अलीगढ़ के बरौला जाफराबाद क्षेत्र के मोहल्ला जाहरवीर नगर में प्रॉपर्टी विवाद के चलते हुए दोहरे हत्याकांड में घायल पिता की भी मौत हो गई। 18 दिसंबर को परिवार के ही लोगों द्वारा की गई फायरिंग में बेटे की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि पिता गंभीर रूप से घायल थे। करीब 36 घंटे बाद शुक्रवार देर रात इलाज के दौरान पिता ने भी दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान प्रवेश (62) और उनके बेटे सोनू (35) के रूप में हुई है। बताया गया कि 18 दिसंबर को प्रवेश के दोनों भाइयों और भतीजे ने पिता-पुत्र पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं थीं। फायरिंग में सोनू को चार गोलियां लगीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं प्रवेश को गंभीर हालत में जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान शुक्रवार देर रात उनकी भी मौत हो गई। 2 घंटे तक बरौला बाईपास पर जाम लगा रहा
शनिवार को प्रवेश के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमॉर्टम के बाद जब पुलिसकर्मी और परिजन शव लेकर मोहल्ला जाहरवीर नगर पहुंचे, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया। दोहरे हत्याकांड से गुस्साए लोगों ने बरौला बाईपास पर जाम लगा दिया। परिजन और स्थानीय लोग अपना हक और न्याय की मांग करने लगे। सूचना पर पहुंचे सीओ द्वितीय कमलेश कुमार ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। कड़ी मशक्कत के बाद महिलाओं और लोगों को समझाकर जाम खुलवाया गया। करीब दो घंटे बाद यातायात सामान्य हो सका। सोनू की मौत के बाद भी लगाया था जाम
इससे पहले 18 दिसंबर को सोनू की मौत के बाद भी परिजनों ने बरौला बाईपास रोड पर जाम लगाया था। पीड़ित परिवार की महिलाएं आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अपने हक की मांग को लेकर बीच सड़क पर बैठ गई थीं। इस दौरान सोनू की मां बेहोश हो गई थीं। देर शाम सोनू के दादा द्वारा उनके हिस्से की जमीन नाम कराने के आश्वासन के बाद ही जाम खुल सका था। खून के बदले खून और फांसी की मांग
प्रदर्शन के दौरान सोनू की पत्नी जशोदा ने आरोप लगाया कि ददिया ससुर ने उनके परिवार को जमीन में हिस्सा नहीं दिया था, जबकि बाकी बेटों के नाम बैनामा कर दिया गया था। आरोपियों की नीयत उनके हिस्से की जमीन हड़पने की थी, इसी को लेकर विवाद चल रहा था। जशोदा ने कहा कि इसी विवाद में उनके पति और ससुर की हत्या कर दी गई। वह लगातार खून के बदले खून और आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग करती रहीं। भीड़ की वजह से बची छोटे बेटे की जान
प्रवेश के छोटे बेटे किशन गोपाल ने बताया कि उनके चाचा रविंद्र और दिनेश तथा रविंद्र के बेटे कृष्णा ने पहले उनके पिता को गोली मारी, फिर उनके भाई सोनू को निशाना बनाया। आरोपियों ने उन्हें भी रास्ते से हटाने की धमकी दी थी, लेकिन मौके पर मौजूद भीड़ के कारण उनकी नजर उन पर नहीं पड़ी और आरोपी हथियार लहराते हुए फरार हो गए। तीनों आरोपी जेल भेजे गए
पुलिस ने इस मामले में तीनों आरोपियों रविंद्र, दिनेश और कृष्णा को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ के बाद शनिवार को उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने दावा किया कि पहले प्रवेश और उनके बेटे सोनू ने रविंद्र के साथ मारपीट की थी, जिसमें रविंद्र के सिर में चोट आई थी। इसी के बाद मामला बढ़ गया और वारदात को अंजाम दिया गया।