ममता कुलकर्णी का भगवा आतंक चलने नहीं दूंगी:‘ताली’ मूवी की गौरी सावंत बोलीं-भगवा दुपट्‌टा ओढ़ने से कोई महामंडलेश्वर नहीं बनता

प्रयागराज में सनातनी किन्नर अखाड़ा बनने के साथ जो चेहरे चर्चा में आए, उनमें ट्रांसजेंडर गौरी सावंत उर्फ गौरी मां का नाम टॉप पर रहा। नया अखाड़ा क्यों बना लिया? इस पर वह कहती हैं– भगवा दुपट्‌टा ओढ़ने से कोई महामंडलेश्वर नहीं बन जाता है, अगर ऐसा होने लगा तो वर्षों से तप करने वाले साधु-संतों का क्या होगा? ममता कुलकर्णी का भगवा आतंक मैं चलने नहीं दूंगी। वह गुस्से में आगे कहती हैं- जो देशद्रोह और आतंक से जुड़े लोगों का समर्थन करती हैं, उन्हें किन्नर अखाड़े में महामंडलेश्वर किस आधार पर बनाया गया, इसकी जांच होनी चाहिए। दैनिक भास्कर ने गौरी मां से खास बातचीत की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… मैं किन्नर अखाड़े की संस्थापक सदस्य रहीं
गौरी सावंत कहती हैं- जब 2014 में किन्नर अखाड़ा बन रहा था, तब मैं भी उसकी संस्थापक सदस्य रही। मैं उस अखाड़े में शुरूआती दिनों में जुड़ गई थी, मगर वह अखाड़ा अपने उद्देश्यों से भटक गया था, तब हमने अखाड़े से दूरी बना ली। हमने पूछा- वो उद्देश्य क्या थे, जिनसे अखाड़े के भटकने की बातें कही जा रही है? गौरी सावंत कहती हैं- 4 मुख्य उद्देश्य थे, मगर अब वो सब पीछे छूट गए। कमला होतीं महामंडेलश्वर, ऐन वक्त पर लक्ष्मीनारायण को बनाया
गौरी मां ने आगे कहा- जब किन्नर अखाड़े की स्थापना हो रही थी, तब उज्जैन में ही कमला मौसी आचार्य महामंडलेश्वर बनने वाली थीं, लेकिन ऐन वक्त पर कुछ घटनाक्रम हुए। जो मैं आपको बता नहीं सकती हूं, फिर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी आचार्य महामंडलेश्वर बनीं। अब गौरी सावंत के जीवन से जुड़े सवाल… सवाल : आप अपने शुरुआती जीवन के बारे में कुछ बताइए?
जवाब : (बचपन के दिनों को याद करते हुए) 2 जुलाई, 1979 को पुणे के एक मराठी परिवार में मेरा जन्म हुआ। पापा पुलिस में थे और मां हाउसवाइफ। मेरे जन्म के समय डॉक्टर ने कहा था- ‘सावंत सर बधाई हो, बेटा हुआ है।’ एक बेटी के बाद बेटा पैदा हुआ था, इसलिए मेरे मां-बाप बहुत खुश हुए थे। मेरे जन्म पर बाकी बच्चों की तरह ही मिठाइयां बांटी गईं, सोहर गाई गई। माता-पिता ने ही मेरा नाम बड़े प्यार से गणेश नंदन रखा था, लेकिन जैसे-जैसे मैं बड़ी होती गई, वैसे-वैसे मैं उनके लिए शर्मिंदगी का कारण बनती गई। सवाल : आपने घर किन हालात में छोड़ा था?
जवाब : मां बहुत प्यार करती थीं, लेकिन 7 साल की उम्र में ही मुझे छोड़कर चली गईं। मां के बाद दादी ने पाला। मुझे दादी की साड़ियां पहनना, सजना-संवरना अच्छा लगता था। 7-8 साल तक की उम्र में मैं लड़कियों के साथ खेला करती थी। स्कूल में बच्चे मेरा मजाक बनाते। मुझ पर भद्दे ताने कसते। जैसे-जैसे बड़ी होने लगी, पिता मेरे प्रति सख्ती बरतने लगे। मैंने उन्हें अपनी बात समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने डांटा और बात करना छोड़ दिया। कॉलेज में पहुंची तो लड़कों के प्रति आकर्षित होने लगी। मैंने अपने परिवार को अपनी सेक्सुएलिटी के बारे में बताया, लेकिन उन लोगों ने कभी भी स्वीकार नहीं किया। मैं भी अपने परिवार और पिता के लिए शर्मिंदगी का कारण बनना नहीं चाहती थी, इसलिए 16 साल की उम्र में सिर्फ 60 रुपए लेकर घर से निकल गई। सवाल : फिर आप कहां गई?
जवाब : मुंबई पहुंची, उस वक्त मेरे पास न खाने को खाना और न रहने को घर था। मैले से कपड़ों में एक सिग्नल के पास खड़े होकर भीख मांगने लगी, तभी किसी ने 5 रुपए का फटा नोट मेरी हथेली पर रख दिया। उस नोट को उलट-पुलट कर देखा। फिर फैसला किया कि हां, मुझे लड़कियों की तरह रहना है, साड़ी पहननी है, सजना-संवरना है, लेकिन भीख नहीं मांगनी है और न ही सेक्स वर्कर बनना है। मुझे मेहनत की कमाई खानी है और सम्मान की जिंदगी जीनी है। इसके बाद मुंबई के दादर में ट्रांसजेंडर कम्युनिटी के साथ रहने लगी। सवाल : लाइफ में बदलाव कब हुआ?
जवाब : मुंबई में आने के कुछ दिन बाद ही मेरी मुलाकात कंचन अम्मा से हुई। जिन्होंने मुझे अपना शिष्य बनाया और हमने उन्हें अपना गुरु मान लिया। इसके बाद हमने एनजीओ बनाया और सोशल वर्कर के रूप में काम करना शुरू किया। ट्रांसजेंडर के वेलफेयर के लिए काम करना शुरू कर दिया। ‘हमसफर’ ट्रस्ट के साथ जुड़कर किन्नरों के हित के लिए काम करने लगी। इसी ट्रस्ट की मदद से खुद की वेजिनोप्लास्टी करवा ली और गणेश नंदन से हमेशा के लिए गौरी सावंत बन गई। साल 2000 में ‘सखी चार चौघी’ नाम से एक संस्था बनाई और किन्नरों के हित के लिए काम करना शुरू कर दिया। सवाल : आपके ऊपर एक मूवी ताली बनाई गई है, क्या वो आपकी रियल लाइफ है?
जवाब : ताली मूवी में जो दिखाया गया है, वह मेरी रियल लाइफ की कहानी है। बारिश में अस्पताल में धरने पर बैठने से लेकर मैंने जो कुछ किया, वो सब उस मूवी में दिखाया गया है। इसमें बालीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन ने किन्नर गौरी सावंत की भूमिका निभाई थी। ताली मूवी सिर्फ एक गौरी की कहानी नहीं है, बल्कि हर उस गौरी की कहानी है, जो चौराहों पर ताली बजाकर पैसे मांगती है। हम सभी अपनों से बिछड़े हुए हैं और समाज से दुत्कारे गए हैं। हर दिन हम किन्नरों को परीक्षा देनी होती है, क्योंकि हमारा जीवन ही संघर्षों से भरा होता है। हम भले किन्नर हैं, मगर सनातनी हैं…
उन्होंने कहा, मैं अनाथ बच्चों के साथ काम करती हूं। किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं है। हमारे यहां हिंदू और मुस्लिम सभी के बच्चे आते हैं। लेकिन मेरा जन्म हिंदू परिवार में हुआ है, इसलिए ईश्वर पर विश्वास है। सनातन के लिए काम करते हैं। भगवान पर किसी का अधिकार तो नहीं है कि सिर्फ स्त्री या पुरुष ही पूजा कर सकते हैं। सनातन को जेंडर में नहीं बांधना चाहिए। हम भले ही किन्नर हैं लेकिन सनातनी हैं। जानिए कौन हैं गौरी सावंत उर्फ गौरी मां अब ये जानिए कि ममता कुलकर्णी ने क्या कहा था… उसने कोई बम ब्लास्ट नहीं किया, वो आतंकी नहीं
गोरखपुर के दौरे के दौरान अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को लेकर उन्होंने कहा था, “उसने कोई बम ब्लास्ट नहीं किया, वह आतंकी नहीं है।” उन्होंने यह भी साफ किया कि वह दाऊद से कभी नहीं मिलीं। ममता ने कहा था, “मैं आज पूरी तरह अध्यात्म के मार्ग पर हूं। राजनीति या फिल्म इंडस्ट्री से मेरा कोई संबंध नहीं है।” हालांकि, पूरे मामले पर बवाल होने के बाद ममता ने अपने बयान से किनारा कर लिया है और सफाई दी। बयान पर बवाल होने के बाद ममता का यू-टर्न
‘दाऊद इस देश का टेररिस्ट है और रहेगा’
अपने बयान को लेकर घिरने के बाद ममता कुलकर्णी ने गुरुवार को दैनिक भास्कर से बातचीत में सफाई दी। उन्होंने कहा- दाऊद से मेरा लेना-देना नहीं है। दाऊद इस देश का टेररिस्ट है और रहेगा। मैं विक्की गोस्वामी की बात कर रही थी। उसका विस्फोट से कोई लेना-देना नहीं था। आज मेरा उससे कोई लेना-देना नहीं है। मेरा बयान गलत ढंग से दिखाया गया। मैं महामंडलेश्वर हूं। उसी के अनुरूप कार्य कर रही हूं। नाराज टीना मां ने सनातनी किन्नर अखाड़ा बनाया
ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़ा का महामंडलेश्वर बनाए जाने से नाराज टीना मां ने 5 नवंबर को ‘सनातनी किन्नर अखाड़ा’ बना लिया। वह आचार्य महामंडलेश्वर बन गईं हैं। चर्चा रही कि ममता कुलकर्णी के किन्नर अखाड़े में महामंडलेश्वर बनाए जाने के बाद से वह नाराज चल रही थीं। प्रयागराज में पट्‌टाभिषेक से पहले टीना मां संगम से जल लेकर पहुंचीं थी। बैरहना स्थित आश्रम में गुरु अंजलि ने उनका पट्टाभिषेक कराया था। इसके बाद टीना मां ने सनातनी किन्नर अखाड़े के नए ध्वज को फहराया। टीना मां के पट्टाभिषेक के बीच 51 ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार किया। इस दौरान काशी से 20 से अधिक डमरू वादक भी पहुंचे। बैंडबाजों की धुन पर किन्नरों ने जमकर डांस किया। टीना मां ने पट्टाभिषेक के बाद संजनानंद गिरी को महामंडलेश्वर और संध्यानंद गिरी को श्रीमहंत बनाने की घोषणा की। …………….
अब सनातनी किन्नर अखाड़ा बनने की कहानी भी जानिए… ममता कुलकर्णी से टीना मां इतनी नाराज क्यों?: सनातनी किन्नर अखाड़ा को बनाने वाले 3 चेहरे कौन, पढ़िए इनसाइड स्टोरी टाइम – 10.45 बजे (रात), 23 जनवरी, 2025, स्पॉट – महाकुंभ में किन्नर अखाड़े का टेंट। मुख्य आसन पर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी बैठी थीं। करीब ही बॉलीवुड एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी मौजूद थीं। दूसरी तरफ जो अखाड़े के कुछ अहम चेहरे बैठे थे, उनमें कौशल्या नंद गिरि उर्फ टीना मां भी शामिल थीं। पढ़िए पूरी खबर…