बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे की वजह UGC का नया कानून और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई बताई है। सोमवार शाम करीब साढ़े 7 बजे सिटी मजिस्ट्रेट डीएम अविनाश सिंह से मिलने उनके आवास पहुंचे। बाहर आने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने अपनी जान को खतरा बताया। उन्होंने कहा- मुझे डीएम आवास में बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान लखनऊ से कॉल आया। गालियां देते हुए कहा- साला पंडित पागल हो गया है, इसे रात भर आवास में बंधक बनाकर रखो और जाने मत देना। बार एसोसिएशन सचिव को दूसरे कमरे में बैठा दिया गया
सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने कहा- जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने मुझे बातचीत के लिए बुलाया था। जिले के मुखिया और अभिभावक मानते हुए मैं वहां पहुंचा। कुछ देर बाद एसएसपी अनुराग आर्य भी वहां आ गए। इस दौरान मेरे साथ बार एसोसिएशन बरेली के सचिव दीपक पांडे मौजूद थे, लेकिन उन्हें जबरन दूसरे कमरे में बैठा दिया गया। इसके बाद मुझसे कहा गया कि मैं 3-4 दिन की छुट्टी लेकर आराम करूं और मीडिया में बयान जारी कर दूं कि मैंने डिजिटलाइजेशन (SIR) के काम के अत्यधिक दबाव और मानसिक तनाव के कारण इस्तीफा दिया है। इस पर मैंने स्पष्ट रूप से कहा कि SIR का काम काफी पहले ही पूरा हो चुका है। वर्तमान में केवल नोटिस की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में मानसिक तनाव का हवाला देना पूरी तरह निराधार है। यह एक सुनियोजित साजिश है, ताकि मेरे इस्तीफे की असली वजह सामने न आ सके। पंडित पागल हो गया है, इसे रात भर बंधक बनाकर रखो
अलंकार अग्निहोत्री ने आगे बताया- बातचीत के दौरान जिलाधिकारी के पास लखनऊ से एक फोन आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने मेरे लिए बेहद आपत्तिजनक और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उसने कहा- साला पंडित पागल हो गया है, इसे रात भर आवास में बंधक बनाकर रखो और जाने मत देना।’ यह सुनते ही मुझे अपनी जान को गंभीर खतरा महसूस हुआ। इसके बाद मैंने किसी तरह हिम्मत जुटाकर अपने मोबाइल फोन से बगल के कमरे में मौजूद बार एसोसिएशन बरेली के सचिव दीपक पांडे को कॉल कर पूरी स्थिति से अवगत कराया। जैसे ही इस मामले की जानकारी मीडिया तक पहुंची, उसके बाद ही मुझे वहां से जाने दिया गया। मैं वहां से किसी तरह अपनी जान बचाकर निकला हूं। यदि थोड़ी भी देर हो जाती, तो मेरे साथ कोई भी अनहोनी हो सकती थी। अलंकार अग्निहोत्री ने सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने कहा- जिले के शीर्ष अधिकारी ही इस तरह का व्यवहार करें, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद किससे करे। डर और असुरक्षा के चलते मैंने तुरंत सरकारी आवास खाली करने और अपना सामान पैक करने का फैसला लिया है। अग्निहोत्री ने यह भी मांग की कि जिलाधिकारी के फोन कॉल रिकॉर्ड की जांच की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि लखनऊ से 20-25 मिनट पहले किसका फोन आया था। सिटी मजिस्ट्रेट ने अंत में भावुक होते हुए कहा-मैंने यह कदम पूरी सोच-समझ और अपने विवेक से उठाया है। अब मैं समाज के गणमान्य लोगों और बार एसोसिएशन के साथ मिलकर कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई लड़ूंगा।