पूर्व विधायक दीपनारायण यादव ने किया सरेंडर:झांसी में डकैती केस में 27 दिन से फरार थे, पुलिस को चकमा देकर पहुंचे कोर्ट

झांसी में सपा के पूर्व विधायक दीपनारायण यादव ने गुरुवार सुबह कोर्ट में सरेंडर कर दिया। वह डकैती एवं रंगदारी के एक केस में 27 दिन से फरार थे। पुलिस उनको गिरफ्तार करने के लिए सख्त पहरा लगाए थी। लेकिन उसे भनक तक नहीं लगी। पुलिस कुछ जान पाती, इसके पहले उन्होंने कोर्ट खुलते ही जज के सामने सरेंडर कर दिया। वकीलों ने बताया- कोर्ट खुलने से पहले ही सुबह लगभग 9:45 बजे पूर्व विधायक बुलेट बाइक से कोर्ट पहुंचे। वे हेलमेट और मुंह पर मास्क लगाए थे। तब पुलिस का इतना सख्त पहरा नहीं था। यहां पहुंचते ही वकीलों ने उनको घेर लिया और सीधे अपर सत्र न्यायाधीश एवं एमपी एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश जितेंद्र यादव की कोर्ट में ले गए। यहां उनके वकील जाहिद मंसूरी और मनीष यादव ने सरेंडर की अर्जी दाखिल की। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर ली। दोपहर लगभग दो बजे कोर्ट ने पूर्व विधायक दीपनारायण यादव को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद उनको जेल भेज दिया। आरोपों पर पूर्व विधायक दीपनारायण यादव ने कहा- आप खुद जांच कर लीजिए, सब पता चल जाएगा। मीडियाकर्मियों के सवालों का जबाव देना शुरू ही किया था कि पुलिस उनको धक्का देते हुए ले गई और गाड़ी में बैठाकर जेल छोड़ आई। अब पूरा मामला विस्तार से पढ़िए
27 दिन पहले दर्ज हुआ था केस
20 नवंबर को भुजौंद गांव निवासी प्रेम सिंह पालीवाल ने मोंठ थाने में डकैती एवं रंगदारी मांगने के आरोप में सपा के पूर्व विधायक दीप नारायण एवं अखाड़ापुरा निवासी अनिल यादव व 3 के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 12 दिसंबर को 25 हजार के इनामी अनिल यादव ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। पूर्व विधायक के सामने न आने पर पुलिस ने उनके करीबियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। अकाउंटेंट अशोक गोस्वामी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। फिर पूर्व विधायक के जमानतदार ऋषि यादव को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। 13 दिसंबर को पूर्व विधायक दीपनारायण यादव की 20 करोड़ की प्रॉपर्टी भी कुर्क की गई थी। लगातार पुलिस शिकंजा कस रही थी। 15 दिसंबर को सरेंडर करने नहीं आए
पूर्व विधायक दीपनारायण यादव ने कोर्ट में आत्म समर्पण की अर्जी प्रस्तुत की है। 15 दिसंबर को उनको कोर्ट में सरेंडर करना था। मगर पुलिस का कड़ा पहरा होने से पूर्व विधायक नहीं आए। अगली तारीख 20 दिसंबर लगी थी।
पूर्व विधायक के वकील मनीष यादव ने बताया- पुलिस ने वांछित आख्या कोर्ट में पेश कर दी थी कि दीपनारायण यादव पर केस दर्ज है और वो वांछित है। गुरुवार सुबह दीपनारायण यादव के आत्म समर्पण करने का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। उनको 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। उन पर बीएनएस की धारा 310(2), 126(2), 308(5), 119(1), 352, 351(3), 317(3) में केस दर्ज है। पूर्व विधायक की 20 करोड़ की प्रॉपर्टी कुर्क
पूर्व विधायक के खिलाफ डीएम ने गैंगस्टर एक्ट में कुर्की के आदेश दिए थे।। 13 दिसंबर को पुलिस ने दीपनारायण यादव की 20 करोड़ रुपए की 3 प्रॉपर्टी कुर्क की थी। इसमें कुरगुआंजी स्थित प्लाट, भगवंतपुरा में मून सिटी की जमीन और बनगुआ गांव की जमीनें शामिल हैं। दो दिन पहले उनके मकान पर कुर्की का नोटिस चस्पा किया गया था। पुलिस ने सुबह करीबियों को उठाया था
बताया जा रहा है कि पुलिस ने गुरुवार सुबह दबिश देकर पूर्व विधायक करीबियों को उठा लिया था। इधर पूर्व विधायक ने पुलिस को चमका देकर अचानक सरेंडर कर दिया। इसके बाद सीओ रामवीर सिंह नवाबाद थाना, सीपरी बाजार थाना, सदर बाजार थाना, प्रेमनगर थाना और कोतवाली की फोर्स लेकर कोर्ट पहुंच गए। बाद में मोंठ थाना प्रभारी राजेश पाल भी आ गए। कड़ी सुरक्षा में पूर्व विधायक को जेल ले जाया गया। दीपनारायण पर दर्ज हैं 63 मुकदमें
दीपनारायण यादव, समाजवादी पार्टी की टिकट पर गरौठा विधानसभा से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। उन पर करीब 65 मुकदमें दर्ज हैं। ढाई साल पहले ही जेल से छूटे थे
पूर्व विधायक दीपनारायण यादव ढाई साल पहले ही जेल से रिहा हुए थे। उनके खिलाफ 16 सितंबर 22 को झांसी कोर्ट में पेशी पर आए कुख्यात अपराधी लेखराज यादव को पुलिस कस्टडी से छुड़ाने की कोशिश का आरोप था। पुलिस ने 26 सितंबर 2022 को उन्हें अरेस्ट कर जेल भेज दिया था। 3 महीने के दरिम्यान पूर्व विधायक पर 7 केस दर्ज हुए थे। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद पूर्व विधायक दीपनारायण यादव जेल से रिहा हो गए थे। अब दोबारा उनको जेल जाना पड़ा है। ……………………. ये खबर भी पढ़िए- गोरखपुर में प्रिंसिपल और रसोइया के बीच मारपीट: एक-दूसरे को जमीन पर घसीटा, मिड-डे मील में कीड़े मिलने पर भड़का विवाद गोरखपुर जिले के खजनी क्षेत्र अंतर्गत उसवा बाबू स्थित एक उच्च माध्यमिक विद्यालय से जुड़ा मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय में मिड-डे मील को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते ‘अखाड़े’ में बदल गया। रसोइया और स्कूल की प्रिंसिपल के बीच जमकर मारपीट हुआ। पढ़ें पूरी खबर…