गोरखपुर में नगर निगम पर कब्रिस्तान की जमीन को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। मौजा तुर्कमानपुर स्थित भैंसा खाना कब्रिस्तान की जमीन को नीलामी में शामिल किए जाने के खिलाफ DM को ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन में नीलामी प्रक्रिया तत्काल रोकने, अभिलेखों में कथित हेराफेरी की जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि तुर्कमानपुर स्थित भैंसा खाना कब्रिस्तान वक्फ संख्या 1377 के तहत 1359 फसली वर्ष के खसरा में आराजी संख्या 833 और 834 के रूप में दर्ज है। नियमानुसार इस तरह दर्ज कब्रिस्तान की जमीन में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जा सकता, इसके बावजूद नगर निगम द्वारा इन आराजियों पर अपना नाम दर्ज कर लिया गया।
दुकानों पर कब्जे का भी आरोप कब्रिस्तान कमेटी का आरोप है कि कब्रिस्तान के संचालन- रखरखाव के लिए बनी दुकानों पर भी नगर निगम ने कब्जा कर लिया है। इस संबंध में सिविल कोर्ट में मामला लंबित है। वाद संख्या 75/2025 (दीनानाथ बनाम नगर आयुक्त) में नगर निगम स्वयं पक्षकार है और सुनवाई चल रही है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि अदालत में पेश होकर नगर आयुक्त ने स्वयं स्वीकार किया है कि संबंधित भूमि कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है। वहीं दूसरी ओर नगर निगम इसे अपनी संपत्ति भी बता रहा है, जिसे विरोधाभासी और भ्रामक बताया गया है। मुकदमा होने के बावजूद नीलामी का आरोप आरोप है कि मामला अदालत में लंबित होने और नगर आयुक्त की उपस्थिति के बावजूद नगर निगम ने 29 जनवरी को विज्ञापन प्रकाशित कर कब्रिस्तान से जुड़ी 21 दुकानों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी। इसे न केवल नियमों के खिलाफ बल्कि नीलामी में भाग लेने वाले लोगों के साथ धोखाधड़ी बताया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि नगर निगम के कुछ अधिकारी और भू-माफिया आपसी मिलीभगत से कब्रिस्तान की जमीन को अवैध रूप से बेचने की कोशिश कर रहे हैं। 1359 फसली में दर्ज जमीन में किसी भी प्रकार का बदलाव कानूनन संभव नहीं है, ऐसे में यह मामला कानून की अवमानना और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बताया गया है।