उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना और निराश्रित विधवाओं के पुनर्वास से जुड़ी योजनाओं में संभल के जिला प्रोबेशन कार्यालय में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि जिला प्रोबेशन अधिकारी चंद्रभूषण द्वारा योजनाओं के बजट में धांधली की गई और वित्तीय तथा स्टॉक रजिस्टर को फर्जी तरीके से भरा गया। साथ ही लाखों रुपये के फर्जी बिल बनाकर सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश देते हुए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति में डिप्टी कलेक्ट्रेट नीतू रानी को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि दो अन्य अधिकारियों को सदस्य नामित किया गया है, जिनके नाम मुनीश्वर प्रकाश, सहायक कोषाधिकारी, संभल एवं योगेंद्र सिंह, लेखाधिकारी, कार्यालय, जिला विकास अधिकारी, संभल है। समिति को निर्देश दिया गया है कि वह मामले की विस्तृत जांच कर 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपे। प्रशासन को विभिन्न योजनाओं से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें फर्जी बिलों के जरिए लाखों रुपये के खर्च दर्शाने और अभिलेखों में गड़बड़ी के आरोप शामिल थे। इन्हीं शिकायतों के आधार पर यह जांच कमेटी गठित की गई है। माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी ने भी इस मामले पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है। यदि किसी भी योजना, चाहे वह ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ हो या निराश्रित महिलाओं के पुनर्वास से जुड़ी व्यवस्था, में भ्रष्टाचार पाया जाता है तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी। अब पूरे मामले की निगाहें जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिससे यह साफ हो सकेगा कि सरकारी योजनाओं के बजट में कितनी बड़ी अनियमितता हुई है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।