बरेली में 300 घरों पर लाल निशान लगे, बुलडोजर चलेगा:डरे लोग बोले- हम कट्‌टर भाजपाई, फिर एक्शन क्यों?

बरेली में 300 से ज्यादा घरों पर बुलडोजर एक्शन की तैयारी है। नगर निगम ने पूरी बस्ती पर रेड क्रॉस (लाल निशान) लगा दिए हैं। अचानक हुई कार्रवाई से लोग दहशत में हैं। सालों से रह रहे लोग अब बेघर होने के डर से सो नहीं पा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से तानाशाही है और बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के उनके सपनों के आशियाने पर निशान लगा दिए गए हैं। वो तो कट्टर भाजपाई हैं फिर उनके आशियानों पर बुलडोजर क्यों चलने जा रहा है। लोग अपना घर बचाने की गुहार लगा रहे हैं। मामला सीबीगंज थाना क्षेत्र के खलीलपुर रोड का है। दरअसल, खलीलपुर रोड पर बने ये मकान कोई दो-चार साल पुराने नहीं हैं। स्थानीय बुजुर्गों और निवासियों का दावा है कि उनकी यह बस्ती आजादी के पहले से आबाद है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोग यहां रहते आ रहे हैं और उनके पास मकानों के पुख्ता कागजात भी मौजूद हैं। इस बीच दैनिक भास्कर की टीम इलाके में पहुंची। लोगों से बात की। पूरा मामला समझा। पढ़िए विस्तार से… 5 तस्वीरों में देखिए लोगों की बेचैनी… 12 फिट की सड़क को 16 मीटर चौड़ा करने की योजना
नगर निगम की टीम की तरफ से तर्क दिया जा रहा है कि यहां 16 मीटर चौड़ी सड़क प्रस्तावित है, जिसके दायरे में ये 300 मकान आ रहे हैं। इस पर स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। स्थानीय निवासी केएस रावत ने बताया- आज तक इस रोड का कोई ऐसा नक्शा नहीं रहा। दस्तावेजों में यह रोड 12 से 16 फिट की है। निगम ने खुद यहां नाला बनाया और अब उस नाले के भी पार जाकर घरों को तोड़ने की बात कर रहे हैं। यह कोई एक्सप्रेसवे नहीं है, बल्कि गांव की एक सामान्य सड़क है। 16 मीटर चौड़ा रास्ता बनाने के चक्कर में पूरी बस्ती उजाड़ दी जाएगी। ‘अंदर सो रहे लोगों पर क्या घर गिरा देंगे?’
निगम की इस कार्रवाई में सबसे ज्यादा नाराजगी बिना किसी आधिकारिक नोटिस के निशान लगाने को लेकर है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि सरकारी काम का एक तय प्रोसेस होता है, लेकिन यहां नियमों को ताक पर रख दिया गया। एक निवासी अल्पा रावत ने भावुक होते हुए कहा- किसी के घर पर ऐसे आकर निशान कैसे लगाए जा सकते हैं? क्या अंदर बैठे लोगों पर घर गिरा देंगे? मेरी डिलीवरी के समय इस सड़क की हालत इतनी खराब थी कि मुझे पैदल चलना पड़ा। निगम को सड़क बनाने की चिंता नहीं है, लेकिन घर तोड़ने के लिए वे सबसे पहले पहुंच गए। खुद नाला बनाया और अब उसी जमीन को बताया अतिक्रमण
स्थानीय लोगों ने नगर निगम की घेराबंदी करते हुए कहा कि कुछ समय पहले ही निगम ने यहां नाला निर्माण कराया था। अगर यह जमीन अवैध थी या सड़क के दायरे में थी, तो नाला बनाते समय इसकी पैमाइश क्यों नहीं की गई? लोगों का कहना है कि निगम ने पहले करोड़ों खर्च कर नाला बनाया और अब कह रहे हैं कि 16 मीटर की रोड और निकलेगी। इसका मतलब है कि निगम अपना ही बनाया हुआ नाला भी तोड़ेगा और जनता के पैसे की बर्बादी करेगा। ‘हम भाजपा के कट्टर समर्थक, फिर हमारे ही घर पर बुलडोजर क्यों?’
इस विवाद में एक राजनीतिक पहलू भी सामने आया है। बस्ती के अधिकांश लोग खुद को सत्ताधारी दल भाजपा का समर्थक बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने योगी सरकार की नीतियों का हमेशा समर्थन किया, लेकिन अब उनके अपने ही घर उजाड़े जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि जब हमारे पास ए-टू-जेड कागजात हैं और हम दशकों से यहां टैक्स दे रहे हैं, तो फिर इसे अवैध कैसे ठहराया जा सकता है? लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। डेढ़ साल से टूटी सड़क की सुध नहीं, घर ढहाने की जल्दबाजी पर आक्रोश
खलीलपुर रोड की हालत पिछले डेढ़ साल से बदतर बनी हुई है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले दिसंबर से यहां सड़क का काम शुरू हुआ था, लेकिन आज तक वह पूरा नहीं हो सका। उबड़-खाबड़ रास्तों के कारण बुजुर्गों और मरीजों का निकलना दूभर है। स्थानीय युवाओं ने कहा, “डेढ़ साल से हमें गड्ढों में चलने को मजबूर किया गया, तब कोई अधिकारी देखने नहीं आया। अब जब सड़क बनाने की बारी आई, तो वे हमारे मकान तोड़ने पर आमादा हैं। हमें सड़क चाहिए, लेकिन अपनी छत की कीमत पर नहीं।” आंदोलन की चेतावनी: ‘जान दे देंगे, लेकिन आशियाना नहीं टूटने देंगे’
नगर निगम की इस कार्रवाई ने लोगों को एकजुट कर दिया है। बस्ती के लोगों ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर बुलडोजर को अपनी दहलीज के अंदर नहीं घुसने देंगे। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने जीवन भर की जमा-पूंजी इन मकानों में लगा दी है। यदि निगम ने जबरन कार्रवाई की, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे। फिलहाल, पूरी बस्ती में तनाव का माहौल है और लोग कानूनी लड़ाई लड़ने की भी तैयारी कर रहे हैं। विकास या विनाश?
बरेली के इस मामले ने एक बार फिर विकास और विस्थापन के बीच की बहस को छेड़ दिया है। जहां एक तरफ शहर को चौड़ी सड़कों की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर दशकों पुरानी बस्तियों को बिना किसी मुआवजे या ठोस योजना के उजाड़ना मानवाधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन प्रतीत होता है। अब देखना यह होगा कि नगर निगम जनता के इस भारी आक्रोश के बाद अपने कदम पीछे खींचता है या फिर बरेली में एक बार फिर बुलडोजर का शोर सुनाई देगा। ……………. पढ़ें ये भी जरूरी खबर… लद्दाख में 4 दिन लापता रहे आगरा के 4 दोस्त: रास्ता भटके, कार बर्फ में फिसलकर 20 फीट गहरी खाई में गिरी, 20km पैदल चले लद्दाख में 4 दिन पहले लापता हुए आगरा के चार दोस्तों की लोकेशन मिल गई है। चारों सुरक्षित हैं, और पुलिस के पास हैं। परिवार के लोग उन्हें लाने लद्दाख रवाना हुए हैं। उन्हें कल, बुधवार को वापस लाया जाएगा। लद्दाख पुलिस के अनुसार, चारों दोस्त 9 जनवरी की शाम लगभग 5:30 बजे कार से पैंगोंग झील से रवाना हुए थे। उसी दिन उन्होंने अपने परिजनों से बातचीत भी की थी। इसके बाद उनसे संपर्क टूट गया। अगले दिन जब कोई बात नहीं हुई तो परिवार ने पुलिस में मिसिंग कम्प्लेन की। पुलिस ने चारों को सुरक्षित खोज निकाला। पढ़ें पूरी खबर…