क्रिटिकल केयर के ट्रांसफॉर्म के लिए पार्टनरशिप जरूरी: अमित घोष:एराज युनिवर्सिटी में आयोजित हुई नर्सिंग इमरजेंसी, क्रिटिकल केयर एंड ट्रामा  एलाइड रिस्पांडर की पहली नेशनल कांफ्रेंस

उत्तर प्रदेश में क्रिटिकल केयर सिस्टम को मजबूत करने के लिए सरकारी आदेशों से ज्यादा पार्टनरशिप की जरूरत है। सभी स्टेकहोल्डर्स को साथ लेकर प्राइवेट और सरकारी मेडिकल कॉलेजों के साथ लीडिंग हॉस्पिटलों को जोड़ना होगा। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष ने यह बातें शनिवार को एरा यूनिवर्सिटी में आयोजित प्रथम नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ नर्सिंग इमरजेंसी, क्रिटिकल केयर एंड ट्रॉमा एलाइड रिस्पॉन्डर (नेक्टर) में कही। उन्होंने एक स्मारिका का विमोचन भी किया। घोष ने कहा कि यदि मरीज को तुरंत इलाज मिले तो उसकी जान बचाई जा सकती है। इसमें सेप्टम और नेक्टर की अहम भूमिका है। एम्बुलेंस में मरीज को कैसी केयर मिल रही है, रोड एक्सीडेंट से लेकर ट्रॉमा सेंटर तक की व्यवस्था पर मंथन जरूरी है। कई बार मरीज समय पर ट्रॉमा सेंटर नहीं पहुंच पाता या वेंटीलेटर नहीं मिलता, घंटों एम्बुलेंस में पड़ा रहता है। पॉलिसी मेकिंग में इन समस्याओं का समाधान तलाशा जा रहा है। पैरामेडिकल स्टाफ के रेगुलर ट्रेनिंग पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार सिस्टम डेवलपमेंट में लगी है। यूपी में 81 मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें 41 सरकारी और बाकी प्राइवेट सेक्टर के। 60 जिलों में फैले ये कॉलेज 73 जिलों में से 15 जिलों में इंटेंसिव केयर सुविधा अपर्याप्त है। गांवों में इमरजेंसी पर फर्स्ट रिस्पॉन्डर कब पहुंचेगा, यह बड़ा सवाल है। क्रिटिकल केयर मुहैया कराने में अभी लंबा सफर बाकी है। एरा यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. अब्बास अली महदी ने कहा कि संस्थान टीचर्स ट्रेनिंग, रिसर्च और चिकित्सा में योगदान दे रहा है। न्यूनतम रेट पर इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है, कई कोर्स चल रहे हैं और ओपीडी में रोज 3000 मरीज देखे जाते हैं। प्रो चांसलर मीसम अली खान भी मौजूद थे। सचिव सामान्य प्रशासन जुहैर बिन सगीर ने नर्सिंग रेगुलेटरी बॉडी की वकालत की, जो पैरामेडिकल ट्रेनिंग और परफॉर्मेंस मॉनिटर करे। सेंट्रल पोर्टल बनाने का सुझाव दिया, जहां क्रिटिकल केयर जानकारी साझा हो और दुर्घटना की सूचना परिजनों तक तुरंत पहुंचे। एम्बुलेंस कर्मियों को ट्रेनिंग दें कि मरीज को सही स्तर के हॉस्पिटल में ले जाएं, क्योंकि गोल्डन ऑवर महत्वपूर्ण है। एरा विश्वविद्यालय के अतिरिक्त निदेशक जॉ अली खान ने पैरामेडिकल की कार्यक्षमता बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि डॉक्टर अनुपस्थित होने पर भी केयर हो सके। छोटी-छोटी तकनीकों के मेडिकल क्षेत्र में योगदान पर बल दिया। पैनल में सैकटम अध्यक्ष डॉ. लोकेंद्र गुप्ता, डॉ. राकेश कुमार गोरिया और क्रिटिकल केयर के एचओडी डा. मुस्तहसिन मलिक पैरामेडिकल सशक्तिकरण के सुझाव दिए।