लखनऊ में शुक्रवार को “कानूनी सहायता के माध्यम से प्रजनन स्वायत्तता में बाधाओं को दूर करना” विषय पर एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन हुआ। उद्घाटन सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने किया। इस दौरान न्यायाधीशों, विशेषज्ञों और अधिकारियों ने महिला अधिकार, प्रजनन स्वायत्तता और न्याय तक पहुँच के डिजिटल सशक्तिकरण पर विस्तार से विचार रखे। न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (JTRI), उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UPSLSA) ने कार्यक्रम का आयोजन किया। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने कहा- हर महिला को यह विश्वास होना चाहिए कि न्याय व्यवस्था उसके साथ दृढ़ता से खड़ी है। प्रत्येक नागरिक को न्याय तक पहुँच सुनिश्चित करें उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 39(A) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राज्य का कर्तव्य है कि वह प्रत्येक नागरिक को न्याय तक पहुँच सुनिश्चित करें। चाहे उसकी सामाजिक या आर्थिक स्थिति कुछ भी हो। इस अवसर पर न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने ‘न्याय मार्ग’ एआई चैटबॉट का शुभारंभ भी किया। उन्होंने कहा कि यह डिजिटल पहल विधिक सहायता को और अधिक सुलभ बनाएगी तथा लाभार्थियों और अधिकारों के बीच की दूरी को कम करेगी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने अपने संबोधन में डॉ. भीमराव अंबेडकर की उक्ति उद्धृत करते हुए कहा- किसी समाज की प्रगति उसकी महिलाओं की स्थिति से मापी जाती है।
उन्होंने ‘संकल्प कार्यक्रम’ जैसे प्रयासों की सराहना की, जो महिलाओं के अधिकार, प्रजनन स्वायत्तता और सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देने में सहायक हैं। “न्याय केवल निर्णयों में नहीं, संवेदनाओं में भी निहित है” इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने कहा- यह कार्यक्रम और ‘न्याय मार्ग’ चैटबॉट न्याय तक पहुंच सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।
वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने कहा कि डिजिटल माध्यमों से विधिक सहायता अधिक प्रभावी और जनसुलभ हो रही है।
वहीं न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि “बलात्कार पीड़िताओं को न केवल शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ता है, बल्कि सामाजिक कलंक और भावनात्मक तनाव से भी जूझना पड़ता है। न्याय केवल निर्णयों में नहीं, संवेदनाओं में भी निहित होता है।” विशेषज्ञों ने रखे विचार, NIMHANS और NHM ने साझा किए अनुभव तकनीकी सत्र की अध्यक्षता न्यायमूर्ति अजय भानोट, अध्यक्ष, उच्च न्यायालय किशोर न्याय समिति ने की। सत्र में NIMHANS, NHM, AALI और वात्सल्या संस्थानों के विशेषज्ञों ने अनिच्छित मातृत्व, मानसिक स्वास्थ्य, पुलिस-चिकित्सा-न्यायालय समन्वय और MTP अधिनियम के विधिक पहलुओं पर अपने विचार रखे।
चर्चाएँ इस बात पर केंद्रित रहीं कि कैसे चिकित्सीय सहायता की समयबद्धता और कानूनी सहयोग के माध्यम से महिलाओं की प्रजनन स्वायत्तता को सशक्त किया जा सकता है। “स्पंदन” सभागार का लोकार्पण, नई तकनीक से सुसज्जित सुविधा इसी अवसर पर न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने UPSLSA के नवनिर्मित सभागार “स्पंदन” का उद्घाटन किया। यह अत्याधुनिक सुविधा प्रशिक्षण, सम्मेलन और जन-जागरूकता अभियानों के लिए विकसित की गई है।
समापन सत्र में डॉ. मनु कालिया, सदस्य सचिव, UPSLSA ने सभी न्यायमूर्तियों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।