भारत दुनिया का सबसे बड़ा बकरी के दूध का उत्पादक देश बन गया है। इस उपलब्धि से वैश्विक बाजार में नई संभावनाएं खुल गई हैं, खासकर यूरोप, चीन, अमेरिका और मिडिल ईस्ट जैसे देशों में जहां गोट मिल्क की भारी मांग है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत एक स्पष्ट विपणन नीति और मजबूत ब्रांडिंग रणनीति अपनाता है, तो बकरी के दूध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘इंडिया ब्रांड’ के रूप में स्थापित किया जा सकता है। इससे देश के करोड़ों छोटे पशुपालकों को नई आर्थिक ताकत मिलेगी। बकरी का दूध स्वस्थ जीवनशैली में उपयोगी टीजीटी ग्लोबल के संस्थापक और अशोका फेलो प्रो. संजीव कुमार ने लखनऊ के रसूलपुर सादात स्थित द गोट ट्रस्ट—गोट गुरुकुल में आयोजित एक गोष्ठी में यह बात कही। उन्होंने बताया कि बकरी के दूध का उपयोग दुनिया भर में स्वस्थ जीवनशैली और संपूर्ण पोषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। आयुर्वेद इसे हल्का, सुपाच्य और अत्यधिक पौष्टिक मानता है। प्रो. कुमार के अनुसार, जिन लोगों को गाय या भैंस का दूध भारी लगता है, उनके लिए बकरी का दूध एक बेहतरीन विकल्प है। उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक रूप से चरने वाली बकरियों का दूध सबसे सुरक्षित और सहज विकल्प माना जाता है।इस अवसर पर कैप्रिको गोट मिल्क के विपणन प्रमुख विनय गौतम ने बकरी के दूध के कई स्वास्थ्य लाभ बताए। उन्होंने कहा कि इसके फैट ग्लोब्यूल्स बेहद छोटे होते हैं, जिससे यह तेजी से पचता है और गैस, एसिडिटी व अपच से राहत दिलाने में प्रभावी है। हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी गौतम ने आगे बताया कि सेलेनियम, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट इसे इम्यूनिटी बूस्टर बनाते हैं, जबकि कैल्शियम, फॉस्फोरस और विटामिन-डी हड्डियों को मजबूत करते हैं। यह हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है, क्योंकि इसमें कम कोलेस्ट्रॉल और पोटैशियम की मौजूदगी रक्तचाप नियंत्रित रखने में सहायक होती है। इग्मा के निदेशक उज्ज्वल सरकार ने त्वचा सौंदर्य में बकरी के दूध की उपयोगिता के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को प्राकृतिक नमी, कोमलता और चमक प्रदान करता है। यही कारण है कि कई कॉस्मेटिक और आयुर्वेदिक उत्पादों में गोट मिल्क का इस्तेमाल बढ़ रहा है।