“बेटा, बाइक पर जगह नहीं है… तुम यहीं रुको। लौटते वक्त तुम्हारे लिए चॉकलेट लाऊंगा।” इसी वादे के साथ शाहजहांपुर के सेठपाल अपनी 8 साल की बेटी को घर छोड़कर निकले थे। पत्नी और दो बच्चों के साथ बाइक से साढ़ू के घर जाने के लिए निकले सेठपाल को क्या पता था कि यह छोटा-सा वादा कभी पूरा नहीं हो पाएगा। साढू हरिओम की पत्नी आठ महीने की गर्भवती है। घर में नए सदस्य के स्वागत की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन एक पल में उसके भी सारे सपने बिखर गए। दरअसल, बुधवार शाम शाहजहांपुर में सेठपाल, उनकी पत्नी, दोनों बच्चे और साढ़ू हरिओम ट्रेन की चपेट में आ गए थे। सभी लोग बुध बाजार से खरीदारी कर लौट रहे थे। पल भर में पांच जिंदगियां खामोश हो गईं। हादसे के बाद ट्रैक पर कुछ मीटर के दायरे में कटे हुए हाथ-पैर और सिर बिखरे पड़े थे। बाइक ट्रेन में फंसकर करीब 500 मीटर तक घिसटती चली गई। सूचना मिलते ही रेलवे और कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। शवों के टुकड़ों को पॉलिथीन में समेटकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। गुरुवार को पति-पत्नी, दो बच्चों और साढ़ू हरिओम का अंतिम संस्कार किया जाएगा। 8 साल की परी पिता की राह देख रही सेठपाल, शाहजहांपुर के निगोही थाना क्षेत्र के बिकन्ना गांव का रहने वाला था। बुधवार को लखीमपुर के रहने वाले साढू हरिओम ने सेठपाल को फोन कर कहा- पूजा और बच्चों के साथ घर आ जाओ। सेठपाल अपनी पत्नी पूजा, बेटी निधि और बेटे सूर्यांश के साथ वहां पहुंच गया। सेठपाल ने अपनी आठ वर्षीय बेटी परी को घर पर ही छोड़ दिया था क्योंकि बाइक पर बैठने की जगह नहीं थी। उन्होंने बेटी से कहा था कि लौटते समय उसके लिए चॉकलेट ले आएंगे, जिस पर वह मान गई। साढू के घर पहुंचने के बाद शाम को सभी बुध बाजार गए। खरीदारी के बाद शाम करीब छह बजे हरिओम अपनी बाइक से साढ़ू सेठपाल, उनकी पत्नी पूजा और उनके दो बच्चों को लेकर लखीमपुर स्थित अपने घर वापस लौट रहा था। बाइक हरिओम चला रहा था। बाइक पर सेठपाल, उनकी पत्नी पूजा और 2 बच्चे सूर्या (4) और निधि (5) और साढू हरिओम सवार थे। वे रेलवे लाइन पार कर रहे थे। तभी तेज रफ्तार गरीब रथ ट्रेन की चपेट में आ गए। हादसे में पांचों के चीथड़े उड़ गए। ट्रैक पर कुछ मीटर के दायरे में केवल कटे हुए हाथ-पैर और सिर पड़े थे। हर जगह खून ही खून दिख रहा था। जबकि बाइक ट्रेन में फंसकर 500 मीटर तक घिसटती चली गई। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे और कई थानों की पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। शवों के टुकड़ों को पॉलिथीन में पैक करके पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। हादसे की जानकारी मिलते ही सीएमओ और एडीएम एफआर अरविंद कुमार पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे। साढू की पत्नी 8 महीने की गर्भवती हरिओम अपने पिता लालाराम सैनी और मां माया सैनी के साथ रोजा थाना क्षेत्र के मठिया कॉलोनी स्थित एक किराए के मकान में रहता था। मां माया सैनी एक नमकीन फैक्ट्री में काम करती हैं। हरिओम की पत्नी 8 माह की गर्भवती है। परिवार में बहुत जल्द खुशी आने वाली थी। हरिओम भी मजदूरी करता था। उसकी शादी चार साल पहले हुई थी। हरिओम का एक भाई दीपक था, जिसकी वर्ष 2009 में चक भिटारा के पास सड़क हादसे में मौत हो गई थी। चार भाइयों में दूसरे नंबर पर था सेठपाल सेठपाल भी मजदूरी करता था। सेठपाल के चार भाई हैं। शेर बहादुर, ब्रह्मपाल, सुमित और एक सेठपाल खुद है। दो बहनें सुनीता व पिंकी हैं। उनके माता-पिता लल्ली और बाबूराम हैं। सेठपाल चार भाइयों में दूसरे नंबर के था। पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। भाई ब्रह्मपाल ने बताया कि सेठपाल ने घर से निकलते समय कहा था कि वह शाम को हरिओम के साथ जाएंगे और गुरुवार को वापस लौट आएंगे। एक ही चिता पर पति-पत्नी का अंतिम संस्कार गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद सभी शव गांव लाए गए। गांव में मातम का माहौल रहा। परिजनों और ग्रामीणों की आंखें नम थीं। सेठपाल और उनकी पत्नी पूजा के शवों को एक ही चिता पर रखा गया। सेठपाल के बड़े भाई शेर बहादुर ने दोनों को मुखाग्नि दी। वहीं, सेठपाल के 4 साल के बेटे सूर्यांश और 5 साल की बेटी निधि को श्मशान घाट में ही दफनाया गया। ————————————————- ये खबर भी पढ़ेंः – कानपुर में 3 पुलिसवालों को रौंदकर 120Km स्पीड से भागे:कार पर नंबर प्लेट नहीं, 7.5km तक ट्रेस हुए बदमाश, फिर लापता कानपुर में गंगा बैराज पर 3 पुलिसवालों को रौंदने वाली कार को पुलिस सिर्फ 7.5Km तक ट्रेस कर सकी। कोठारी चौराहा (बिठूर) तक कार CCTV में दिखी, उसके बाद गायब हो गई। पुलिस के मुताबिक, यहां से कार सिर्फ 3 रूट पर जा सकती है। पहला- कल्याणपुर की तरफ। दूसरा- बिठूर के अंदर। तीसरा- मंधना की तरफ। इस रूट से बदमाश कन्नौज होकर झांसी या औरेया की तरफ जा सकते हैं, या लखनऊ की तरफ भी भागकर आ सकते हैं। पढ़ें पूरी खबर…