गाजीपुर में केंद्रीय बजट पर मिली-जुली प्रतिक्रिया:प्रोफेसर ने बताया ‘संतुलित’, छात्र नेता और सपा जिलाध्यक्ष ने उठाए सवाल

केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा बजट पेश किए जाने के बाद गाजीपुर में इस पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने इसे संतुलित और दूरदर्शी बताया, जबकि अन्य ने इसे आम जनता के लिए निराशाजनक करार दिया। स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गाजीपुर के प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने केंद्रीय बजट 2026-27 को ‘विकसित भारत’ की दिशा में एक संतुलित और दूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट राष्ट्रीय विकास के साथ-साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश के वाराणसी, गाजीपुर और बलिया क्षेत्रों के लिए भी नई संभावनाएँ खोलेगा।
प्रोफेसर पाण्डेय ने पूंजीगत व्यय को ₹12.2 लाख करोड़ तक बढ़ाने का उल्लेख किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक है। उनके अनुसार, बुनियादी ढाँचे में यह निवेश सड़क, रेल, जलमार्ग और शहरी विकास के माध्यम से स्थानीय रोजगार, व्यापार और उद्योग को मजबूती देगा। छात्र नेता दीपक उपाध्याय ने शिक्षा के लिए ₹1.39 लाख करोड़ के आवंटन, गर्ल्स हॉस्टल सुविधा और डिजिटल लैब्स जैसे छात्रहितैषी कदमों की सराहना की। हालांकि, उन्होंने इन घोषणाओं के जमीनी स्तर पर लागू होने पर सवाल उठाए। उपाध्याय ने कहा कि अक्सर सरकारी घोषणाएँ कागजों पर तो अच्छी दिखती हैं, लेकिन आम छात्र के जीवन में बदलाव नहीं आता। उन्होंने गाजीपुर का उदाहरण देते हुए बताया कि केंद्र सरकार की ‘सामाजिक प्रगति सूचकांक रिपोर्ट’ में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गाजीपुर पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर है, फिर भी 350 से अधिक महाविद्यालयों वाला यह जनपद आज भी विश्वविद्यालय विहीन है। वहीं, समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष गोपाल सिंह यादव ने इस बजट को 95 प्रतिशत लोगों को निराश करने वाला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों, छात्रों, नौजवानों और कमजोर वर्ग के लिए इस बजट में कोई विशेष प्रावधान नहीं है। यादव ने कहा कि यह बजट भारतीय जनता पार्टी से संबंध रखने वाले और बड़े उद्योगपतियों के फायदे को ध्यान में रखकर बनाया गया है।