गोंडा के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अतुल कुमार तिवारी को योगी सरकार ने सस्पेंड कर दिया है। अतुल तिवारी ने टेंडर दिलवाने के बदले करीब सवा दो करोड़ रुपए का कमीशन मांगा था। जानकारी CM योगी तक पहुंची तो उन्होंने सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। दरअसल, BSA अतुल के खिलाफ ठेकेदार मनाेज कुमार पांडेय समेत दो अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने रिश्वत लेने के बावजूद उनका काम नहीं किया। सात दिन पहले ‘दैनिक भास्कर’ के स्पेशल शो ‘बात खरी है’ में BSA के ऊपर लगे आरोपों को प्रमुखता से दिखाया गया था। फिलहाल DM की रिपोर्ट ने सीएम योगी ने बीएसए को सस्पेंड कर दिया है। विभाग के संयुक्त सचिव वेद प्रकाश राय ने सस्पेंशन का लेटर जारी किया है। अतुल के खिलाफ विभागीय जांच भी होगी। लखनऊ मंडल के मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक को जांच मिली है। निलंबित रहते अतुल तिवारी मंडलीय मुख्यालय में अटैच रहेंगे। पहले जाने क्या है पूरा मामला 2 नवंबर को कोर्ट ने अतुल कुमार तिवारी समेत तीन लोगों जिला समन्वयक निर्माण विद्याभूषण मिश्रा और जिला समन्वयक जेम पोर्टल प्रेम शंकर मिश्रा पर FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। तीनों पर 15 करोड़ के टेंडर के बदले 15% कमीशन मांगने का आरोप था। मामला सामने आने पर न्यायाधीश विपिन कुमार तृतीय ने FIR दर्ज करने और जांच के आदेश दिए। जबकि BSA ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया था। उन्होंने कहा था-मैने किसी से कमीशन की मांग नहीं की। न ही किसी से पैसा लिया। आवेदक ने लगाए थे रिश्वत मांगने के आरोप मोतीगंज थाना क्षेत्र के किनकी गांव के रहने वाले मनोज कुमार पांडे ने कोर्ट को बताया कि 7 अक्टूबर 2024 को जेम पोर्टल के माध्यम से फर्नीचर सप्लाई का टेंडर लिया था। यह टेंडर 15 करोड़ रुपए का था। टेंडर स्वीकृति के बदले बीएसए अतुल कुमार तिवारी, विद्याभूषण मिश्रा और प्रेम शंकर मिश्र ने 15% कमीशन मांगीं। 50 लाख रुपए एडवांस देने को कहा। 4 जनवरी 2025 को मैंने 22 लाख रुपए बीएसए अतुल कुमार तिवारी, 4 लाख रुपए प्रेम शंकर मिश्रा और कुछ रकम विद्याभूषण मिश्रा को दी थी। इसके बावजूद टेंडर मुझे नहीं दिया। जब मैंने बाकी पैसा देने से इनकार किया तो मेरी फर्म को 2 फरवरी 2025 को ब्लैकलिस्ट कर दिया। मेरे खिलाफ नगर कोतवाली में फर्जी दस्तावेजों से टेंडर लेने का मुकदमा दर्ज करा दिया गया। रिश्वत न देने पर ऑफिस से निकाल दिया गया मनोज बोले- बीएसए ने कहा कि बाकी 24 लाख रुपए जमा करो, नहीं तो फर्म ब्लैकलिस्ट कर देंगे। मैंने कहा जब पैसा मिलेगा तब देंगे। इस पर बीएसए ने धक्का देकर ऑफिस से निकाल दिया।इसके बाद मैंने अपने पैसे की वापस मांगे। लेकिन पैसा नहीं लौटाया गया। बाद में प्रेम शंकर मिश्रा ने 1 लाख रुपए लौटाए, मगर बीएसए अतुल कुमार तिवारी और विद्याभूषण मिश्रा ने कोई रकम वापस नहीं की। तीनों अधिकारियों से वॉट्सऐप कॉल और मैसेज पर भी बातचीत हुई थी। इसके बाद 9 जून को जिला समन्वयक निर्माण विद्याभूषण मिश्रा की ओर से उनके मेरे खिलाफ नगर कोतवाली में फर्जी दस्तावेजों से टेंडर लेने का मुकदमा दर्ज करा दिया गया। इस पूरे प्रकरण की शिकायत गोंडा डीएम से की लेकिन कार्रवाई न होने पर न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। विशेष न्यायाधीश विपिन कुमार तृतीय ने मामले की सुनवाई की। इसके बाद प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए गोंडा नगर कोतवाली पुलिस को बीएसए अतुल कुमार तिवारी, विद्याभूषण मिश्रा और प्रेम शंकर मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विवेचना कराने के निर्देश दिए हैं। BSA ने सारे आरोप को निराधार बताया था जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अतुल कुमार तिवारी ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया था। उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा कोई भी कमीशन की मांग नहीं की गई है। न ही मेरे द्वारा कोई पैसा लिया गया है। इन्होंने गलत तरीके से कागजातों के आधार पर टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया था जिसको लेकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। इनकी फर्म को ब्लैक लिस्टेड भी किया गया है इसीलिए उनके द्वारा गलत तरीके से आरोप लगाया गया है।