झांसी में आवास विकास परिषद की प्रस्तावित हाउसिंग परियोजना को लेकर किसानों और जमीन मालिकों का विरोध खुलकर सामने आ गया है। परिषद द्वारा भूमि अधिग्रहण के लिए आपत्तियां जानने को बुलाए गए किसानों ने न सिर्फ अपनी जमीनें देने से साफ इनकार कर दिया, बल्कि परिषद के एक अधिकारी पर बिल्डरों से सांठगांठ के गंभीर आरोप भी लगाए।
दरअसल, झांसी शहर से सटे पिछोर, टाकोरी, मुस्तरा और कोंछाभवर क्षेत्रों में आवास विकास परिषद हाउसिंग सोसायटी विकसित करने की योजना बना रही है, जिसे आवास विकास परियोजना संख्या–4 नाम दिया गया है। इसके लिए टाउन प्लानिंग कर कार्ययोजना सरकार के समक्ष प्रस्तुत की जा चुकी है।
लखनऊ से झांसी पहुंची नियोजन समिति
परियोजना के लिए चिन्हित भूमि के मालिकों द्वारा विरोध किए जाने के बाद, आवास विकास परिषद की नियोजन समिति को गुरुवार को लखनऊ से झांसी भेजा गया। दीनदयाल उपाध्याय सभागार में समिति ने किसानों और जमीन मालिकों को उनकी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए बुलाया।
बैठक में पहुंचे किसानों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी जमीन ही उनके जीवनयापन का एकमात्र साधन है और वे किसी भी कीमत पर अपनी भूमि देने को तैयार नहीं हैं। बिल्डरों से सांठगांठ के आरोप
जमीन मालिकों ने परिषद के एक अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ चुनिंदा बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से इस भूमि पर नजर डाली गई है। उनका आरोप है कि परिषद के अधिकारी और बिल्डर आपस में मिलीभगत कर किसानों की जमीनें अधिग्रहित कराना चाहते हैं।
अधिकारियों के जवाबों से असंतुष्ट किसान
जमीन मालिकों का कहना है कि जब वे अधिकारियों से सवाल पूछते हैं तो उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं दिए जाते। किसानों ने सवाल उठाया कि—
• परिषद पहले से विकसित और आबाद क्षेत्रों में ही प्रोजेक्ट क्यों ला रही है?
• जहां पहले से मकान बने हैं, वहां अधिग्रहण कर दोबारा मकान बनाने का उद्देश्य क्या है?
• जमीन का मुआवजा किस दर से दिया जाएगा, इस पर अधिकारी स्थिति साफ क्यों नहीं कर रहे?
इन सवालों के जवाब न मिलने से किसानों में रोष और गहराता नजर आया।
पुलिस की मौजूदगी से बढ़ी नाराजगी दरअसल, आवास विकास योजना समिति ने किसानों को आपत्तियां दर्ज कराने के लिए बुलाया था। जब किसान यहां सभागार पहुंचे तो वहां पुलिस बल तैनात मिला। यह देख किसान और जमीन मालिकों का आक्रोश और बढ़ गया। उनका कहना था कि जब खुले मंच से दोनों पक्ष बैठक करने आए थे तो पुलिस को किस लिए बुलाया गया है। इससे आवास विकास परिषद की मंशा साफ जाहिर हो रही है कि वह दवाब बनाकर हमारी जमीनें अधिग्रहित करना चाहते हैं। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि अगर अधिकारियों के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाई जाए तो भूमाफियाओं से उनके संबंध उजागर हो जाएंगे।