‘लोकसभा से मुझे जनता ने नहीं, बल्कि साजिश के तहत हटाया गया। मेरा कार्यकाल पूरा नहीं हुआ था। मुझे बेइज्जत करके निकाला गया। अगर जिंदा रहा तो एक बार जरूर लोकसभा जाऊंगा। कोशिश तो रहेगी कि अपनी ही पार्टी से जाऊं, लेकिन बाद की बाद में देखेंगे।’ ‘जब मैं खराब दौर से गुजर रहा था, तब अखिलेश यादव ने मेरे खिलाफ एक शब्द नहीं बोला। मैं उसका एहसान कभी नहीं भूलूंगा।’ ये बातें भाजपा के कद्दावर नेता, पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने कहीं। उन्होंने लोकसभा का टिकट काटे जाने, अखिलेश यादव से रिश्ते, 2029 के चुनाव को लेकर अपनी रणनीति और राम मंदिर उद्घाटन में न बुलाए जाने पर पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा- एक जनप्रतिनिधि और सीनियर राजनेता होने के बावजूद मुझे न्योता नहीं दिया गया। इसका हमेशा दुख रहेगा। जब तक जिंदा हूं, इस बात का अफसोस रहेगा। यह धोखा था। दूसरी बार जब न्योता आया तो मैंने खुद हाथ जोड़कर मना कर दिया, क्योंकि मैं स्वाभिमान से समझौता नहीं कर सकता। राम जन्मभूमि आंदोलन में जिनका कोई योगदान नहीं था, उन्हें बुलाया गया और असली कारसेवकों को नजरअंदाज किया गया। हीरो-हीरोइन बुला लिए गए, उनका क्या योगदान था? क्या मंदिर निर्माण में हमसे या विनय कटियार से ज्यादा योगदान था उनका? मैं अब तक रामलला दर्शन के लिए नहीं गया। अब जब जाऊंगा तो आम बनकर। लाइन में लगकर दर्शन करूंगा। पास और खास के सहारे नहीं जाऊंगा। अब बृजभूषण की 5 बड़ी बातें पढ़ते हैं… 1. अखिलेश के एहसान कभी नहीं भूलूंगा
अपने ऊपर लगे आरोपों के दौर को याद करते हुए बृजभूषण ने कहा- जब मैं खराब दौर से गुजर रहा था, तब अखिलेश यादव ने मेरे खिलाफ एक शब्द नहीं बोला। मैं उसका एहसान कभी नहीं भूलूंगा। जो एहसान भूल जाता है, उसे नर्क में भी जगह नहीं मिलती। बृजभूषण ने यह भी जोड़ा कि उस वक्त मायावती, नीतीश कुमार और लालू यादव की पार्टी ने भी उनके खिलाफ बयान नहीं दिए थे, लेकिन सपा मुखिया मौन रहे। 2. राहुल गांधी के बयानों से तकलीफ होती है
राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए बृजभूषण ने कहा- राहुल गांधी मेरे निशाने पर नहीं हैं, लेकिन जब वह सेना और सनातन पर सवाल उठाते हैं तो एक आम नागरिक के रूप में मुझे तकलीफ होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल के सलाहकार वामपंथी सोच के हैं, जो देश की मिट्टी से जुड़े नहीं हैं। इसी वजह से वह ऐसे मुद्दे उठाते हैं, जो पाकिस्तान में पसंद किए जाते हैं। 3. लखनऊ में काम निकलवाने के लिए विधायक पैर छूते हैं
पॉड-कास्ट में बृजभूषण अपने पुराने बयान पर कायम दिखे। उन्होंने कहा- आज भी लखनऊ में विधायक अपने काम निकलवाने के लिए अधिकारियों के पैर छूते हैं। कुछ सजातीय होते हैं, कुछ उम्र में बड़े होते हैं, तो पैर छू लिए जाते हैं। 4. सीएम योगी और अमित शाह को न्योता दिया
बृजभूषण ने बताया कि उनके यहां होने वाली राष्ट्र कथा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री अमित शाह को आमंत्रण दिया गया है। सीएम आएंगे या नहीं, यह उनका विषय है, लेकिन मेरा मन कहता है कि योगी जी आ सकते हैं। 5. 2029 चुनाव पर साफ इरादा- अपमान का घाव भरूंगा
चुनाव को लेकर बृजभूषण ने कहा- मुझे जनता ने नहीं हटाया, साजिश ने हटाया। इसीलिए एक बार फिर जनता के बीच जाऊंगा। अपमान का घाव भरूंगा। हालांकि, कहां से लडूंगा, यह जनता तय करेगी। कोशिश होगी कि भाजपा से ही जाऊं। अगर पार्टी बेटे को टिकट देती है तो वह भी चुनाव लड़ेंगे, लेकिन मेरा मन है कि मैं खुद एक बार लोकसभा जरूर जाऊं। भास्कर के इस पोल पर अपनी राय दीजिए… छोटी उम्र में पांच भाइयों को खोया, छात्र संघ से सियासत में की एंट्री बृजभूषण सिंह का जन्म 8 जनवरी 1957 को गोंडा जिले के बिसनोहरपुर गांव में हुआ था। वो जब 12 साल के थे तो 2-3 साल के अंदर उनके 5 भाइयों की मौत हो गई। घर की सारी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उनके चचेरे बाबा विधायक थे, इसलिए परिवार का राजनीतिक रसूख था। साथ ही रंजिश भी काफी थी। 16 साल की उम्र में ही बृजभूषण राजनीतिक रूप से सक्रिय होने लगे थे। इसके बाद जब उन्होंने साकेत कॉलेज में दाखिला लिया तो 1979 में छात्रसंघ का चुनाव जीता। बृजभूषण के हैं 48 डिग्री कॉलेज, कई इंटर कॉलेज भी हैं पोस्ट ग्रेजुएट, बृजभूषण राजनीति में लगातार हाथ आजमाते रहे। साल 1991 में पहली बार आनंद सिंह के खिलाफ बृजभूषण सिंह लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। इसके बाद वो 1991, 1999, 2004, 2009, 2014 और 2019 लोकसभा के निर्वाचित सदस्य बने। उनके करीबी बताते हैं कि 80 के दशक में बृजभूषण अपने तीन दोस्तों के साथ बालू खनन की ठेकेदारी करते थे। राजनीति के साथ-साथ वो धीरे-धीरे शिक्षा के क्षेत्र में उतरे। आज गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती समेत पूरे देवीपाटन मंडल में उनके 48 डिग्री कॉलेज हैं और कई इंटर कॉलेज भी हैं। गाय के नाम पर बनाया नंदिनी ग्रुप, स्कूल-कॉलेज की चेन बनाई सांसद बृजभूषण खुद को माटी से जुड़ा हुआ बताते हैं। उन्होंने अपने स्कूल-कॉलेज की चेन का नाम नंदिनी के नाम से रखा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम की नगरी अयोध्या से गोंडा जिला लगा हुआ है। जिसका प्राचीन नाम गोनर्द हुआ करता था। यहां ऋषि मुनि तपस्या किया करते थे। मान्यता है कि इसी भूमि पर रघुकुल के गुरु वशिष्ठ का आश्रम था। यहीं राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न ने शिक्षा ग्रहण की थी। ऋषि वशिष्ठ के पास एक नंदिनी नाम की गाय थी। ऋषि वशिष्ठ उस गाय की पूजा करते थे। इसी मान्यता के चलते बृजभूषण शरण सिंह ने 11 नवंबर 1994 को नंदिनी नगर महाविद्यालय की नींव रखी थी। इसके बाद उन्होंने कई स्कूल कॉलेज का नाम नंदिनी ग्रुप के नाम से रखा। इसमें इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, इंजीनियरिंग, नर्सिंग और मैनेजमेंट के कॉलेज शामिल हैं। बृजभूषण लग्जरी लाइफ को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। डेढ़ करोड़ रुपए का घोड़ा भी उनकी अस्तबल की शान बढ़ा रहा है। इसे उन्होंने खरीदा नहीं था, बल्कि गिफ्ट में मिला था। गिफ्ट देने वाले सांसद बेटे करण भूषण सिंह के दोस्त हैं। बृजभूषण ने खुद घोड़े का वेलकम किया था। उसे दुलारा था। जब उन्हें इसकी कीमत का पता चला तो ठहाका लगाते हुए कहा- यार, हम तो पागल हो जाएंगे। इस गिफ्ट से पहले यहां तीन महंगे मारवाड़ी घोड़े पहले से मौजूद थे। इनमें से एक बादल, कीमत करीब 10 लाख रुपए और दूसरा बुलेट, जिसकी कीमत करीब 8 लाख रुपए है। नए घोड़े के आने के बाद अब घोड़ों की संख्या चार हो गई है। इसके अलावा बृजभूषण के पास 150 से अधिक गायें हैं, जिनमें से करीब 70 गिर नस्ल की हैं। गिर नस्ल की प्रत्येक गाय की कीमत 5 लाख रुपए से अधिक आंकी जाती है। 5 एकड़ में बना सफेद बंगला, जिसमें हेलीपैड भी जिम के बाद अकसर घुड़सवारी करने चले जाते हैं ————————————— ये खबर भी पढ़िए… रेलवे सुपरवाइजर का सुसाइड…अफेयर में 6 महीने जेल रहा:पिता बोले- 2 लाख लेकर मानी गर्लफ्रेंड, कर रही थी ब्लैकमेल, बहन बोली- वो भी तड़पे ‘मेरे भाई को धमकियां देती थी। मुकदमे में फंसाकर भी उसे (लड़की) को चैन नहीं मिला। वो हार गया था, इसलिए सुसाइड कर लिया। हम यही चाहते हैं कि उनका परिवार भी वैसे तड़पे, जैसे हमारा भाई तड़पा।’ ये कहना है सुसाइड करने वाले सुमित की बहन प्रियंका का। आरोप है कि लव अफेयर में सुमित ने जान दे दी। उसका जिस लड़की से लव अफेयर था, वो शोभापुर (मेरठ) की रहने वाली है। पूरी खबर पढ़ें…