प्रयागराज से देवघर तक गूंजा किन्नर अखाड़े का शंखनाद:बाबा नगरी में काल भैरव-बउचरा माता का भव्य महायज्ञ शुरू, कल शोभायात्रा

अध्यात्म की जननी प्रयागराज की धरती से वैश्विक पहचान बनाने वाले किन्नर अखाड़े ने अब बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर में सनातन धर्म की ध्वजा फहराई है। शनिवार को श्री मंगल मुखी धाम (बंधा पोखर) में ‘श्री श्री 108 काल भैरव और बउचरा माता मंदिर’ के तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ का भव्य शुभारंभ हुआ। यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि प्रयागराज की उस परंपरा का विस्तार है जहाँ किन्नर समाज को मुख्यधारा के धर्म और समाज से जोड़ा गया। ​प्रयागराज की परंपरा का देवघर में विस्तार ​प्रयागराज कुंभ से पूरी दुनिया को अपनी शक्ति का अहसास कराने वाले किन्नर अखाड़े की झारखंड प्रदेश अध्यक्ष, महामंडलेश्वर स्वामी राजेश्वरी नंद गिरि (रोज मौसी) के नेतृत्व में ऐतिहासिक कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा बंधा पोखरा बैजनाथपुर से शुरू होकर शिवगंगा पहुंची। डीजे पर बजते भजनों और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के बीच किन्नर संतों ने शिवगंगा के पवित्र जल से कलश भरे। ​प्रयागराज में अखाड़े की नींव रखने वाली आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने देवघर को लघु कुंभ के रंग में रंग दिया है। ​रविवार को होगा शाही नगर भ्रमण: रथ पर विराजेंगी माता बउचरा ​कार्यक्रम के आयोजक श्रीमहंत अजीतनंद गिरि ने बताया कि रविवार सुबह 8 बजे से भव्य ‘नगर भ्रमण’ (शोभायात्रा) का आयोजन होगा। इसका नेतृत्व स्वयं महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी करेंगी। शोभायात्रा में ​मुख्य आकर्षण रथ पर सवार भगवान अर्धनारीश्वर और माता बउचरा होंगी। ​लवाजमा बैंड-बाजे, ऊंट-घोड़े और वाहनों के विशाल काफिले के साथ किन्नर संत शहरवासियों को आशीर्वाद देंगे। ​यात्रा में स्वामी गायत्री नंद गिरि, पवित्रा नंद गिरि, चारुलता नंद गिरि, जगदंबा नंद गिरि वैष्णवी सहित जूना अखाड़ा के कई नागा संन्यासी शामिल होंगे। ​महायज्ञ का समापन 9 मार्च, सोमवार को पूर्णाहुति, विशाल संत सम्मेलन और महाप्रसाद वितरण के साथ होगा। इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि प्रयागराज से शुरू हुई यह आध्यात्मिक क्रांति अब पूरे भारत में सनातन संस्कृति को मजबूती प्रदान कर रही है। सनातन धर्म की मजबूती का संकल्प महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरि ने कहा कि जिस तरह प्रयागराज में किन्नर अखाड़े ने सनातन धर्म को नई ऊंचाई दी, उसी कड़ी में देवघर का यह मंदिर मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज लाखों लोग अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं, जिसका पूरा श्रेय स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के संघर्षों को जाता है।