कानपुर में एडीजे-18 राकेश कुमार तिवारी की कोर्ट ने जानलेवा हमले में 5 साल कैद और पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने तत्कालीन चकेरी चौकी प्रभारी और वर्तमान में गौतमबुद्ध नगर में एसटीएफ में तैनात सचिन कुमार की विवेचना में कई तरह की गलतियों पर कार्रवाई के लिए फैसले की एक कॉपी पुलिस कमिश्नर को भेजने के लिए कहा है। 8 जुलाई 2011 में किया था हमला सिविल लाइंस उन्नाव निवासी अशोक कुमार जायसवाल ने चकेरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था कि वह देवेंद्र सिंह और राजेश सिंह की लाल बंगला स्थित देशी शराब की दुकान पर सेल्समैन है, ठेके में कैंटीन भी है। इसकी देख-रेख रामादेवी निवासी राम भवन सिंह करते हैं। 8 जुलाई 2011 को रात 9:45 बजे एक युवक राम भवन सिंह के पास गया और बोला कि जो पर्ची पहलवान ने दी थी उस पर तुमने शराब क्यों नहीं दी। विरोध किया तो फायर किया विरोध करने पर उसने तमंचा से एक फायर किया। उसके छर्रे राम भवन सिंह के चेहरे पर लगे। इसके बाद चापड़ निकालकर मार दिया। अनिल चौरसिया बचाने के लिए दौड़ा तो उसके भी चापड़ मार दिया, इसके बाद भाग गया। दोनों घायलों को हैलट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बाद में पुलिस ने इन दोनों पर जानलेवा हमले में सफीपुर प्रथम चकेरी निवासी रवि कुमार थापा को आरोपी बनाया था। उसने अदालत में सरेंडर कर दिया था। एडीजीसी धर्मेंद्र पाल सिंह ने बताया कि विवेचक ने कोर्ट में पूरक मेडिकल रिपोर्ट दाखिल नहीं की थी। मेडिकल करने वाले डाक्टरों के बयान नहीं लिए थे। विवेचक ने रवि कुमार थापा के बयान लिखे थे कि उसने नगर निगम की डस्टबिन में तमंचा और चापड़ फेंक दिए थे। इसके बाद तमंचा और चापड़ नहीं बरामद किया था।