प्रतापगढ़ का गांजा तस्कर फिजिक्स का टीचर रहा:बोरियों में 2 करोड़ भरकर ले गई पुलिस, मां बोली- बड़े बेटे ने फंसा दिया

प्रतापगढ़ में जिस गांजा तस्कर के घर से पुलिस 2 करोड़ कैश बोरियों में भरकर ले गई। वह फिजिक्स का शानदार टीचर रहा। मानिकपुर में राजेश मिश्रा के घर से 11 बोरी नोट मिले। अलग-अलग कमरों में फैले नोट गिनने में पुलिस को 24 घंटे लगे थे। पुलिस राजेश की पत्नी, बेटा-बेटी के अलावा दो पड़ोसियों को भी अपने साथ ले गई। राजेश मिश्रा के घर में मां और राजेश का नाबालिग बेटा है। बाकी लोग फरार हैं। मां रामकली का कहना है- बड़े बेटे श्याम और उसके बेटे चिंटू ने राजेश को फंसा दिया। राजेश के यहां गांजा-स्मैक का धंधा बीते 50 सालों से चल रहा था। पहले पिता भी इसी धंधे में रहे। अब राजेश भी इसमें शामिल हो गया था। राजेश ने इस गलत काम को छिपाने के लिए कभी स्कूल में पढ़ाया तो कभी बेटे को हार्डवेयर की दुकान खुलवा दी। लेकिन फोकस हमेशा गांजा-स्मैक और ड्रग्स के धंधे पर ही रहा। गांजा तस्कर राजेश की कुंडली खंगालने के लिए दैनिक भास्कर टीम मानिकपुर पहुंची। यहां पड़ताल कर उसके अतीत को समझा। पुलिस की कार्रवाई को लेकर सच्चाई जानी। राजेश मिश्रा कैसे पुलिस के जाल में फंस गया, पढ़िए रिपोर्ट… राजेश के बेटे ने कालोनी दिलाने के नाम पर पड़ोसी को फंसाया प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय से 75 किमी दूर लखनऊ-प्रयागराज हाईवे पर गढ़ी मानिकपुर कस्बा पड़ता है। यहीं से सटा गांव है मुंदीपुर। यह गांव नशाखोरी के लिए इलाके में बदनाम है। यहीं राजेश मिश्रा का घर है। इसकी बनावट भी अजीब है। मकान आगे दो मंजिला है, जो पीछे तीन मंजिला हो जाता है। राजेश का पूरा परिवार पीछे वाले मकान में ही रहता था। घर में हर तरफ सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है। राजेश के ही घर से 50 मीटर दूर राजेंद्र मौर्य उर्फ मुन्ना का घर है। मुन्ना की वजह से राजेश पर कार्रवाई शुरू हुई। एक ही गली में मुन्ना और राजेश का घर हम राजेश का घर पूछते हुए उसकी गली में पहुंचे। उसी गली में मुन्ना का भी कच्चा घर है। मुन्ना दिल्ली में रिक्शा चलाते हैं। आज से कुछ महीने पहले राजेश मिश्रा के बेटे ने मुन्ना से उनका आधार कार्ड, पैन कार्ड और खतौनी के पेपर लिए थे। कहा था कि तुमको कॉलोनी (मकान) दिलवाई जाएगी। लेकिन इस कागज का इस्तेमाल जेल में बंद राजेश मिश्रा की जमानत में किया गया। कोर्ट में दाखिल करने के बाद वेरिफिकेशन के लिए पेपर मानिकपुर थाने पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने मुन्ना को पूछताछ के लिए बुलाया। सच्चाई जानते ही मुन्ना चौक गए। उन्होंने कहा कि हमने तो ये कागज जमानत के लिए दिए ही नहीं थे। दूसरी बात यह कि कागज पर जो दस्तखत है, वह भी मेरा नहीं है। पुलिस को कमरे में हर तरफ नोट ही नोट दिखे इसके बाद मुन्ना के कागज लेकर पुलिस 7 नवंबर को राजेश के घर पहुंची। बेल बजाई लेकिन कोई नहीं निकला। सभी ऊपर थे। पुलिस घर के अंदर दाखिल होकर ऊपर तक पहुंच गई। वहां, कमरे में देखा तो हर तरफ नोट ही नोट फैले हुए थे। पुलिसकर्मी यह देखकर हैरान रह गए। पुलिस से सूचना मिलते ही एसपी, कुंडा सीओ, आबकारी विभाग के अफसर सात नवंबर की रात राजेश के घर पहुंचे। फोर्स ने चारो ओर से उसके घर को घेर लिया। किसी को भी बाहर नहीं निकलने दिया गया। अगले दिन सुबह भारी पुलिस फोर्स पहुंचा। इसके बाद घर में मौजूद सभी सदस्यों को नीचे एक कमरे में बैठा दिया। नोट गिनते-गिनते थकी पुलिस, मशीन मंगानी पड़ी 4 गाड़ियों से पहुंचे 22 पुलिसकर्मियों ने जांच शुरू की। राजेश मिश्रा के घर की पहली मंजिल के तीन कमरों में रुपए बोरी, पन्नी, झोले में ऐसे ही फैले मिले। नोट गड्डियों में नहीं थे। पुलिस ने रुपए इकट्ठा करने शुरू किए तो 500, 200, 100 के साथ 50, 20, 10 के नोटों की भरमार मिली। पुलिसकर्मी नोट गिनते-गिनते कुछ ही घंटों में थक गए। इसके बाद पुलिस ने नोट गिनने की मशीन मंगाई। ये कार्रवाई 24 घंटे तक चली। नोटों की गिनती पूरी हुई तो पुलिस ने बताया कि कुल कैश करीब 2 करोड़ था। इन नोटों की गड्डियां बनाकर पुलिस ने 11 बोरियों में भरा और उसे अपने साथ ले गई। नोटों के साथ पुलिस ने राजेश मिश्रा की मां रीना मिश्रा, 20 साल की बेटी कोमल, 19 साल के बेटे विनायक और पड़ोसी अजीत व यश को गिरफ्तार किया। घर से पुलिस को नोटों के अलावा 6 किलो गांजा और 577 ग्राम स्मैक मिली है। इन दोनों मादक पदार्थों की मार्केट कीमत इस वक्त करीब 15 लाख रुपए है। मां बोली- बड़े बेटे व भतीजे ने राजेश को फंसाया इस वक्त राजेश मिश्रा के घर में उसकी मां रामकली और छोटा बेटा सूर्यांश ही हैं। रामकली इलाके में अम्मा के नाम से मशहूर हैं। कहा जाता है कि घर से जो व्यापार चलता था उसे अम्मा ही संचालित करती थीं। घर में इतना सबकुछ मिलने के बाद रामकली कहती हैं, हमारे पोता-पोती को फंसा दिए। वह तो कभी गांजा-स्मैक को हाथ भी नहीं लगाया। बेटा 12वीं में पढ़ता था, बिटिया बीएससी कर रही थी, दोनों का जीवन बर्बाद हो गया। अब बिटिया की शादी कैसे होगी। रामकली कहती हैं, मेरा बड़ा बेटा श्याम जी और उसके बेटे चिंटू ने ही मिलकर हमारा पूरा नाश किया है। इन लोगों ने ही पुलिस को सूचना दी थी, जिसकी वजह से सब पकड़े गए हैं। पुलिस जितना पैसा दिखा रही है, वह सब हमारा नहीं है, उसमें आधा पैसा ही हमारा है। उन लोगों ने गहना भी निकाला था, कुछ तो हमें वापस कर दिया लेकिन और क्या बचा है, वह हमने अब तक देखा ही नहीं है। हमने कहा कि कितने वक्त से आपके घर से गांजा बेचा जा रहा? रामकली बोलीं- ‘बेटा राजेश ही यह सब करता था, हमको कुछ पता नहीं है। उसकी पत्नी रीना कभी नहीं बेचती थी। राजेश तो गांजा बेचने के चलते जेल चला गया था। जब से वह जेल गया तब से हमारे यहां कोई कुछ नहीं बेचता था। पुलिस भले मास्टरमाइंड बता रही हो, लेकिन हकीकत नहीं है यह सब।’ रामकली बार-बार अपने पोते-पोतियों के भविष्य की दुहाई देती रहीं। उनके नाम पर रोती रही। 80 के दशक में गुमटी चलाते थे राजेश के पिता राजेश मिश्रा के पिता रामजी 80 के दशक में मानिकपुर में ही अलीगंज चौराहे पर गुमटी चलाते थे। बाद में वह भांग की लाइसेंसी दुकान चलाने लगे। इसी दुकान में अवैध रूप से गांजा बेचते थे। इसमें कमाई अच्छी थी, इसलिए नेटवर्क बढ़ाते चले गए। राजेश के अलावा रामजी के तीन बेटे और हैं, श्यामजी, गणेश और कृष्ण कुमार। ये सभी इस धंधे में कूद गए। आज से करीब 15 साल पहले रामजी की मौत हो गई, इसके बाद परिवार बिखर गया। धंधे के चलते सभी एक दूसरे से मतलब नहीं रखते थे। गांजे की तस्करी के लिए कई जिलों में बनाया नेटवर्क राजेश ने गांजा व ड्रग्स के धंधे को बहुत स्मार्ट तरीके से किया। उसने अलग-अलग जिलों में अपना नेटवर्क बनाया। वहां सप्लाई शुरू की। दो महीने पहले राजेश के यहां से माल लेने उन्नाव और आजमगढ़ के 5 तस्कर एक कार से पहुंचे थे। कार में आगे डॉक्टर का लोगो, पीछे प्रेस और साइड में एडवोकेट का लोगो लगा था। इन लोगों ने राजेश के घर से माल लिया लेकिन पुलिस को भनक लग गई। पुलिस ने राजेश के घर पर दबिश दे दी। राजेश तो भाग गया लेकिन बाकी 5 पकड़े गए। इनके पास से 36 ग्राम स्मैक, 16 ग्राम चरस व 7 किलो गांजा मिला था। इसी मामले में बाद में राजेश ने कोर्ट में सरेंडर किया। वहां से उसे जेल भेज दिया गया। फिजिक्स का बेहतरीन टीचर था राजेष हमने आसपास के लोगों से राजेश के बारे में बातचीत की। पड़ोस ही रहने वाले अर्जुन प्रसाद मिश्रा कहते हैं, राजेश पढ़ने में बहुत अव्वल था। बाद में उसने मानिकपुर GGIC में पढ़ाना शुरू किया। टॉप का फिजिक्स टीचर था। लेकिन इसके बावजूद वह गांजा बेचता था। उसके चारों भाई यही काम करते थे। थाना तो नजदीक ही है। पुलिस भी सब जानती है। मुझे तो यही नहीं समझ आता कि आखिर इसे रोका क्यों नहीं जाता था। क्या इसने थाना खरीद रखा है। अगर थानेदार पैसा नहीं खाते तो ये कैसे बेच पाता। पुलिस भी पहले मिली थी, इसलिए ऐसा हुआ। राजेश के बारे में स्थानीय लोग कैमरे के सामने बोलने से बचते हैं। वह बताते हैं, इसकी तस्करी का मुख्य अड्डा तो यही घर रहा है, लेकिन डिलीवरी का अड्डा लगातार बदलता रहा है। घर पर इस काम को राजेश की मां रामकली यानी अम्मा देखती थी। बेटे-बेटियां भी अक्सर टहलने निकलते और ग्राहकों को पुड़िया पकड़ा देते थे। राजेश कभी किसी एक स्थान पर बिजनेस नहीं करता था, वह कभी ग्राहकों को रेलवे स्टेशन बुलाता तो कभी बड़ी बगिया में बुलाता। इससे पुलिस से पकड़े जाने की संभावना कम रहती थी। पिछले 5 साल में अकूत संपत्ति बनाई राजेश कोरोना काल से पहले स्कूल में पढ़ाता था, लेकिन एक बार गांजे के मामले में पकड़ा गया तो नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद उसने इस धंधे में पूरी ताकत झोंक दी। तब उसका धंधा उफान पर था, इलाके के सोनार बताते हैं कि उस वक्त राजेश ने सोने में अपना पैसा निवेश किया था। इसके अलावा राजेश ने घर से ही 100 मीटर दूर एक तीन मंजिला आलीशान मकान बनवाया है। एक मकान घर से करीब 1 किलोमीटर दूर जीजीआईसी के पास है, वह भी तीन मंजिला है। तीनों मकान की ही अगर कीमत देखी जाए तो 3 करोड़ रुपए से ज्यादा होती है। राजेश ने मानिकपुर में ही दो अन्य जगहों पर जमीन ले रखी है। पुलिस ने नवंबर महीने में राजेश के साथ उसकी पत्नी रीना के खिलाफ भी गैंगस्टर के तरह कार्रवाई शुरू की। गांव में बने दोनों ही तीन मंजिला मकान को कुर्क करके जब्त कर लिया गया। यहां सरकारी ताला लगा हुआ है। जीजीआईसी के पास जो मकान है उसमें राजेश ने हार्डवेयर की दुकान खोल रखी थी, वह सभी सामान ऐसे ही अंदर पड़े हैं। राजेश के परिवार में इस वक्त जो लोग भी हैं वह फरार हैं। राजेश के सबसे बड़े भाई श्यामजी हैं, उनके 5 बेटे भी इसी काम में लिप्त हैं। अभी सब फरार हैं। दूसरे भाई गणेश मिश्रा हैं, उसके बेटे पंकज और आकाश भी पहले पकड़े जा चुके हैं, अभी स्मैक देते हुए इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। तीसरा भाई कृष्ण कुमार है, यह खुद भी स्मैक का नशा करता है, कृष्ण के बेटे दीपक मिश्रा की लाला बाजार में लाइसेंसी भांग की दुकान है, वह भी गांजा बेचने के चक्कर में पकड़ा गया और अभी जेल में बंद है। इस मामले में प्रतापगढ़ पुलिस के अलावा अब लखनऊ के भी अफसर लग गए हैं। राजेश के करीबियों की लिस्ट तैयार हो रही है। राजेश और उसके भाई-भतीजों पर खास नजर है। इसके अतिरिक्त जो भी राजेश से जुड़े रहे, उन्हें भी खोजा जा रहा है। पुलिस राजेश के अन्य जगहों पर खरीदी गई जमीन व निवेश किए गए पैसों की भी पड़ताल कर रही है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… पुलिस ने हाथ-पैर तोड़े, 20 दिन से कोमा में युवक:इलाज में 12-15 लाख खर्च हुए; पिता बोले- पुलिसवालों को कड़ी सजा मिले दीपावली के अगले दिन 21 अक्टूबर को सिद्धार्थनगर में लोग मूर्ति विसर्जन करने जा रहे थे। कुछ झगड़ा हुआ। 4 पुलिसवालों ने एक युवक को बाइक पर बैठाया। उसे ले जाते हुए सीसीटीवी में कैद हुए। 14 मिनट उसके साथ रहे। एक घंटे के बाद वह युवक सड़क के किनारे बेहोशी की हालत में मिला। हाथ-पैर, सिर और जबड़ा टूटा हुआ था। सीएचसी ले गए, वहां डॉक्टरों ने जिला हॉस्पिटल रेफर किया। स्थिति गंभीर थी, इसलिए गोरखपुर भेजा गया। वहां भी डॉक्टर युवक की स्थिति देखकर हैरान थे। लखनऊ भेज दिया गया। पढ़ें पूरी खबर