गोरखपुर में ‘तख़लीक-ए-अरुण’ का हुआ लोकार्पण:कवि की ग़ज़लों- गीतों ने छुआ दिल, साहित्यप्रेमियों ने की सराहना

गोरखपुर के सिविल लाइन स्थित एक परिसर में कवि अरुण कुमार श्रीवास्तव की ग़ज़ल और गीत संग्रह ‘तख़लीक-ए-अरुण’ का लोकार्पण समारोह हुआ। इस अवसर पर शहर के साहित्यकार, शिक्षाविद, कवि और साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम में साहित्य, समाज और संवेदनाओं पर सार्थक विमर्श भी हुआ। समारोह में ‘तख़लीक-ए-अरुण’ पुस्तक का विमोचन प्रोफेसर चितरंजन मिश्रा, दुर्गा प्रसाद श्रीवास्तव, इंजीनियर प्रदीप श्रीवास्तव और प्रह्लाद गुप्ता ने संयुक्त रूप से किया। पुस्तक में कवि ने ग़ज़लों और गीतों के माध्यम से जीवन के विविध रंगों, रिश्तों की गहराई और समाज की बदलती संवेदनाओं को रचनात्मक रूप से अभिव्यक्त किया है। साहित्य प्रेमियों ने की रचनाओं की सराहना कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि कवि अरुण कुमार श्रीवास्तव की रचनाओं में आम जीवन के अनुभव और सामाजिक चेतना की सशक्त झलक मिलती है। उनकी भाषा सरल होने के साथ गहराई लिए हुए है, जो पाठकों को सीधे छूती है। वक्ताओं ने कहा कि यह संग्रह नई पीढ़ी के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा। गीत और ग़ज़लों का हुआ पाठ समारोह के दौरान कवि और अन्य प्रतिभागियों ने पुस्तक से कुछ चयनित गीतों और ग़ज़लों का पाठ किया। श्रोताओं ने हर पंक्ति पर तालियों से स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन शालीन और सौम्य वातावरण में हुआ, जहां साहित्य की गूंज और शब्दों की संवेदना देर तक बनी रही। रचनाओं में जीवन के अनुभवों की झलक वक्ताओं ने कहा कि ‘तख़लीक-ए-अरुण’ में कवि ने अपने अनुभवों और समाज की वास्तविकताओं को गहराई से उकेरा है। यह संग्रह न केवल ग़ज़लों का दस्तावेज़ है, बल्कि यह समय की नब्ज़ को महसूस कराने वाला साहित्यिक प्रयास है। कार्यक्रम में शिक्षाविद, साहित्यकारों और समाजसेवियों ने भाग लिया। सभी ने लेखक को शुभकामनाएं दीं और कहा कि ऐसे आयोजन शहर की साहित्यिक परंपरा को सशक्त बनाते हैं। समारोह के अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए आयोजकों ने सभी का आभार व्यक्त किया।