका कानपुर कनेक्शन सामने आने के बाद पुलिस अलर्ट हो गई है। पुलिस कमिश्नर ने कानपुर में संदिग्धों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है। यह एसआईटी कानपुर में रहने वाले पाकिस्तानी समेत अन्य विदेशियों का भी सत्यापन करेगी। फार्माकोलोजी विभाग के एचओडी डॉ. वीरेंद्र कुशवाहा ने बताया कि शाहीन हमेशा विभागीय कार्यों में गंभीरता दिखाती थी। छात्रों को पढ़ाने में पूरी तरह समर्पित रहती थी। किसी भी तरह की गतिविधि या बयान से कभी यह संकेत नहीं मिला कि वह किसी गलत संगत में है। हमेशा हिजाब पहनकर क्लास लेती थी वहीं, कॉलेज की कुछ महिला प्रोफेसरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि डॉ. शाहीन हमेशा हिजाब पहनकर क्लास लेती थी। कई बार स्टाफ की ओर से उन्हें इस पर टोक भी दिया गया, लेकिन उन्होंने हिजाब उतारने से साफ इनकार कर दिया। इस बात को लेकर सीनियर अधिकारियों से भी उनकी कई बार बहस हुई थी। स्टाफ के अनुसार, वह अपनी धार्मिक पहचान और पहनावे के मामले में किसी तरह का समझौता नहीं करती थीं। विभाग के शिक्षकों में हैरानी है कॉलेज प्रशासन ने बताया कि 2013 में बिना किसी सूचना के वह कॉलेज से अनुपस्थित हो गई थीं। जिसके बाद 2021 में उसकी सेवा समाप्त कर दी गई। अब दिल्ली ब्लास्ट में उसकी गिरफ्तारी के बाद विभाग के शिक्षकों में हैरानी है कि इतनी शांत, पढ़ी-लिखी और समर्पित दिखने वाली डॉक्टर इस तरह की आतंकी गतिविधियों में कैसे शामिल हो सकती हैं। चरमपंथी झुकाव या कट्टर सोच नहीं देखी शाहीन के पूर्व पति डॉ. जफर हयात ने भी दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि 2003 में दोनों की शादी हुई थी और 2013 में तलाक हो गया। उन्होंने कहा- शाहीन के स्वभाव में कभी कोई चरमपंथी झुकाव या कट्टर सोच नहीं देखी। हां, उनकी एक इच्छा थी कि वह यूरोपियन सिटी में रहना चाहती थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच मतभेद हुए और रिश्ता टूट गया। डॉ. शाहीन शाहिद को 10 नवंबर को हरियाणा के फरीदाबाद से अरेस्ट किया गया। इसी दिन दिल्ली में कार में ब्लास्ट हुआ। इसके बाद 11 नवंबर को ATS और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लखनऊ के लालबाग खंदारी बाजार स्थित उसके पुश्तैनी घर और मड़ियांव में उसके भाई डॉ. परवेज अंसारी के यहां छापेमारी की थी। इसके बाद आतंकी डॉ. शाहीन के पूर्व पति पहली बार कैमरे के सामने आए। उन्होंने कहा, “शाहीन कभी भी धर्म या मजहब की बात नहीं करती थी। दिल्ली ब्लास्ट में उसका नाम जुड़ने से हम सभी सदमे में हैं।” अब पढ़िए डॉ. शाहीन के बारे में… तलाक के बाद बदली जिंदगी, जैश के संपर्क में आई तलाक के बाद शाहीन की जिंदगी ने नया मोड़ लिया। सूत्रों के मुताबिक, इसी दौरान उनकी मुलाकात फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे डॉ. मुजम्मिल से हुई। मुजम्मिल ने ही शाहीन को अल-फलाह यूनिवर्सिटी में एंट्री दिलाई, जहां उन्होंने मेडिकल फैकल्टी के तौर पर काम शुरू किया। धीरे-धीरे वह आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग “जमात उल मोमिनात” के संपर्क में आईं। एजेंसियों का कहना है कि यहीं से शाहीन की भर्ती महिला कमांडर के तौर पर की गई। ———————— ये खबर भी पढ़ें… आतंकी डॉ. शाहीन के दो बेटे, सरकारी डॉक्टर से शादी:कानपुर में एक्स हसबैंड बोले- आतंकी सुनकर सदमा लगा, 10 साल से संपर्क नहीं ‘मेरी 2003 में अरेंज मैरिज हुई थी। दो बच्चे भी हुए। शाहीन अक्सर यूरोपियन कंट्री में चलने का दबाव बनाती थी, लेकिन मैं यहीं रहना चाहता था। एक दिन अचानक शाहीन हम लोगों को छोड़कर चली गई। 2015 में हमारा तलाक हो गया। इसके बाद वह कभी लौटकर नहीं आई। हमारे बीच कभी विवाद नहीं रहा।’ पढ़ें पूरी खबर..