लखनऊ नगर निगम में काम करने वाली कार्यदाई संस्थाओं ने 5 हजार कर्मचारियों का पीएफ और ईएसआईसी (ESI) जमा करने के नाम पर घोटाला किया। पिछले साल कैग रिपोर्ट के बाद विधानसभा की स्थानीय निकायों की जांच समिति में इसका खुलासा हुआ है। इसमें पता चला कि कंपनियों ने वित्तीय वर्ष 2013-14, 2014-15 में ईपीएफ और ईएसआईसी का चालान नहीं जमा किया। कुल 8 कंपनियों के नाम सामने आए थे, जिसमें कुल 1 करोड़ 14 लाख रुपए डकराने की बात सामने आई। मामले में कार्यदायी संस्थाओं पर रिकवरी को लेकर अपनी रिपोर्ट में पैरवी की थी, लेकिन नगर निगम का दावा है कि लॉयन सिक्योरिटी और उससे जुड़ी कंपनी ने बाद में अपने हिस्से की रकम विभाग में जमा करवा दी थी। शेष 5 कंपनियों ने अब भी चालान नहीं जमा किया। नगर स्वास्थ्य अधिकारी (एनएसए) डॉ पीके श्रीवास्तव की ओर से हजरतगंज कोतवाली में FIR दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है। शिकायत में पांचों कंपनियों के नाम और कुल 64 लाख रुपए की रकम की रिकवरी करवाने के लिए शिकायत दी गई है। नगर निगम दर्ज कराएगा मुकदमा नगर निगम ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि मेसर्स राज श्री पर 17,88,960 रुपए का चालान जमा करना था। कर्मचारी भविष्य निधि आयुक्त की तरफ से ईपीएफ न जमा करने पर 1 लाख 54 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। इसमें संस्था की तरफ से जमा किए गए चालान की जानकारी 2020-24 के बीच की दी गई। 2013-24 के बीच के चालान जमा करने की कोई जानकारी नहीं दी गई। मेसर्स स्वच्छकार इंटरप्राइजेज को 14,31,168 रुपए का चालान जमा करना था, लेकिन नगर निगम की तरफ से कई बार नोटिस भेजने के बाद भी कोई जानकारी नहीं दी गई है। मेसर्स पटवा एसोसिएट को 3,57,792 रुपए का चालान जमा करना था। वर्तमान में यह कार्यदाई संस्था नगर निगम में काम नहीं कर रही, लेकिन संस्था की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी गई कि चालान क्यों नहीं जमा किया गया। ड्रेगन सिक्योरिटी को 25,04,544 का चालान जमा करना था, लेकिन संस्था की तरफ से अभी तक कोई चालान नहीं जमा किया गया। आर्यन सिक्योरिटी को 10,73,376 रुपए का चालान जमा करना था,लेकिन स्पीड पोस्ट के साथ में पत्र भेजने के बाद भी संस्था की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। लॉयन सिक्योरिटी का नाम हुआ बाहर कर्मचारियों के करोड़ों रुपए गबन के आरोप में नगर निगम ने पांच कंपनियों के खिलाफ तहरीर दी है। लेकिन आरोप है कि लॉयन सिक्योरिटी व उससे जुड़ी फर्मों के नाम को तहरीर से बाहर कर दिया है। इसे लेकर अफसर तर्क दे रहे हैं कि संबंधित फर्म ने गबन किए सभी रकम को नगर निगम को चालान के रूप में वापस जमा कर दिया है। इसीलिए कंपनी के खिलाफ तहरीर नहीं दी गई है। लेकिन सवाल उठ रहा है कि कंपनी का फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बाद भी उसे ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया गया। बजाए इसके कंपनी को शहर के प्रमुख तीन जोन में कूड़ा उठान और रोड स्वीपिंग का जिम्मा सौंप दिया। ऐसे में कंपनी को बचाने का आरोप लग रहा है। इन तीन कंपनियों के नाम बाहर लॉयन सिक्योरिटी (25,04,544 लाख रुपए का चालान), शार्क अटैकिंग सर्विस (10,73,376 लाख रुपए का चालान) और ईगल हटिंग (28,62,336 लाख रुपए का चालान) के नाम बाहर कर दिए गए।