रामलला की प्रतिष्ठा द्वादशी पर देश की प्रसिद्ध भजन गायिका अंशिका ने मंच से जैसे ही “नगरी हो अयोध्या सी….” गीत की पंक्तियां गुनगुनाई पूरा परिसर जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा।उनके भजन गायन के पूरे समय भक्त उनके भजनों को सुनकर भगवान श्रीराम की भक्ति से सराबोर नजर आए। प्रतिष्ठा द्वादशी मंच पर अंशिका ने “रामा रामा रटते रटते”, “साथी हमारा कौन बनेगा”, “नाचे ठुमक ठुमक हनुमान”, “मंगल भवन अमंगल हारी” औऱ “ओम नमः शिवाय” भजनो को मधुर स्वर देकर सबको आनंदित किया। 3 वर्ष की उम्र से भजन गायन कर रही है साहित्य व भारतीय संस्कृति की धनी महादेव शिव की नगरी औऱ सर्व विद्या की राजधानी काशी में 3 वर्ष की बालिका ने जब पहली बार गुनगुनाया तो किसी को अनुमान भी नहीं होगा कि यह नन्ही-सी बच्ची अपनी मीठी आवाज़ से बड़े-बड़े गायकों को दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर करेगी। वही बच्ची बढ़ती उम्र के साथ आज भजन गायिका अंशिका सिंह के रूप में मंच से लोगों को प्रभु प्रेम के रस से सराबोर कर रही है।
अंशिका सिंह भी ऐसी ही एक कलाकार हैं, जिनकी यात्रा सुरों के साथ महज शौक़ से नहीं, बल्कि आत्मा से जुड़ी हुई है। अंशिका का यह सफर छोटा नहीं था। उनकी आवाज़ में कुछ ऐसा जादू था कि धीरे-धीरे उन्हें बड़े मंचों पर बुलाया जाने लगा। प्रतिष्ठित मंचों पर उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन किया और संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया। अंशिका अब तक 500 से अधिक स्टेज शो कर चुकी थीं। उनकी गायकी में शास्त्रीय संगीत की गहराई, बॉलीवुड की रवानगी, सूफी संगीत की रूहानियत और लोक संगीत की मिठास है। अंशिका का सफर यहीं नहीं रुका। दिग्गज कलाकारों के साथ मंच साझा करने का अवसर मिला उनकी आवाज़ इतनी प्रभावशाली थी कि उन्हें पद्मश्री अनुप जलोटा जी, पद्मश्री मालिनी अवस्थी जी, नरेंद्र चंचल , कुमार विशु और रवि किशन जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ मंच साझा करने का अवसर मिला। यह किसी भी युवा कलाकार के लिए एक सपने जैसा था, लेकिन अंशिका ने इसे अपनी मेहनत और काबिलियत से सच कर दिखाया।
पद्मश्री अनूप जलोटा और विदुषी सुचरिता दास गुप्ता की शिष्या के रूप में उन्होंने अपनी कला को और निखारा।