महाकुंभ के बाद अब माघ मेले में किन्नर अखाड़े का शिविर स्थापित हो चुका है। किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी भी इस अपने इस शिविर में 15 जनवरी को पहुंच रही हैं। मेले में संगम लोवर, ओल्ड जीटी रोड चौराहे पर लगे शिविर में देश के अलग – अलग प्रदेश से दर्जनभर किन्नर संतों को महंत, श्रीमहंत, मंडलेश्वर और महामंडलेश्वर के पदों पर पट्टाभिषेक 16 जनवरी को होने जा रहा है। यह किन्नर संत, महात्मा दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु सहित अन्य प्रदेशों के रहने वाले हैं जो कई वर्षों से सनातन धर्म की सेवा कर रहे है। आचार्य महामंडलेश्वर खुद उनका पट्टाभिषेक करेंगी। ‘सनातन धर्म मोक्ष का मार्ग दिखाता है’ आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि संस्कारों वाला सनातन धर्म है जो मोक्ष का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म आदि, अनादि काल से साश्वत है जो निरंतर चल रहा है। यह धर्म भारत ही नहीं बल्कि विश्व में भी अपनी जड़े जमाए हुए है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बहुत से विदेशी आक्रांताओं ने सनातन धर्म को कई बार क्षति पहुंचाने की कोशिश किया लेकिन सनातन धर्म साश्वत चलता रहा। उन्होंने देश और विदेश से तीर्थ राज प्रयागराज आये हुए संत, महात्मा और कल्पवासियों के मंगल, उन्नति की भगवान वेणी माधव और तीर्थराज प्रयागराज से कामना की है। उधर, किन्नर अखाड़ा प्रयागराज की महामंडलेश्वर कल्याणीनंद गिरि (छोटी मां), नासिक से महामंडलेश्वर स्वामी पूजानंद गिरि सहित पांच दर्जनों शिष्य माघ मेला में लगे शिविर में कल्पवास करते हुए श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दें रही हैं।