गोरखपुर में इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 को लेकर बिजली कर्मचारियों ने विरोध तेज कर दिया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने केंद्रीय विद्युत सचिव से जनवरी में स्टेकहोल्डर्स के साथ हुई बैठकों की कार्यवाही सार्वजनिक करने और बिल वापस लेने की मांग की है। समिति ने कहा कि प्रस्तावित बिल को लेकर बिजली कर्मचारियों, इंजीनियरों और उपभोक्ताओं में लगातार असंतोष बढ़ रहा है। उनका कहना है कि बिना व्यापक सहमति के बिल लागू करने से बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं के हित प्रभावित हो सकते हैं। दूसरे चरण में बिल लाने की आशंका संघर्ष समिति ने बताया कि संसद के बजट सत्र के पहले चरण में बिल पेश नहीं होने से राहत मिली है, लेकिन 9 मार्च से शुरू होने वाले दूसरे चरण में इसे लाने की आशंका बनी हुई है। ऐसा होने पर गोरखपुर समेत देशभर में विरोध तेज करने की तैयारी है। समिति के अनुसार केंद्रीय विद्युत सचिव की ओर से जनवरी में बिल के मसौदे पर विभिन्न पक्षों के साथ ऑनलाइन बैठकें आयोजित की गई थीं। 12 जनवरी को ट्रेड यूनियनों और राष्ट्रीय फेडरेशनों के साथ हुई बैठक में सभी संगठनों ने एक स्वर में बिल वापस लेने की मांग रखी थी। राष्ट्रीय और उपभोक्ता संगठनों ने भी जताई आपत्ति समिति ने कहा कि उपभोक्ता संगठनों, गैर सरकारी संस्थाओं और एमएसएमई संगठनों ने भी बिल पर आपत्ति जताई है। ऐसे में सरकार को दूसरे चरण में बिल लाने के बजाय सभी आपत्तियों और सुझावों की कार्यवाही सार्वजनिक करनी चाहिए। संघर्ष समिति का कहना है कि जब कर्मचारी, इंजीनियर और उपभोक्ता एक स्वर में विरोध कर रहे हैं तो यह सवाल उठता है कि क्या विधेयक निजी और औद्योगिक हितों को ध्यान में रखकर लाया जा रहा है। बिल पेश हुआ तो गोरखपुर में भी होगा आंदोलन समिति ने कहा कि बजट सत्र के दूसरे चरण से पहले उपभोक्ता और किसान संगठनों के साथ संवाद किया जाएगा। इसके बावजूद यदि संसद में बिल पेश किया गया तो गोरखपुर समेत देशभर में व्यापक और संगठित विरोध किया जाएगा।