दिल्ली ब्लास्ट के बाद आतंक के नए मॉड्यूल को लेकर सुरक्षा एजेंसियां एक्शन मोड में हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस और गुजरात एटीएस लगातार पड़ताल कर रही हैं। इस कड़ी में अब पंजाब पुलिस की भी एंट्री हो गई है। पंजाब पुलिस सहारनपुर में ड्रोन नेटवर्क के तार तलाश रही है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या डॉ. अदील ने पाकिस्तान से हथियार मंगाए। पाकिस्तानी ड्रोन से आए RDX क्या डॉ. अदील तक पहुंचाए जाने थे। दरअसल, पंजाब में पाकिस्तान बॉर्डर से पकड़े गए ड्रोन और उससे बरामद विस्फोटक सामग्री को आतंकी मॉड्यूल से जोड़कर देखा जा रहा है। शक है कि इसका सीधा कनेक्शन सहारनपुर से गिरफ्तार डॉ. अदील अहमद राथर से हो सकता है। इसकी तह तक पहुंचने के लिए पंजाब से लेकर यूपी तक ड्रोन नेटवर्क की जांच तेज हो गई है। पंजाब में बरामद बड़े पैमाने पर विस्फोटक और हथियारों ने सुरक्षा एजेंसियों की सांसें बढ़ा दी हैं। ड्रोन मामले में खालिस्तानी और बब्बर खालसा से जुड़े संदिग्ध आतंकी पकड़े जा चुके हैं। इस बीच पंजाब पुलिस की एक टीम सहारनपुर पहुंचकर इसी ड्रोन नेटवर्क की जांच कर रही है। पाकिस्तान से आया ड्रोन से 40 किलो आरडीएक्स पकड़ा गया
पंजाब में पिछले छह महीनों से सक्रिय सफेदपोश आतंकी नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों और पंजाब पुलिस की जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन के जरिए भेजी जा रही विस्फोटक सामग्री और हथियारों के तार सीधे डॉ. अदील से जुड़े हैं। इस कड़ी की आवाजाही पश्चिमी यूपी के कई जिलों तक पहुंच रही है, जिससे खुफिया एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है। इसे लेकर शनिवार को दिल्ली की सुरक्षा एजेंसी और पंजाब पुलिस ने अंबाला रोड के फेमस मेडिकेयर हॉस्पिटल में जांच करने पहुंची। डॉ. अदील से जुड़ी सभी जानकारी इकट्ठा की। सूत्रों के अनुसार, पंजाब पुलिस और बीएसएफ ने पिछले छह महीनों के दौरान पंजाब के अलग-अलग इलाकों से 40 किलो RDX, 12 IED, 20 से अधिक हैंड ग्रेनेड, डेटोनेटर बरामद किए थे। इसे दिल्ली में हुए ब्लॉस्ट के बाद फरीदाबाद में मिली करीब 3000 हजार किलो विस्फोटक सामग्री से जोड़कर देखा जा रहा है। जांच में पाया गया कि ये पूरा नेटवर्क सफेदपोश आतंकियों के जरिए संचालित हो रहा था। ड्रोन की ये सप्लाई सीधे डॉ. अदील तक पहुंचती थी। विस्फोटक और हथियारों की ये सप्लाई पंजाब की सीमा से होकर विभिन्न राज्यों में पहुंचाई जा रही थी। पश्चिमी यूपी और पूर्वांचल में ड्रोन ने मचाया था हड़कंप
दरअसल, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, हापुड़, अमरोहा, बिजनौर, मुरादाबाद और संभल जैसे जिलों में पिछले कुछ महीनों में कई बार संदिग्ध ड्रोन उड़ने की सूचनाएं मिलीं थी। लोग रात भर पहरा देते रहे, लेकिन किसी ड्रोन को पकड़ा नहीं जा सका। यूपी पुलिस ने कई बार जांच की, लेकिन किसी घटना में ड्रोन से जुड़े अपराध की पुष्टि नहीं हुई। अब इस मामले में भी पंजाब पुलिस जांच शुरू कर सकती है। यूपी में ड्रोन का खौफ ड्रोन की अफवाह और आतंक का कनेक्शन
इन सफेदपोश नेटवर्क के खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां इन घटनाओं को सामान्य नहीं मान रही हैं। पाकिस्तान से लगातार पंजाब के बॉर्डर एरिया में ड्रोन के जरिए विस्फोटक भेजे गए। अक्टूबर की शुरुआत में पुलिस ने जालंधर में ढाई किलो आरडीएक्स के साथ बब्बर खालसा इंटरनेशनल के दो आतंकियों को अरेस्ट किया था। जांच में सामने आया कि गैंगस्टर मनप्रीत सिंह उर्फ टिड्डी ने करीब दो सप्ताह पहले पाकिस्तान में बैठे हैंडलर के जरिए अजनाला सेक्टर के रास्ते ड्रोन के जरिए यह विस्फोटक सामग्री भेजी थी। इसके बाद टिड्डी ने पैकेट हासिल किया और उसे अपने गांव कोटला तरखाना के पास नहर किनारे छिपा दिया था। हैंडलरों ने उसे विस्फोटक किसी अन्य व्यक्ति को सौंपने के निर्देश दिए थे। खुलासे के बाद आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने कोटला तरखाना गांव से करीब 2.5 किलोग्राम आरडीएस व दो आईईडी बरामद किए, जिनमें विस्फोट के लिए टाइमर लगे हुए थे। टिड्डी आर्मेनिया, यूके और जर्मनी में बैठे गैंगस्टरों के निर्देशों पर काम कर रहा था। उन गैंगस्टर्स को एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन के पाकिस्तान स्थित मास्टरमाइंड से आदेश मिल रहे थे। पुलिस गैंगस्टर टिड्डी से पूछताछ में उन लोगों का लिंक खंगालने में जुटी है जिन्हें ये आरडीएक्स आगे सप्लाई किया जाना था। दिल्ली ब्लास्ट के बाद पंजाब पुलिस ने इनपुट दिया
दिल्ली धमाके के बाद पंजाब पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों को सीमा पार से ड्रोन द्वारा भेजे गए विस्फोटकों की जानकारी दी। सुरक्षा एजेंसियां दिल्ली धमाकों से इसके संबंध की जांच कर रही हैं। राज्य में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने 40 किलो आरडीएक्स, 12 आईईडी और कई हथगोले बरामद किए हैं और 15 संदिग्धों को गिरफ्तार किया। जिनके तार पाकिस्तान से जुड़े हैं। दिल्ली धमाके के बाद पंजाब पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ छह माह में सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से भेजे गए विस्फोटकों का इनपुट शेयर किया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां दिल्ली धमाकों के साथ इनका लिंक खंगालने में जुटी हैं। धमाके के बाद राज्य भर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सीमावर्ती जिलों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। पंजाब के तरनतारन में पुलिस ने छापेमारी कर 10 किलो आरडीएक्स और चार ग्रेनेड जब्त किए, जबकि फिरोजपुर से तीन आइईडी और विस्फोटक से भरी सामग्री मिली। जालंधर में भी 2.5 किलो आरडीएक्स बरामद की गई थी। गुरदासपुर और पठानकोट से छह ग्रेनेड, पांच पिस्तौल और डेटोनेटर बरामद किए गए। बठिंडा और मोगा से दो संदिग्ध गिरफ्तार किए गए, जिनके पास से हथियार और विस्फोटक सामग्री मिली थी। कितने तरह के ड्रोन होते हैं? बब्बर खालसा, खालिस्तान टाइगर फोर्स से जुड़ा कनेक्शन
पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आतंकियों में से कई का संबंध बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई), खालिस्तान टाइगर फोर्स (केटीएफ) और गोल्डी बराड़-लारेंस बिश्नोई गैंग से है। इनमें से कुछ आतंकियों ने पूछताछ में बताया है कि विस्फोटक सामग्री पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से भेजी गई थी, जिसे राज्य के सीमावर्ती इलाकों में छिपाकर रखा गया था। पंजाब पुलिस के अनुसार, वो राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) और डीआरआई (राजस्व खुफिया निदेशालय) जैसी केंद्रीय एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। बरामद हथियार और विस्फोटक अत्याधुनिक हैं और इनका उपयोग बड़े पैमाने पर हमलों के लिए किया जा सकता था। उन्होंने बताया कि विदेश में बैठे गैंगस्टर और आतंकी संगठन पंजाब, यूपी और दिल्ली-एनसीआर को निशाना बनाने की साजिश रच रहे थे। डॉ. अदील का भाई दुबई से आतंकी मॉड्यूल चला रहा था
इस बीच जांच में सामने आया है कि सहारनपुर से गिरफ्तार आतंकी डॉ. अदील का बड़ा भाई डॉ. मुजफ्फर राथर (साइकेट्रिस्ट) दुबई से आतंकी मॉड्यूल चला रहा था। वह मॉड्यूल का विदेशी लिंक था और करीब पांच साल से सक्रिय बताया जा रहा है। उसके निर्देश पर तीन साल से आतंकी डॉक्टरों का नेटवर्क रॉ मैटीरियल इकट्ठा कर रहा था। डॉ. मुजफ्फर अफगानिस्तान में बैठे पाकिस्तानी हैंडलर और आतंकी मॉड्यूल के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता था। फंडिंग से लेकर विदेशी यात्राओं की योजना, टिकट बुकिंग और पूरा खर्च वही करता था। इस बीच जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डॉ. मुजफ्फर के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर दिया है। अब एजेंसियां उसकी गिरफ्तारी की तैयारी कर रही हैं। वहीं, लखनऊ का डॉ. परवेज साजिश को अंजाम देने के लिए इरादे से नाइट शिफ्ट ही करता था। इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रोफेसर हारिस अहमद सिद्दीकी ने बताया कि 16 जुलाई 2021 को डॉ. परवेज ने बतौर सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर जॉइन किया था। शुरू के एक साल उसने ज्यादातर नाइट ड्यूटी की। डॉ. शाहीन सहारनपुर क्यों पहुंची थी? जांच जारी
सूत्रों के अनुसार, डॉ. शाहीन करीब डेढ़ साल पहले देहरादून रोड (सहारनपुर) पर एक महिलाओं के कार्यक्रम में पहुंची थी। कार्यक्रम में उनके साथ आई महिलाओं ने बुर्के पहन रखे थे। खुफिया एजेंसी इस मामले में भी जांच कर रही है कि डॉक्टर शाहीन सहारनपुर क्यों पहुंची थी। यहां पर कितनी महिलाओं को स्लीपर सेल बनाया गया। कितनी महिलाओं को अपने संगठन से जोड़ा गया? इस पर भी खुफिया विभाग काम कर रहा है। शाहीन, उसका भाई परवेज और अदील समेत पांचों डॉक्टर कैसे पकड़े गए… 1. पोस्टर से डॉ. अदील तक पहुंची पुलिस, सहारनपुर से उठाया
17 अक्टूबर को मौलवी इरफान ने नौगाम इलाके में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े पोस्टर लगवाए। पोस्टर लगाने में आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार शामिल थे। ये सभी CCTV में कैद हो गए। 19 अक्टूबर को श्रीनगर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया। एसएसपी संदीप चक्रवर्ती की अगुआई में पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि पोस्टर मौलवी इरफान और डॉ. अदील के निर्देश पर लगाए गए थे। पुलिस ने मौलवी इरफान और बाद में जमीर अहमद अहंगर को गिरफ्तार किया। इसके बाद डॉ. अदील की तलाश शुरू हुई। जमीर की निशानदेही पर पुलिस अदील के घर पहुंची तो पता चला कि वह 1 नवंबर को सहारनपुर आया है। यहां वह एक अस्पताल में नौकरी कर रहा था। 6 नवंबर को यूपी एटीएस की मदद से श्रीनगर पुलिस ने उसे सहारनपुर से पकड़ लिया। 2. पूछताछ में अदील ने शाहीन का नाम बताया
पूछताछ में डॉ. अदील ने खुलासा किया कि उसके साथ डॉ. मुजम्मिल अहमद गनाई उर्फ मुसाइब, उसकी गर्लफ्रेंड शाहीन और डॉ. उमर भी जुड़े हैं। डॉ. मुजम्मिल फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में डॉक्टर है। अदील ने बताया कि उसके पास एक AK-56 राइफल है, जिसे उसने अनंतनाग गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के लॉकर में छिपाकर रखा था। पुलिस ने वहां छापा मारकर राइफल बरामद कर ली। इसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फरीदाबाद से डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार किया। उसके घर से विस्फोटक मिले। फिर उसकी गर्लफ्रेंड शाहीन को पकड़ा गया। उसके पास से AK-47 बरामद हुई। 3. परवेज गिरफ्तारियों से घबराया, ATS ने दबोचा
डॉ. अदील की गिरफ्तारी के बाद परवेज को भनक लग गई। उसने 7 नवंबर को लखनऊ की इंटीग्रल यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दे दिया। वह मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर था। ई-मेल से इस्तीफा भेजकर किसी अन्य कॉलेज में चयन होने की वजह बताई, लेकिन वह कहीं जॉइन नहीं हुआ। दिल्ली ब्लास्ट के अगले दिन एटीएस ने लखनऊ स्थित उसके घर पर छापा मारा और उसे गिरफ्तार कर लिया। 4. आरिफ ने SGPGI छोड़ कानपुर में जॉइन किया
आरिफ कानपुर मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभाग में डीएम कर रहा था। तीन महीने पहले ही उसने जॉइन किया था। NEET सुपर स्पेशियलिटी में उसे ऑल इंडिया 1008वीं रैंक मिली थी। पहली काउंसलिंग में SGPGI मिला, पर उसने जॉइन नहीं किया। दूसरी काउंसलिंग में उसे कानपुर में सीट मिली। मूल रूप से जम्मू-कश्मीर निवासी आरिफ कानपुर के अशोक नगर में किराए पर रहता था। बुधवार तड़के 2–5 बजे तक उसने इमरजेंसी ड्यूटी की। घर लौटते समय एटीएस ने उसे पकड़ लिया। बाद में उसके कमरे का ताला तोड़कर तलाशी ली गई। 5. फारूख ने अल-फलाह से MD किया, शाहीन थी उसकी प्रोफेसर
फारूख हापुड़ के जीएस मेडिकल कॉलेज में गायनाकोलॉजिस्ट था। वह कैंपस हॉस्टल में रहता था और एक साल पहले ही कॉलेज जॉइन किया था। फारूख बडगाम जिले के मीरिपुरा का रहने वाला है। उसने आचार्य श्रीचंद्र मेडिकल कॉलेज से MBBS और फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से MD किया। डॉ. शाहीन वहीं उसकी प्रोफेसर रह चुकी है। एजेंसियों को शक है कि दिल्ली में विस्फोट के लिए आतंकी डॉक्टर उमर को निर्देश डॉ. मुजफ्फर ने ही दिए थे। मॉड्यूल के कई सदस्यों की गिरफ्तारी और विस्फोटक बरामद होने के बाद आतंकियों की मूल योजना विफल हो गई थी। डॉ. मुजफ्फर के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर दिया गया है। एजेंसियों को आशंका है कि वह अफगानिस्तान या किसी गल्फ कंट्री में छिप सकता है। सुरक्षा एजेंसियों ने करीब 48 घंटे में 600 जगहों पर छापेमारी की है, जिनमें सबसे ज्यादा कार्रवाई जम्मू-कश्मीर में हुई। जम्मू-कश्मीर की इंटेलिजेंस ने लगभग 60 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इनमें जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और यूपी के लोग शामिल हैं। इन सभी का किसी न किसी रूप में इन आतंकी डॉक्टर्स से संपर्क मिला है। ये लोग वॉट्सऐप, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए जुड़े हुए थे। अब तक इस केस में कुल 8 आतंकियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें 7 डॉक्टर और एक मौलवी शामिल हैं। साइकेट्रिस्ट है डॉ. मुजफ्फर, डॉक्टरों को उसी ने जोड़ा
काउंटर इंटेलिजेंस ऑफ कश्मीर (CIK) के सूत्रों के अनुसार, डॉ. मुजफ्फर एक साइकेट्रिस्ट है और करीब पांच साल पहले आतंकी गतिविधियों में शामिल हुआ। शुरुआत में वह सोशल मीडिया के जरिए लोगों को रेडिकलाइज करता था। इसी दौरान वह मौलवी इरफान के संपर्क में आया, जिसने उसे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जोड़ दिया। इसके बाद डॉ. मुजफ्फर दुबई चला गया और वहीं से पूरे आतंकी ‘डॉक्टर्स मॉड्यूल’ को संचालित करने लगा। दुबई से ही वह डॉक्टरों का माइंड वॉश करता और उन्हें धीरे-धीरे आतंकी गतिविधियों में शामिल करता था। इन सभी की मीटिंग भारत से बाहर आयोजित होती थीं। सबसे पहले उसने अपने भाई डॉ. अदील के दोस्त डॉ. मुजम्मिल को जोड़ा, फिर उमर को साथ मिलाया और बाद में डॉ. शाहीन को भी मॉड्यूल का हिस्सा बना लिया। इसके बाद इस चेन को लगातार बढ़ाया जाने लगा और नए चेहरे शामिल होते गए। मॉड्यूल से जुड़े सभी डॉक्टर एक से दो साल में अपने ठिकाने बदलते रहते थे। वे अस्पताल, जिला और कई बार राज्य भी बदल लेते थे ताकि उन पर किसी तरह की निगरानी न हो सके। ————————– ये भी पढ़ें धीरेंद्र शास्त्री बोले- शादी तो जरूर करेंगे:जब मुस्लिम डॉक्टर आतंकी निकल रहे, तो देश खतरे में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की पदयात्रा वृंदावन पहुंच चुकी है। 10 दिन में 170 किमी की पदयात्रा में 3 बार धीरेंद्र शास्त्री की तबीयत बिगड़ी। वो कहते हैं- राम काज कीन्हें बिनु मोहि कहां विश्राम…। मुझ पर 20 घंटे काम करने का साइड इफेक्ट दिखता है। दिल्ली ब्लॉस्ट पर वो कहते हैं- इस्लामिक भाइयों से कहना चाहता हूं कि उन्हें शिक्षा नीति में बदलाव की जरूरत है, ताकि कोई डॉक्टर आतंकवादी न निकले। पूरी खबर पढ़िए