बिना LDA का पक्ष सुने कोई फैसला नहीं देगा NCLAT:लखनऊ में अंसल प्रोजेक्ट्स को राहत, दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया जारी रहेगी

लखनऊ में निवेशकों के साथ फ्रॉड करने वाले API अंसल ग्रुप के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने अहम फैसला सुनाया है। इसमें एनसीएलएटी ने लखनऊ विकास प्राधिकरण के पक्ष को स्वीकार किया। ट्रिब्यूनल ने एनसीएलटी को निर्देश दिये हैं कि बिना एलडीए का पक्ष सुने प्रकरण में कोई भी आदेश पारित नहीं किया जाएगा। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने अंसल ग्रुप को दिवालिया घोषित करते हुए आईआरपी (इंट्रिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल) नियुक्त किया है। इससे अंसल की परियोजनाओं में भूखण्ड, फ्लैट, विला व व्यावसायिक सम्पत्तियों में निवेश करने वाले हजारों निवेशकों की पूंजी फंस गई हैं। इनमें कई ऐसे आवंटी हैं, जिन्हें कंपनी ने वर्ष 2009 में भूखण्ड बेचे, लेकिन अब तक कब्जा नहीं दिया गया। कार्रवाई कंपनी के सभी प्रोजेक्ट्स पर नहीं ट्रिब्यूनल ने कहा है कि कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया (CIRP) चलेगी, लेकिन यह कार्रवाई कंपनी के सभी प्रोजेक्ट्स पर नहीं, बल्कि सिर्फ चुनिंदा प्रोजेक्ट्स तक ही सीमित रहेगी। यह मामला ILFS फाइनेंशियल सर्विसेज की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। ILFS ने Ansal Properties को साल 2016 में ₹50 करोड़ और ₹100 करोड़ के दो लोन दिए थे। ये लोन लखनऊ के मदर सिटी, एक्सटेंशन और गोल्फ प्लॉट्स और राजस्थान के अजमेर, जोधपुर और जयपुर की संपत्तियों के बदले दिए गए थे। जांच में सामने आया कि कंपनी पर कुल करीब ₹257 करोड़ का कर्ज है, जिसमें से कम से कम ₹83 करोड़ का डिफॉल्ट साफ तौर पर साबित हुआ। इसी आधार पर NCLAT ने माना कि दिवालिया प्रक्रिया शुरू करना सही है। होम बायर्स और प्रमोटर की आपत्ति इस फैसले के खिलाफ कुछ होम बायर्स और कंपनी के प्रमोटर-डायरेक्टर प्रणव अंसल ने अपील की थी। उनका कहना था कि अगर पूरी कंपनी पर CIRP लागू हुई तो सभी प्रोजेक्ट्स रुक जाएंगे और हजारों खरीदारों को नुकसान होगा। इस मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), BKDA, GDA, UP RERA और यूपी आवास विकास परिषद ने भी अपनी बात रखी। इनका कहना था कि ये प्रोजेक्ट्स हाईटेक टाउनशिप पॉलिसी के तहत बने हैं और जमीन का एक हिस्सा परफॉर्मेंस गारंटी के तौर पर मॉर्टगेज्ड है, इसलिए इसमें जनहित जुड़ा हुआ है। NCLAT का संतुलित फैसला ट्रिब्यूनल ने कहा कि रियल एस्टेट मामलों में प्रोजेक्ट-वाइज समाधान ही बेहतर तरीका है। इसके तहत आदेश दिया गया कि CIRP सिर्फ लखनऊ के मदर सिटी, एक्सटेंशन और गोल्फ प्लॉट्स और राजस्थान के कुछ तय एसेट्स तक ही लागू होगी। यूपी के अन्य शहरों जैसे गाजियाबाद, बुलंदशहर और हरियाणा-पंजाब के प्रोजेक्ट्स को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। NCLAT ने यह भी कहा कि LDA को MoU की शर्तों के तहत प्रोजेक्ट पूरा करने के अधिकार पर विचार किया जाए। आगे क्या होगा 25 फरवरी 2025 को ही CIRP की शुरुआत की तारीख मानी जाएगी। मामला अब NCLT में प्रोजेक्ट-वाइज समाधान के आधार पर आगे बढ़ेगा। LDA को केस में पार्टी बनाया जाएगा। होम बायर्स और दूसरे पक्ष चाहें तो NCLT में अलग से आवेदन कर सकते हैं।