भारत विकास परिषद, अवध प्रान्त द्वारा आयोजित पांच दिवसीय पंचसूत्रीय कथा महोत्सव का चौथा दिन ‘परिवार प्रबोधन’ विषय पर केंद्रित रहा। इस दिन की कथा व्यास नंदलाल महाराज ने प्रस्तुत की, जिन्होंने अपने गीतों, भजनों और प्रेरक प्रवचनों से श्रोताओं को प्रभावित किया। कथा व्यास पं नंदलाल महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि मीरा ने केवल विष नहीं पिया, बल्कि हर मनुष्य को अपने जीवन में किसी न किसी रूप में ‘विष’ पीना पड़ता है। उन्होंने अपमान को एक ऐसे ही ‘विष’ के रूप में वर्णित किया, जिसे मनुष्य को निगलना होता है।परिवार में सकारात्मकता और सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यदि कोई बच्चा परीक्षा या साक्षात्कार में असफल हो जाए, तो उसे डांटने के बजाय गले लगाकर मार्गदर्शन देना चाहिए। श्रीमद्भगवद्गीता के अध्ययन से प्रेरणा लेकर वे भारत के महान वैज्ञानिक और राष्ट्रपति बने उन्होंने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उदाहरण दिया, जो अपने पहले साक्षात्कार में असफल रहे थे। महाराज ने बताया कि गुरु के मार्गदर्शन और श्रीमद्भगवद्गीता के अध्ययन से प्रेरणा लेकर वे भारत के महान वैज्ञानिक और राष्ट्रपति बने। इसी प्रकार, भगवान श्रीराम को भी 14 वर्षों का वनवास भोगना पड़ा और जीवन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा था । समाज काफी हद तक समरस हो गया कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक ओम पाल सिंह ने कहा कि नंदलाल महाराज की कथा ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि वे पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुटुंब प्रबोधन का कार्य देखते हैं। उनके अनुसार, कुटुंब प्रबोधन का मूल उद्देश्य परिवार को सुचारु रूप से चलाना और उसे सशक्त बनाना है, क्योंकि परिवार ही समाज की मूल इकाई है। मुख्य अतिथि, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री असीम अरुण ने सामाजिक समरसता पर बात करते हुए कहा कि समाज काफी हद तक समरस हो गया है, लेकिन इस दिशा में अभी और कार्य करने की आवश्यकता है। प्रांतीय प्रचार सचिव प्रदीप मिश्रा ने बताया कि कथा महोत्सव का अंतिम दिन कल होगा।