गोरखपुर में इस्लामी अकीदे पर विशेष कार्यशाला आयोजित:पैगंबरों-शहीदों की कब्रों में जीवन, वसीला पर हदीस से स्पष्टीकरण

गोरखपुर के मदरसा रजा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर, सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार और जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद, गोरखनाथ में पांच सप्ताह तक चल रही इस्लामी अकीदे की विशेष कार्यशाला के चौथे सप्ताह का आयोजन किया गया। इस दौरान वसीला तथा पैगंबरों और शहीदों की कब्रों में जीवन से जुड़े अकीदे पर कुरआन-ए-पाक और हदीस-ए-पाक के हवाले से विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य वक्ता हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि पैगंबर और शहीद अपनी कब्रों में हकीकी तौर पर जीवित हैं। उन्होंने बताया कि अल्लाह ने जमीन पर यह हराम कर दिया है कि वह पैगंबरों के जिस्म को नुकसान पहुंचाए, इसलिए उनके शरीर कब्रों में भी सुरक्षित रहते हैं। कुरआन के हवाले से शहादत की जिंदगी को किया स्पष्ट हाफिज रहमत अली ने कहा कि कुरआन में अल्लाह की राह में शहीद होने वालों को मुर्दा न कहने का हुक्म है, बल्कि उन्हें जीवित बताया गया है। शहीदों को उनके रब की ओर से रोजी दी जाती है। पैगंबरों का दर्जा शहीदों से भी ऊंचा है, इसलिए उनकी कब्र की जिंदगी और अधिक कामिल होती है। उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर जो लोग सलाम भेजते हैं, आप उसका जवाब देते हैं और अल्लाह की इबादत में मशगूल रहते हुए अपनी उम्मत के लिए सिफारिश करते हैं। पैगंबरों और शहीदों का यह जीवन दुनिया के जीवन से बिल्कुल अलग और इंसानी समझ से परे है। वसीला का अर्थ अल्लाह की निकटता का माध्यम कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि इस्लाम में वसीला का अर्थ वह माध्यम है, जिसके जरिए अल्लाह की निकटता प्राप्त की जाती है। कुरआन में ईमान वालों को अल्लाह की ओर पहुंचने के लिए वसीला तलाश करने का आदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम अल्लाह के सबसे प्रिय हैं, इसलिए उनके माध्यम से दुआ करना अल्लाह के करीब होने का एक अहम तरीका है। सहाबा किराम पैगंबर के जीवनकाल में उनसे दुआ की गुजारिश किया करते थे। दुआ के समय पैगंबर-ए-इस्लाम के मकाम, मुहब्बत और उनकी सिफारिश को वसीला बनाना दुआ की कुबूलियत का जरिया बताया गया।
दुरूद व सलाम के साथ कार्यक्रम का समापन कार्यक्रम के अंत में दुरूद व सलाम पढ़कर समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा और अवाम की खिदमत के लिए दुआ मांगी गई। कार्यशाला में बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं मौजूद रहीं।